6 Kashtkari Chize – इन 6 कष्‍टकारी चीजों पर कभी निर्भर मत रहना

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6 Kashtkari Chize – इन 6 कष्‍टकारी चीजों पर कभी निर्भर मत रहना

इन 6 Kashtkari Chize पर कभी बहुत निर्भर मत रहना || 6 Kashtkari Chize

6 Kashtkari Chize
6 Kashtkari Chize

इस संसार में हर कोई किसी ना किसी व्यक्ति वस्तु अथवा स्थिति पर निर्भर है और वह सदा ही उन पर आश्रित रहना चाहता है। लेकिन गुरु शुक्राचार्य ने अपनी नीतियों में हम मनुष्यों के लिए छह ऐसी बातें बताई है जो समय आने पर हमारा साथ छोड़ देती है।

इसीलिए हमें उन पर कभी भी आवश्यकता से अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए अन्यथा समय आने पर हमें अत्यंत ही कष्ट उठाना पड़ सकता है।

वैसे आपको बता दें कि गुरु शुक्राचार्य ना केवल असुरों के गुरु थे अपितु वे एक अत्यंत ही चतुर नीतिकार भी थे जिन्होंने शुक्र नीति के नाम से प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी जो इस कलयुग में मनुष्य के जीवन को बेहतर और चरित्र को सशक्त बनाने के लिए रामबाण औषधि है।

तो आइए एक बार विस्तार से प्रकाश डालते हैं कि आखिर वे 6 चीजें कौन सी है जिन पर हमें अभी से अपनी निर्भरता समाप्त करनी होगी।



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यौवन पर अहंकार

बहुत से लोगों को अपने यौवन पर बड़ा अहंकार होता है। एक और पुरुष अपने बाहुबल पर अभिमान करते हैं जबकि दूसरी ओर नारियां अपनी सुंदरता पर इतराती है।

किंतु एक बात दोनों में समान है और वह यह है कि ऐसे लोगों की मंशा यह रहती है कि वह सदैव ही जवान बने रहना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनका सौंदर्य हमेशा कायम रहे लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा संभव नहीं है।

संभवतः इसीलिए गुरु शुक्राचार्य ने कहा है कि बहुत ही जल्द यह आपका साथ छोड़ देगा और आपकी युवावस्था ढलने लगेगी।

तब आपको जवानी के यह दिन बहुत याद आएंगे। इसीलिए कहा गया है कि आपको अपनी जवानी पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना है।



धन का अहंकार

शुक्र नीति में बताया गया है कि लक्ष्मी का स्वभाव बड़ा ही चंचल होता है। वह कभी भी किसी एक स्थान पर स्थाई रूप से नहीं दिखती है। वह आज यहां है तो कल उसका ठिकाना कहीं और होगा।

इसीलिए जो व्यक्ति लक्ष्मी पर आवश्यकता से अधिक निर्भर है और वह यह सोचता है कि वह हर काम ढंग से संपन्न कर लेगा तो वह व्यक्ति निश्चित ही एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहा है।

उसे तुरंत ही इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि यह धन हमेशा उसका साथ नहीं देगा और एक न एक दिन उसे छोड़कर चला जाएगा।

इसीलिए हमें आज से ही सात्विक ढंग से जीवन जीने की आदत डालनी होगी तब ही सही अर्थों में सुख की प्राप्ति हो सकेगी।



दूसरो पर आवश्‍यकता से अधिक भरोसा

मित्रों इस संसार में हर किसी को किसी ना किसी पर भरोसा अवश्य ही होता है फिर चाहे वह हमारे माता-पिता पत्नी पति दोस्त गुरु या कोई और ही क्यों ना हो।

वह व्यक्ति हमारे लिए ईश्वर तुल्य होता है। लेकिन शुक्र नीति में बताया गया है कि मनुष्य की परछाई भी एक समय तक ही साथ देती है फिर वह भी आपका साथ छोड़ कर चली जाती है।

