एक ऐसा भयानक युद्ध जिसे सम्राट अशोक जीतकर भी हार गये?

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एक ऐसा भयानक युद्ध जिसे सम्राट अशोक जीतकर भी हार गये?

इतिहास में एक ऐसा कौन सा भयानक युद्ध था जिसे सम्राट अशोक जीतकर भी हार गये?

सम्राट अशोक


वैसे तो इतिहास मे सम्राट अशोक Samrat Ashoka का नाम अमरता के साथ दर्ज है। पर क्‍या आप जानते हैं कि सम्राट अशोक ने एक ऐसा युद्ध भी लड़ा था जिसे वे जीतकर भी हार गये। जी हां वह युद्ध था कलिंग का युद्ध।

वर्तमान में जिस राज्‍य को उड़ीसा के नाम से जाना जाता है वह कभी कलिंग नाम से प्रसिद्ध था। यह बहुत ही बड़ा और संपन्‍न राज्य हुआ करता था।

इतिहासकारों के अनुसार कलिंग राज्‍य को तो सम्राट अशोक Samrat Ashoka के पिता बिंदुसार Bindusar और दादा चंद्रगुप्त मौर्य ChandraGupta Maurya भी नहीं जीत सके थे। पर सवाल ये उठता है कि कलिंग का राज्य इतना महत्वपूर्ण क्यों था? Why was Kalinga so important?

वह इसलिये क्योंकि कलिंग राज्‍य एक कोस्टल लाइन थी। कोस्‍टल लाइन्‍स हमेशा से ही व्यापार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण जगह हुआ करती थी।

अशोक ने अपनी खुद की जलसेना या नेवी बना रखी थी। इसके अलावा सम्राट अशोक ने गुजरात के बलूच स्‍थान पर हर जगह अपने बंदरगाह यानि कि पोर्ट्स बना दिए थे।



 

ऐसे में अशोक Samrat Ashoka का केवल एक ही उद्देश्‍य था और वह था बिना रोक-टोक के व्यापार करना। व्यापार के हिसाब से कलिंग सबसे उत्तम जगह थी इसलिए उसको जीतना बहुत जरूरी था।

लेकिन कलिंग भी एक संपन्‍न राज्य था जो कि इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था। कलिंग आर्थिक रूप से और कला के रूप अपने आप में एक पूर्ण संपन्न राज्य था।

इसीलिये अशोक ने सोचा कि अब समय आ गया है कि कलिंग पर भयंकर तरीके से वार किया जाए और इस राज्‍य को मौर्य साम्राज्‍य का हिस्‍सा बना लिया जाये। उसने यही तय किया और योजना बनाना शुरू कीं। वह हमेशा से यही चाहता था कि इस राज्य को पूरी तरह से जीत लिया जाए।

261 बीसी में अशोक Samrat Ashoka ने कलिंग पर आक्रमण कर दिया और युद्ध शुरू हो गया। कलिंग की सेना और इधर से अशोक की सेना दोनों बहुत बड़ी थीं।

मुकाबला टक्‍कर का हो रहा था और दोनों ही पक्ष हार मानने को तैयार ही नहीं हो रहे थे। परंतु जो देखने और सोचने लायक बात थी वह यह कि इस युद्ध में जनहानि बहुत ज्यादा हो रही थी।



लोग मारे जा रहे थे। इतिहासकार कहते हैं कि एक लाख से ज्यादा सिपाही और डेढ़ लाख नागरिक इस युद्ध में मारे गए थे।

युद्ध इतना भीषण हुआ था कि युद्ध का पूरा मैदान ऐसा हो गया था कि हर जगह खून और मांस ही दिखता था। खून और मांस से पूरी की पूरी जमीन कीचड़ में सन गई थी। जरा कल्‍पना कीजिये कि वह बारिश का कीचड़ नहीं था बल्कि खून और मांस का कीचड़ था।

यह बहुत ही खतरनाक नजारा था और जब अशोक ने इस दृश्‍य को अपनी आंखों से देखा तो वह पूरी तरह हिल गया। इससे वह अंदर ही अंदर टूटने लगा।

इधर जब भी सम्राट अशोक का सेनापति खबर लेकर आता था कि हम जीत रहे हैं तो अशोक खुश नहीं होता था बल्कि वह अंदर ही अंदर टूटते जा रहे था।

अब अशोक को सच में समझ नहीं आ रहा था कि यह सब वह क्‍यों कर रहा है? इस युद्ध के क्‍या माइने हैं। वह सोचने लगा कि आखिर युद्ध को कैसे रोके।

कुद समय पश्‍चात कलिंग को जीत लिया गया। पर जब वह वापस आया तो वह एक अलग ही अशोक था जो मनुष्यता की बात करता था। युद्ध ना करने की बात करता था। आखिर में उसने बुद्ध धर्म को अपना लिया था।

और इसी कलिंग के युद्ध को वह युद्ध कहा जाता है कि जिसे सम्राट अशोक जीतने के बाद भी हार गये।



 

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