11 Types of Women जानकर चौंक जाओगे!!! || स्त्रियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी और तथ्‍य!! स्त्रियों के प्रकार

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11 Types of Women || स्त्रियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी और तथ्‍य!! स्त्रियों के प्रकार

11 Types of Women || स्त्रियों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी और तथ्‍य!! जानिये 11 प्रकार की स्त्रियों के बारे में 

Types of Women
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मित्रों हमारे वैदिक ऋषि मुनियों ने अपने आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर स्त्रियों की शारीरिक बनावट, चाल ढाल, और रूप रंग के आधार पर उनके चरित्र और भाग्य के संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्रदान की है।

जिन्हें जानकर आप पता लगा सकते हैं कि कौन सी स्त्री भविष्य में कैसा आचरण करेगी। वैसे इसी क्रम में आज हम आपको समुद्र शास्त्र में उल्लेखित 11 स्त्रियों के संदर्भ में ऐसी जानकारी प्रदान करेंगे जिसे जानकर आप निश्चित ही चौक जाएंगे।

तो आइए एक बार विस्तार से प्रकाश डालते हैं स्त्रियों के संदर्भ में कहे गए उन 11 बिंदुओं पर।


स्त्रियों के प्रकार || Types of Women


चित्रिणी स्‍त्री

यह स्त्रियां सोचने समझने की शौकीन होती है। यह थोड़ी कम परिश्रमी परंतु बहुत ही बुद्धिमान होती है। या अपने हर कार्य शीघ्रता से संपन्न करने में समर्थ होती है।

इनकी संगीत, गृह सज्जा और चित्रकला इत्यादि में विशेष रुचि रहती है। यह धर्म, व्रत, कथा, साधु संतों की सेवा करने वाली होती है। इनका मस्तक गोल, आंखें चंचल और शारीरिक अंग कोमल होने की वजह से यह बड़ी ही आकर्षक लगती है।

भले ही इनका जन्म गरीब परिवार में हुआ हो परंतु इनकी कुंडली में राजयोग होता है। सामान्यतः यह स्त्रियां स्वभाव से पतिव्रता और स्वजनों से स्नेह करने वाली तथा विषय भोग की बहुत ही कम शौकीन होती है।



पद्मिनी

ये देवता, गंधर्व और मनुष्य इत्यादि सभी का मन मोह लेने में सक्षम होती है। या अपने से बड़े पुरुष को पिता, समान उम्र वाले को भ्राता और छोटों को पुत्र समान स्नेह आश्रितों का पालन करने वाली होती है।

यह स्त्रियां अक्‍सर लाल रंग के वस्त्र धारण करना पसंद करती हैं। इनकी लंबी कोमल बाल बड़ी आंखें और शंख के समान गर्दन होती है। साथ ही इनके शरीर से कमल की सुगंध आती है जिसकी वजह से यह बड़ी ही आकर्षक लगती है।

यह भाग्यशाली होती है साथ ही योग्य संतान उत्पन्न करने में सक्षम तथा पतिव्रता में श्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रों में बताया गया है इस जाति की स्त्रियां बहुत कम होती है। अतः जिस किसी भी पुरुष का विवाह होता है उसे भाग्यशाली समझा जाता है।



हस्तिनी

इस जाति की स्त्रियां स्वभाव से मनमौजी होती है परंतु इन्हें क्रोध बहुत आता है और कभी-कभी यह बहुत ही क्रूर हो जाती है। सामान्यतः यह थोड़ी सी कम धार्मिक होती है और यह धार्मिक कार्यों में कम ही भाग लेती है।

इनकी विशेष रूचि भोजन में होती है। तरह तरह के व्यंजनों को चखने की शौकीन होती है। इनका रंग गोरा, शरीर थोड़ा मोटा और उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी होती है।

इनके कई रिश्‍ते खंडित हो जाते हैं। अपने झगड़ालू स्वभाव के कारण यह परिवार में क्लेश का कारण बनती है। सामान्यतः इनके पति इनसे दुखी रहते हैं।

और अपने स्वभाव के कारण परिवार में इनकी परवाह कम ही होती है। विवाह के चौथे, आठवें, बारहवें अथवा 16 वर्ष में इनके पति का भाग्योदय होता है।



शंखिनी

इस स्वभाव की स्त्रियां स्वभाव से चुगल खोर अर्थात इधर की बात उधर करने वाली होती है। क्योंकि यह अधिक बोलती हैं इसीलिए लोग इनके सामने बहुत ही कम बोल पाते हैं।

इनमें दया का भाव नहीं होता इसीलिए यह परिवार में रहते हुए भी अलग अलग ही रहती है। आमतौर पर यह अधिक शौकीन होती है। शरीर से यह थोड़ी लंबी, मोटी तो कभी दुबली होती है।

मोटी आंखें और आवाज गंभीर होती है। यह हमेशा प्रसन्न दिखाई देती है और बिना कारण ही है इन्हें अपने पति की बात मानना बिल्कुल पसंद नहीं होता।

यह ज्यादातर अपने पति से रूष्‍ट रहती हैं और संसार में इनकी रूचि अधिक होती है। यह इस प्रकार जीती है कि इनके इनके पिता और पति दोनों को कष्ट होते हैं।


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पुंश्‍चली

यह देखने में थोड़ी मलीन दिखाई पड़ती है। इनमें लज्जा का भाव नहीं होता। साथ ही यह अपने हाव-भाव से कटाक्ष करती रहती है। यह कन्या 12 वर्ष की आयु में ही युवा अवस्था को प्राप्त हो जाती है।