फिर भला ऐसे में किसी मनुष्य की तो बात ही नहीं की जा सकती है। इसीलिए कहते हैं कि हमें किसी पर भी इतना अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए कि उसके बिना हमारा जीवन ही ना चल सके।

इसीलिये तो हमें लगभग आज से ही यह मानकर चलना होगा कि इस संसार में हम अकेले हैं और जो कुछ भी करना है हमें स्वयं को ही करना है। फिर देखिए कैसे आपकी शक्तियों का विस्तार होता है और फिर आप को आत्मनिर्भर होने से कोई नहीं रोक सकेगा।


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सत्‍ता अथवा पद का अहंकार

बहुत से लोग सत्ता में अथवा किसी पद पर आसीन होते हैं। वे अपनी उपलब्धियों से बहुत ही संतुष्ट होते हैं। ऐसे लोग अपने पद अथवा अधिकार को छोड़ना नहीं चाहते हैं।

लेकिन शुक्र नीति के अनुसार ऐसा संभव नहीं है। हर किसी को समय आने पर अथवा कई बार तो समय के पूर्व ही अपना पद छोड़ना पड़ता है।

और जब ऐसी स्थिति आती है तो कुछ लोग इस सत्य को स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं और दुख से इतने भर जाते हैं कि कई बार वह अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर लेते हैं।

इसीलिए कहा गया है कि हम मनुष्यों को कभी भी सत्ता अथवा पद के मद में चूर होकर नहीं अपितु स्वयं को सेवक समझ कर रहना चाहिए।

ऐसा इसलिये ताकि जब किसी कारणवश हमें उस पर को छोड़ना पड़े तो बिना किसी कठिनाई के सहजता से उसका याद किया जा सके।



अपने मन के अनुसार चलना

मनुष्य का मन अत्यंत ही चलाएमान है। यह कभी भी किसी एक बात पर सहमत नहीं होता है अपितु यह लगातार ही हमें भटकाने में लगा रहता है।

इसीलिए हमें कभी भी यह नहीं समझना चाहिए कि आज मन हमारे साथ है और यह हमसे सौ प्रतिशत सहमत हैं। क्योंकि मन की प्रकृति तो बदलने वाली है। हो सकता है कि अभी आपसे सहमत हो और अगले ही पल आपके विरुद्ध हो जाए।

लेकिन एक समय तो ऐसा आएगा जब यह मन आपसे पूरी तरह से अलग ही हो जाएगा। गुरु शुक्राचार्य का कहना है कि हमें कभी भी अपने मन के वशीभूत होकर नहीं अपितु योग और ध्यान के बल पर इसे अपने अधीन रखना है।



जीवन से अत्‍यधिक मोह

इस संसार में जो भी प्राणी जन्म लेकर आया है उसकी मृत्यु निश्चित है। कोई भी मनुष्य चाहे कितनी ही भक्ति कर ले चाहे किसी भी औषधि का सहारा ले ले लेकिन समय आने पर उसकी मृत्यु अवश्य ही होगी।

इसीलिए गुरु शुक्राचार्य का इस संदर्भ में कहना है कि हमें कभी भी अपने जीवन से अत्यधिक मोह नहीं रखना है अपितु हमें प्रतिदिन बस यही मानकर चलना है कि हमारे पास केवल आज का ही दिन है।

हमें जो कुछ भी करना है वह बस आज ही करना है। बस तब ही हम सही अर्थों में जीवन की इस सुप्रीम भेंट को सप्रेम स्वीकार कर सकेंगे।


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तो दोस्तों यह चीजें 6 बातें जो समय आने पर आपका साथ छोड़ देगी। इसीलिए शुक्र नीति में कहा गया है कि इससे पहले कि यह आपका साथ छोड़ कर आपको बेसहारा करें आप स्वयं ही इन सभी पर से अपनी अत्यधिक निर्भरता छोड़ दें ताकि बाद में या आपको तनिक भी कष्ट ना दे सके।

इसी के साथ हमारी यह जानकारी भी यहीं समाप्त हुई। आशा करते हैं आपको यह जरूर अच्छी लगी होगी। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें। आप सभी मित्रों का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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