Pati ko vash me karne ke upay || पति को वश में कैसे करें? द्रोपदी के अनुसार

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पति को वश में कैसे करें? द्रोपदी के अनुसार

पति को वश में कैसे करें? द्रोपदी के अनुसार

द्रौपदी ने पतियों को वश में करने के लिए सत्यभामा को दिया अनूठा ज्ञान! आइये जानें द्रोपदी और सत्‍यभामा के बीच हुआ यह अनोखा संवाद।

पति को वश में कैसे करें
पति को वश में कैसे करें पति को वश में कैसे करें

दोस्तों संसार के प्रत्येक पत्नी बस यही चाहती है कि उसका पति उसकी हर बात माने और वह उसे हमेशा खुश रखें। लेकिन आज के युग में तो सब कुछ उसका उल्टा ही हो रहा है।

ना तो पति पत्नी की बात मानता है और ना ही पत्नी पति की। लेकिन दोस्तों आज हम आपको महाभारत के एक पर्व के अध्याय में उल्लेखित द्रौपदी व सत्यभामा के बीच एक संवाद प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

इसमें द्रोपदी ने पति-पत्नी के दांपत्य संबंधों को मधुर बनाने के लिए 12 ऐसी महत्वपूर्ण बातें बताई थी जिसका पालन करके कोई भी स्त्री अपने ग्रस्त जीवन को स्वर्ग बना सकती है। तो चलिए शुरू करते हैं।

एक दिन की बात है। पांडव और संत लोग आश्रम में बैठे थे। उसी समय भगवान श्री कृष्ण की प्यारी पटरानी सत्यभामा ने द्रोपदी से एकांत में पूछा।

हे द्रुपद कुमारी! तुम किस प्रकार से ऐसे हष्ट पुष्ट अंगों वाले लोग, पागलों के समान वीर पांच पांच पांडवों के ह्रदय पर राज करती हो? मैंने स्वयं देखा है कि किस प्रकार से यह भाई सदा ही तुम्हारे वश में रहते हैं।

यह लोग कभी तुम पर कुपित नहीं होते और तो और यह सब के सब सदा ही तुम्हारे सुख की चिंता ही करते रहते हैं।

अतः हे पांचाल कुमारी, आज तुम मुझे भी ऐसा कोई जप तप व्रत मंत्र या कोई और शब्द बताओ जो तुम्हारी तरह मेरे सौभाग्य में भी वृद्धि कर दें ताकि मेरे श्याम सुंदर सदा सदा के लिए मेरे वश में हो जाए।

ऐसा कहकर यशस्विनी सत्यभामा चुप हो गई। इस सब पर द्रोपदी ने कहा सत्यभामा, तुम मुझसे किस विषय में पूछ रही हो? यह साध्वी स्त्रियों का नहीं अपितु दुराचारी और कुल्टा स्त्रियों का आचरण है। जरा सोचो तुम श्याम सुंदर की प्रियतम पटरानी हो।

जब तुम्हारे पति को यह मालूम पड़ेगा कि तुम उसे अपने वश में करने के लिए किसी प्रकार के मंत्र तंत्र अथवा जड़ी बूटी का प्रयोग कर रही हो तो वह सब पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे?

वह तो क्या बल्कि उनके स्थान पर कोई अन्य पुरुष हो तो वह भी उसी प्रकार से उद्विग्न हो उठेगा। अपने घर में घुसे सांप को देखकर लोग शांत हो जाते हैं।

अब तुम ही बताओ उस दिन या शांति पुरुष से कभी सुख की प्राप्ति हो सकती है। नहीं ऐसा संभव ही नहीं है और तो और पति को वश में करने के चक्कर में अब तक कई स्त्रियों ने अनजाने में शत्रुओं द्वारा भेजी गई औषधियों को खिला कर अपने पतियों को नपुंसक या कोड जैसे भयंकर रोग दे दिए हैं।

और इस प्रकार से दोस्तों द्रोपदी के मुख से ये शब्द सुनकर सत्यभामा का भ्रम दूर हुआ। द्रोपदी, सत्यभामा को पति के राज करने हेतु 12 सूत्र बताए जिनका पालन संसार की प्रत्येक स्त्री को करना चाहिए।


पति को वश में करने के तरीके || पति को वश में कैसे करें


काम, क्रोध और अहंकार का त्‍याग

द्रोपदी ने कहा कि काम, क्रोध, अहंकार को छोड़कर बड़ी सावधानी से पांडवों तथा उनकी पत्नियों की भली प्रकार से सेवा करती हूं।

यहां पर द्रौपदी सत्यभामा को अप्रत्यक्ष रूप से यह कह रही है कि हम जैसा आचरण दूसरों के साथ करते हैं समय आने पर दूसरे भी हमारे साथ वैसा ही आचरण करते हैं।