इनकी आंखें बड़ी और हाथ पैर छोटे होते हैं और कभी कभी नाक पर तिल भी पाया जाता है। यदि यह किसी से बात करती है तो ऐसा प्रतीत होता है कि मानव झगड़ा कर रही हो।

इनका मन अपने पति की अपेक्षा पर पुरुषों में अधिक लगता है। यह रमण करने की शौकीन होती है।


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आतुरा

इस तरह की स्त्रियां हमेशा ही हड़बड़ी में रहती है और अपने प्रत्येक कार्य को शीघ्र अति शीघ्र संपन्न करना चाहती है। इसी कारण से कई बार इनके काम बिगड़ जाते हैं।

इन्हें नए नए मित्रों बनाना अच्छा लगता है इसी वजह से इनके कई मित्रों होते हैं। देखने में यह साधारण ही दिखती है परंतु अपने पति से स्नेह करने वाली होती है। सामान्यतः यह धन संचय करने में कमजोर होती है इसी वजह से कई बार ज्यादा खर्च कर बैठती है।



डाकिनी

अपना काम निकालने में अत्यंत ही पारंगत होती है। ऊपरी तौर पर तो यह प्रत्येक मनुष्य को बहुत ही स्नेह और अपनापन दिखाती है लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें चलने की योजना बनाती रहती है।

इनमें धोखा देने की मूल प्रवृत्ति होती है। वैसे देखने में यह सुंदर और मधुर वाणी वाली होती है किंतु इनकी दृष्टि हमेशा ही धन पर रहती है।

और कई बार तो यह धन पाने के लिए अपराध तक कर बैठती हैं। अपने पति को धोखा देने में यह तनिक भी संकोच नहीं करती है और माया रचने में यह पारंगत होती है।



प्रेमिणी

इस श्रेणी की स्त्रियां अत्यंत ही आकर्षक और सौम्य स्वभाव की होती है। इनमें शुद्ध आचरण, परोपकार और प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी होती है।

यह पूरी तरह से अपने पति तथा परिवार के प्रति समर्पित रहती है। इनका शरीर सुंदर, गोरबंद, चंचल नेत्रों ,गुलाबी होंठ ,सुराही के समान गर्दन और लंबे बाल होते हैं।

यह सजने सवरने, अच्छे वस्त्र तथा स्वर्ण आभूषणों की विशेष शौकीन होती है। इनका भाग्य उत्तम होता है और इन्हें भोग विलास के समस्त साधनों की सहज रूप से ही प्राप्ति हो जाती है।



कृपिणी

ऐसी स्त्री आदतों के कारण इन्हें परिवार और समाज में कई बार बदनामी का सामना करना पड़ता है। यह हमेशा ही भोग विलास पाने को लालायित रहती हैं।

यह अपने घर परिवार, संतान और परिवार में कोई विशेष रुचि नहीं लेती है। इसी वजह से कई बार इनका अपने पति से वियोग हो जाता है।

फिर भी यह अपनी चेष्‍टाओं से और पुरुषों को आकर्षित करने में लगी रहती हैं। और कई बार तो यह घर परिवार आदि सब कुछ छोड़कर धनी पुरुषों के साथ हो जाती है।



स्वर्गिणी

स्वर्गिणी स्‍त्री धर्म परायण होती हैा धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यों में यह विशेष रुचि लेती हैं। अपना घर परिवार संतुलित ढंग से संभाल लेती है।

इनका रंग रूप सामान्यत: देखने में आकर्षक लगता है। ना ही इन्हें किसी वस्तु की अधिक लालसा रहती है और ना ही यह कुछ अधिक पाने का प्रयास करती है।

इनके पास जितना भी है यह उसी में संतुष्ट रहती है। साथ ही साथ में धन संचय करने का विशेष गुण होता है। यह अपने पति तथा परिवार से स्नेह करती हैं।

संतान के प्रति इनका विशेष स्नेह रहता है। अपने परोपकारी स्वभाव के कारण यह दुनिया समाज में किसी बड़े पद पर प्रतिष्ठित हो जाती है।



बहुवंशिनी

ये स्त्रियां पूरी तरह से ग्रहस्‍थ आश्रम का पालन करने वाली होती है। यह कभी झूठ नहीं बोलती और पूर्ण रूप से मन की साफ होती है और सच्चे ह्रदय से प्रेम करती हैं।

इनका रंग गेहुआ होता है और यह देखने में सामान्य दिखती है। हालांकि स्वभाव से यह थोड़ी गर्म होती है और छोटी-छोटी बातों से क्रोधित हो जाती है।

किंतु आसानी से मान भी जाती है। दूसरों की बुराई, दोषारोपण, झूठ बोलने वाले मनुष्य इनको बिल्कुल भी पसंद नहीं होते हैं।

ये अपने पति और परिवार को सर्वाधिक महत्व देती हैं इसी वजह से समाज में चारों और उनकी प्रशंसा होती है। उनके भाग्य में कई प्रकार की चल अचल संपत्तियों के योग होते हैं। साथ ही कई बार इन्हें की प्राप्ति भी होती है।



तो मित्रों यह स्त्रियां वो हैं जिनका वर्णन समुद्र शास्त्र में किया गया है। इसके अलावा भी और स्त्रियां होती है। लेकिन यह मुख्‍य होती हैं। इसी के साथ हमारी यह जानकारी भी यहीं समाप्त हुई।

आशा करते हैं कि आपको जरूर अच्छी लगी होगी। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें और अब से आप हमें फेसबुक पर फॉलो करना ना भूलें ताकि चारों और ज्ञान रूपी प्रकाश फैल सके। आप सभी मित्रों का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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