ऐसे 5 मनुष्यों के यहां भूलकर भी भोजन मत करना || Aise Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna || गरूड़ पुराण के अनुसार

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ऐसे 5 मनुष्यों के यहां भूलकर भी भोजन मत करना || Aise Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna || गरूड़ पुराण के अनुसार

 ऐसे 5 मनुष्यों के यहां भूलकर भी भोजन मत करना || Aise Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna || गरूड़ पुराण के अनुसार

Aise Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna
Aise Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna

दोस्तों एक पुरानी कहावत हैए जैसा खाएंगे अन्‍न वैसा बनेगा मन। अर्थात हम जैसा भोजन करते हैं ठीक वैसे ही हमारी सोच और विचार बनते हैं। इसका सबसे सशक्त उदाहरण महाभारत में देखने को मिलता है।

जब बाणों की शैया पर भीष्म पितामह लेटे थे। तब द्रोपदी उनसे पूछती है कि पितामह! आखिर उस दिन आपने मेरे चीर हरण का विरोध क्यों नहीं किया जबकि आप सबसे बड़े और सशक्त है।

तब पितामह कहते हैं पुत्री, मनुष्य जैसा अन्न खाता है, वैसा ही उसका मन हो जाता है। उस समय मैं अधर्मी लोगों का अन्न खा रहा था। इसीलिए मेरी बुद्धि भी वैसी ही हो गई थी।

इसी क्रम में आज हम आपको गरुड़ पुराण के में बताई गई बातों के आधार पर पांच ऐसे लोगों के संदर्भ में बताएंगे जिनके यहां पर आपको किसी भी दशा में भोजन नहीं करना चाहिए।

अन्यथा आप भी पाप के भागीदार हो जाएंगे। तो आइए एक बार विस्तार से प्रकाश डालते हैं कि आखिर में पांच मनुष्य कौन-कौन से हैं।


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Aise 5 Logo Ke Ghar Bhojan Mat Karna 


चोर के घर भोजन

दोस्तों चोरी करना ना सिर्फ सामाजिक दृष्टि से गलत है अपितु धार्मिक दृष्टिकोण से भी इसे पाप माना गया है। वैसे गरुड़ पुराण इस संदर्भ में हमें विस्तार से जानकारी प्रदान करता है।

यह हमें बताता है कि किस चीज की चोरी करने से मरने के बाद कौन से नर्क में यातनाएं भुगतनी पड़ती है। साथ ही अगले जन्म में कौन से जानवर की योनि मिलती है।

जो व्यक्ति अन्न और  फल की चोरी करता है उसे अग्निकुण्‍ड में भयंकर यातनाएं भोगनी पड़ती है। इतना ही नहीं अपितु उसको अगले जन्म में छछूंदर के रूप में धरती पर आना पड़ता है।



चरित्रहीन स्‍त्री के घर भोजन

जो स्‍त्री धर्म के विरुद्ध आचरण करती है उसे चरित्रहीन कहा जाता है। ऐसी महिलाएं जिन्हें उन सभी कार्यों को करने में आनंद आता है जिसे धर्म अनुचित मानता है।

आमतौर पर ऐसी महिलाएं समाज में तो उपेक्षित होती है अपितु अपने पति, पिता, संतान तथा परिजनों के लिए भी दुख का कारण बनती हैंं। इनके संदर्भ में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया है।

उदाहरणार्थ यदि कोई स्त्री किसी परपुरुष से संबंध बनाती है तो उसे अगले जन्म में छिपकली के रूप में धरती पर आकर अपनी गलती सुधारने पड़ती है।

अतः दोस्तों आप इस बात का ध्यान रखें कि आप कभी भूल से भी चरित्रहीन स्त्री के हाथों से बना हुआ भोजन ना करें अन्यथा आप भी उसके पाप के भागीदार हो जाएंगे।



ब्‍याज पर पैसा देने वाला

दोस्तों आज के युग में कई लोग ऐसे हैं जो ब्याज पर दूसरों को पैसा उधार देते हैं। वैसे देखा जाए तो यह बड़ा ही व्यावहारिक तरीका है।

आपको बिना किसी बड़ी कार्रवाई के धन उधारी पर मिल जाता है और इसकी सहायता से आप अपने धन संबंधी कोई भी कार्य आसानी से संपादित कर सकते हैं।

और जब आपके पास आसानी से धन ही आ जाता है तब आप अतिरिक्त धन उक्त व्यक्ति को लुटा देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए अनुचित रूप से अत्यधिक ब्याज वसूलते हैं।

ऐसे लोगों के संदर्भ में बताया गया है कि जीते जी तो यह लोग कष्ट पाते ही हैं अपितु मरने के बाद इधर नर्क में यातना भोगनी पड़ती है। इतना ही नहीं उनका अगला जन्म उल्लू के रूप में होता है।

दोस्तों यदि आप किसी को जानते हैं तो आप को उसके घर पर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए अन्यथा आप भी उसके पाप के भागीदार हो जाएंगे।



छुआछूत रोगी के घर भोजन

कहते हैं जीवन हमेशा ही परमात्मा की कृपा से मिलता है किंतु मौत स्वयं के द्वारा चुनी जाती । हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने उत्तम जीवन जीने के लिए बहुत ही विस्तृत खोजे की थी।

इन्हीं के आधार पर उन्होंने यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि अर्थात अष्टांग योग के धारणा विकसित की थी जिसके आधार पर मनुष्य अपनी आध्यात्मिक मानसिक सामाजिक बौद्धिक तथा शारीरिक उन्नति कर सकता है।

किंतु सभी लोग इन नियमों का पालन नहीं करते हैं। फल स्वरुप विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं।

अतः मित्रों इस संदर्भ में गरुड़ पुराण कहता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर रोग से पीड़ित है या फिर वह छुआछूत के रोग से ग्रस्त हैं यह बहुत ही जरूरी है कि आप ऐसे व्यक्ति के यहां भोजन ना करें।

क्योंकि हो सकता है कि रोगी के घर के वातावरण में बीमारियों के कीटाणु हो और वह आपके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर दें।



क्रोधी के घर भोजन

मित्रों आपको तो पता ही है कि हम मनुष्यों के लिए क्रोध कितना अधिक हानिकारक है। क्रोध की दशा में हमारी सोचने समझने की शक्ति अर्थात हमारा विवेक नष्ट हो जाता है जिससे कि हमारे समक्ष विभिन्न प्रकार के संकट खड़े हो जाते हैं।

हम बिना बात के ही अपने मित्रों को अपना शत्रु बना बैठते हैं। इसी वजह से धर्म हमें सदैव ही क्रोध से दूर रहने का संदेश देता है।

इतना ही नहीं अपितु गरुड़ पुराण कहता है कि जो लोग हमेशा ही क्रोध में रहते हैं उनके यहां आपको कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए।

फिर भी यदि कोई मनुष्य ऐसा करता है तो बहुत ही जल्द उसका स्वभाव क्रोधी व्यक्ति जैसा हो जाता है।



तो दोस्तों यह पांच मनुष्य जिनके यहां आपको भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। आज के लिए बस इतना ही। ऐसी और भी जानकारी के लिए फेसबुक पर फॉलो करना ना भूलें।

इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें ताकि चारों ओर धर्म रूपी प्रकाश फैल सके। आप सभी दोस्तों का बहुत-बहुत धन्यवाद! 

 

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