अतः समझदारी इसी में है कि कोई भी पत्नी अपने पति की सच्चे मन से सेवा करें ताकि पति के मन में भी इसी प्रकार के भाव का जन्म हो और वह भी अपनी पत्नी से मैत्रीपूर्ण व्‍यवहार करें।



कटु वचन न बोलना

इसके बाद दोस्तों द्रोपदी, सत्यभामा को दूसरी बात बताते हुए कहती है कि सत्यभामा देवी जी, मैं सदैव जलन की भावना से दूर रहती हूं। यदा-कदा मेरे मन में कभी ऐसा भाव अभी जाता है तो मैं अपने मन को नियंत्रित करने का प्रयास करती हूं।

और जब तक नियंत्रित नहीं होता तब तक किसी भी प्रकार के कटु वचन को कहने से बचती हूँ। वैसे दोस्तों देखा जाए तो यहां पर द्रौपदी ने बहुत ही उत्तम बात कही है।

क्योंकि ऐसा अक्सर होता है शायद आपने भी कभी अनुभव किया होगा जब हमारे मन में किसी बात को लेकर कोई या गुस्सा रहता है और ऐसे में यदि हम कोई बात कहते हैं तो ज्यादातर मामलों में वह बात कड़वी होती है। जिससे कि सुनने वाला भी नाराज हो जाता है और जरा सी बात का बतंगड़ बन जाता है।


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चरित्र की रक्षा

तीसरी बात बताते हुए कहा कि मैं ना तो कभी किसी के समक्ष खड़ी होती हूं और ना ही कभी किसी पर दृष्टि डालती हूं। तो दोस्तों कुछ समझे आप?

यहां पर द्रौपदी, सत्यभामा को शारीरिक हाव-भाव यानी की बॉडी लैंग्वेज के बारे में समझा रही है जो कि जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्‍सा है।

और इसे हर किसी को ध्‍यान रखना चाहिए विशेषकर महिलाओं को। क्योंकि कई बार ऐसा हो जाता है कि लोग आपके हाव-भाव को देखकर आपके चरित्र के बारे में गलत अंदाजा लगा लेते हैं।


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कुसंगति वाली महिला से दूरी

चौथी बात बताते हुए कहा कि मैं ना तो बुरी बातें करती हूं और ना ही बुरी जगह जाकर बैठती हूं। यहां पर दोस्तों द्रोपदी यह कहना चाहती है कि किसी भी प्रकार की बुराई से बचते हुए महिलाओं को दुष्ट महिलाओं की कुसंगति से बचना चाहिए।

क्योंकि कई महिलाएं ऐसी होती है जिन्हें दूसरों की बुराई करने में बड़ा रस आता है। और ऐसे में यदि कोई भोली भाली महिला इनके संपर्क में आ जाती है कोई अपनी कुमति से उसे भी अपने जैसा दोस्त बना देती हैं।



संकेतों को पहले ही समझ लेना

तदनंतर द्रोपदी ने पांचवीं बात बताते हुए कहा कि मैं सदैव अपने पतियों के अभिप्राय पूर्ण संकेतों का अनुसरण करती हूं।

यहां पर दोस्तों द्रोपदी सत्यभामा से यह कह रही है कि वह अपने पति के हाव भाव और उनके इशारों को सही ढंग से समझ कर उनके कुछ कहने से पहले ही उनके मन की बात जान लेती है। और उसी के अनुसार आचरण करती है।



परपुरूष पर आकर्षित न होना

इसके बाद दोस्तों द्रोपदी ने छठी बात बताते हुए कहा कि देवता, मनुष्य, सजा धजा रूपवान कोई शाही पुरुष ही क्यों ना हो, मेरा मन पांडवों के सिवा कहीं और नहीं जाता।

यहां पर मित्रों, द्रोपदी अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यह कह रही है कि किसी भी स्त्री को भूल से भी किसी पर पुरुष की ओर आकर्षित नहीं होना चाहिए।

फिर चाहे वह पुरुष साक्षात देवता ही क्यों ना हो। स्त्रियों के आचरण से ही व्यभिचार का जन्म होता है। और वैसे भी आपको तो पता ही है कि यह संसार कभी पुरुषों को दोष नहीं देता है। परंतु हां, लोग स्त्रियों पर उंगली उठाने में जरा भी संकोच नहीं करते हैं।



हर बात में पति को प्राथमिकता देना

तब द्रौपदी ने सातवीं बात बताते हुए कहा कि उनके स्नान किए बिना स्नान नहीं करती या उनके बैठे बिना स्वयं नहीं बैठती।

