ऐसी किसी स्त्री से भूलकर भी विवाह मत करना!!!

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ऐसी किसी स्त्री से भूलकर भी विवाह मत करना!!!

इन पांचों में से किसी स्त्री से भुलकर भी विवाह मत करना ।। विष्णु पुराण के अनुसार

स्त्री से विवाह
स्त्री से विवाह

मित्रों हमारे हिंदू धर्म में विवाह को 16 संस्कारों में से एक अति महत्वपूर्ण संस्कार माना है और इस संस्कार का पालन कर मनुष्य के लिए अनिवार्य है। किंतु वर्तमान में हम लोग देखते हैं कि ज्यादातर लोगों का वैवाहिक जीवन बहुत ही कष्टकारी होता है।

वैसे कई बार इसमें गलती पति की तो कई बार पत्नी की होती है। किंतु आज हम आपको विष्णु पुराण के अनुसार स्त्रियों के पांच ऐसे गुण दोष बताएंगे जिन्हें जानकर आपको यह पता चल जाएगा कि आपको ऐसे आचरण वाली कन्या से भूलकर भी विवाह नहीं करना चाहिए।

यदि फिर भी कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो निश्चित ही उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। तो आइए एक बार विस्तार से प्रकाश डालते हैं कि वे पांच महत्वपूर्ण बिंदु कौन-कौन से हैं।



(1). कटु वचन बोलने वाली

मित्रों कहा जाता है मां सरस्वती मनुष्य के कंठ में निवास करती है इसीलिए वाणी का बहुत ही अधिक महत्व है। जो स्त्री मधुर वाणी वाली होती है उससे मां सरस्वती सदैव ही प्रसन्न रहती है।

किंतु जो स्त्री बुरे अथवा कटु वचन बोलती है वह न केवल मां सरस्वती का अपमान करती है अपितु ऐसी स्त्री पारिवारिक क्लेश का कारण भी बनती है। जिससे कि घर परिवार में जो अशांति का वातावरण निर्मित होता है।

वह परिवार के अन्य सभी सदस्यों के लिए बहुत ही नकारात्मक होता है। इसीलिए मित्रों विष्णु पुराण में बताया गया है कि किसी भी व्यक्ति को स्त्री से विवाह करने से बचना चाहिए जो कटु भाषी हो।



(2). देर तक सोने वाली

मित्रों हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक मनुष्य को ब्रह्म मुहूर्त में जागना अति आवश्यक है। किंतु वर्तमान में बहुत से लोग अपनी आधुनिक जीवन शैली के कारण इस नियम का पालन नहीं कर पाते हैं और देर तक सोते रहते हैं।

किंतु फिर भी के लिए यह जरूरी है कि वह अपने पति तथा परिवार के अन्य सदस्यों के उठने से पहले उठे और अपने नित्य कर्मों से निवृत्त होकर घर की साफ सफाई कर परिवार के सदस्यों के लिए भोजन आदि अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध करें।

किंतु इसके ठीक विपरीत जो महिलाएं देर तक सोती है और पति के जागने के बाद भी बिस्तर का त्याग नहीं करती है ऐसी महिलाएं किसी भी मूल्य पर अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकती है।

जिससे कि उनके घर में कभी भी मा लक्ष्‍मी का आगमन नहीं होता है। अपितु कई बार तो ऐसी आलसी स्त्रियों से होकर मां लक्ष्मी इन घरों का त्याग कर देती है और घर परिवार में गरीबी का दौरा जाता है।

तो मित्रों किसी भी पुरुष को चाहिए कि उसे ऐसी आलसी स्त्री से विवाह करने से बचना चाहिए जो देर तक सोती है।



(3). कई पुरूष मित्रों वाली

मित्रों विवाह के पहले जिस प्रकार से किसी भी पुरुष की कई महिलाओं से मित्रता होती है ठीक उसी प्रकार से महिलाओं की भी कई पुरुष मित्रों से मित्रता होती है।

किंतु विष्णु पुराण में बताया गया है कि जिस किसी स्त्री का विशिष्ट चरित्र वाले पुरुषों से मिलजुल हो अथवा वह मन ही मन उन्हें पसंद करती हो और उनकी संगति से आनंद रहती हो तो पुरुष को ऐसी स्त्री से विवाह करने से बचना चाहिए।

क्योंकि विष्णु पुराण के अनुसार स्त्री के चरित्र में भी जोश आ जाता है और उसका स्वभाव उसके चरित्र वाले पुरुष मित्रों जैसा हो जाता है। फिर वह अपने पति की तुलना उन पुरुषों से करने लगती है। बस यही बात विवाद को जन्म देती है।



(4). समान गोत्र वाली

मित्रों वर्तमान में कई गैर हिंदू लोग आपकी रिश्तेदारी एक ही गोत्र में विवाह कर लेते हैं। किंतु हमारे हिंदू धर्म में ऐसे विवाह की सख्त मनाही है।

वैसे आज भी यदि कोई हिंदू अपनी पुत्री का विवाह करता है तो वह पहले इस बात की पुष्टि कर लेता है कि कन्या के पिता अथवा माता का गोत्र कहीं वर के गोत्र उसकी माता के गोत्र से समानता तो नहीं रखता है।

और यदि इन चारों गोत्र में से किसी भी एक गोत्र में समानता पाई जाती है तो फिर यह रिश्ता वही पर अमान्य हो जाता है। वैसे इसके पीछे मान्यता यह है कि इससे स्वास्थ्य भी खराब होता है।

वैसे इस बात की पुष्टि आधुनिक विज्ञान भी कर चुका है। इसीलिए मित्रों हमारे पुराणों का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें बताई गई बातें आधुनिक विज्ञान से कई गुना आगे हैं और हम मनुष्यों के लिए बहुत ही लाभकारी है।



(5). मांगलिक दोष वाली

तो मित्रों उपरोक्त बताई गई इन सभी बातों के अलावा भी यदि कोई व्यक्ति अपने लिए योग्य वधु की तलाश कर रहा है तो उसे विवाह के पहले एक बार वधू की कुंडली का मिलान अवश्य ही कर लेना चाहिए।

क्योंकि कई बार कन्या की कुंडली में मांगलिक दोष होता है। ऐसे में यह बहुत ही जरूरी है कि विवाह करने से पहले मंगल दोष निवारण हेतु उपाय करवा लेना चाहिए अन्यथा विवाह के एक-दो वर्ष के पश्चात ही दांपत्य जीवन में कलह उत्पन्न हो जाती है।

और कई बार तो यह दोष इतना अधिक प्रबल होता है कि यह दुर्घटना का कारण भी बनता है। मित्रो यह वे दोष हैं जिन्हें विष्णु पुराण के अनुसार किसी भी स्त्री में नहीं होना चाहिए।

किंतु फिर भी यदि किसी स्त्री में ऐसी आदत है तो समय रहते उन्हें आदत सुधार लेना चाहिए अन्यथा परिणाम गंभीर हो सकते हैं।



वैसे हो सकता है आशा में आपके पति में भी कई बुराइयां हो और उसकी भी कई आदतें खराब हो। किंतु फिर भी इसका अर्थ यह नहीं है कि उसमें बुरी आदत है तो आपकी इन आदतों को उचित माना जाए। क्योंकि यदि दोनों में ही समानता हो जाए तो फिर सुधार की आशा करना ही व्यर्थ हो जाएगा।

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