यहां पर दोस्तों द्रोपदी यह कहना चाहती है कि वह कभी भी अपने पतियों से बहस नहीं करती है अर्थात कोई भी कार्य निर्णय हो वह प्राथमिकता पति को ही देती है।

घर की स्‍वच्‍छता का ध्‍यान

इसके बाद दोस्तों द्रौपदी आठवीं बात बताते हुए कहती है। जब मेरे पति घर में आते हैं मैं घर साफ रखती हूं और उचित समय पर उन्हें भोजन कराती हूं।

वैसे दोस्तों अपने घरों में देखा होगा कि कई महिलाएं आलस्य के कारण ना तो घर की स्वच्छता का ख्याल रखती है और ना ही समय पर पति के लिए भोजन आदि की व्यवस्था करती है।

इसी कारण से ऐसे घरों में कलह शुरू हो जाता है। अतः इसी समस्या के निदान हेतु द्रौपदी सत्यभामा को आलस्य का त्याग समय पर अपने कार्यों को पूरा करने की सलाह दे रही है।



संकटकाल के लिये बचाकर रखना

तदनंतर द्रोपदी बात बताते हुए कहती है मैं सदा सावधान रहती हूं और घर में हमेशा गुप्त रूप से अनाज रखती हूं।

यह तो आपने देखा ही होगा कि बहुत सी महिलाओं की आदत होती है कि एक घर गृहस्ती या रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं या धन की कोई विशेष परवाह नहीं करती है।

इनके पास जितना आता है यह उन्हें उतना ही खर्च कर देती हैं। लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे हो जाते हैं कि जब इन्हें ऊंची वस्तु या धन सबसे ज्यादा आवश्यकता पड़ती है किंतु उस समय उनके पास वह वस्तु उपलब्ध नहीं होती है।

और ऐसे में इन्हें पछताना पड़ता है। संभवत इसी वजह से द्रौपदी सत्यभामा से कह रही है कि वह सदैव घर पर अन्‍न और अन्‍य जीवन उपयोगी वस्तुएं गुप्त रूप से बचाकर रखती है ताकि मुसीबत पड़ने पर उनको उपयोग किया जा सके।



ज्‍यादा देर घर के बाहर न खड़ा होना 

इसके बाद द्रौपदी कहती है कि मैं कभी भी दरवाजे पर खड़ी नहीं होती। आजकल कई महिलाओं की आदत होती है कि वे अपना ज्यादातर समय खिड़की दरवाजे पर खड़े होकर बिताती हैं।

हालांकि थोड़ी बहुत देर चलता है लेकिन कोई महिला अपना ज्यादातर समय से ही बिताने लगे तो फिर बहुत ही जल्द लोग उनके घर के आगे चक्कर लगाने लगते हैं।

और जब यह बात पति को पता चलती है तो फिर से कलह शुरू हो जाता है फिर चाहे वह स्त्री के निर्दोष क्यों ना हो। कोई उसकी एक बात नहीं सुनता है। अतः दोस्तों द्रौपदी के कथन अनुसार किसी भी स्त्री को इनसे बचना चाहिए।



हर समय पति के आसपास होना

द्रोपदी 11वीं बात बताते हुए कहती है कि मुझे पति के बिना अकेले रहना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। यहां पर दोस्तों द्रोपदी सत्यभामा को यह समझाना चाहती है कि चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों का मन अत्यंत ही चंचल होता है।

ऐसे में यदि पति-पत्नी एक-दूसरे से दूर रहें तो उनके बीच तीसरे शख्स के आने की संभावना बढ़ जाती है जिससे कि पति-पत्नी के रिश्तों में दरार पड़ जाती है। यह जरूरी है कि पत्नी को ज्यादा से ज्यादा समय अपने पति के साथ ही रहना चाहिए।



धर्म का पालन करना

इसके बाद द्रोपदी 12वीं बात बताते हुए कहती है कि मैं हमेशा धर्म का पालन करती हूं और धर्म की शरण में रहती हूं।

जैसा कि दोस्तों आप सभी जानते ही हैं कि हर किसी के घर परिवार या कुटुंब की कुछ परंपराएं होती है जिनका पालन करने पर वह व्यक्ति सुखी रहता है।

वही सुखी रहता है जो अपने बड़े बुजुर्गों के द्वारा दिए गए ज्ञान तथा अपने धर्म का पालन करते हुए अपना जीवन यापन करता है। बस यही बात द्रौपदी सत्यभामा से कह रही है।



तो दोस्तों यह दिव्य 12 महत्वपूर्ण बातें थीं जो द्रौपदी ने सत्यभामा को बताई। आशा करते हैं आपको यह जानकारी जरूर अच्छी लगी होगी। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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