Amrapali Ki Kahani जिसकी खूबसूरती अभिशाप बन गयी!!!

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Amrapali Ki Kahani जिसकी खूबसूरती बनी अभिशाप || Amrapali The most beautiful women in the history

Amrapali Ki Kahani जिसकी खूबसूरती बनी अभिशाप बन गयी!!!

Amrapali Ki Kahani
Amrapali Ki Kahani

दोस्‍तों प्राचीन भारत में 500 ईसापूर्व लिच्छवी गणराज्य की राजधानी वैशाली में एक गरीब दंपति को एक लड़की आम के पेड़ के नीचे मिली। वह पता नहीं कौन थी।

उसके माता-पिता क्यों उसे आम के वृक्ष के नीचे छोड़ कर चले गए? वह आम के पेड़ के नीचे मिलने के कारण उसका नाम आम्रपाली रखा गया।

आम्रपाली जब किशोरावस्था में पहुंची तो उसके रूप और सौंदर्य की चर्चा नगर में फैल गई। वह बहुत खूबसूरत थी। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और काया बेहद आकर्षक थी।

जो भी उसे देखता था वह अपनी नजरें उस पर से हटा नहीं पाता था। आम्रपाली जैसे-जैसे बड़ी हुई उसका सौंदर्य चरम पर पहुंचता गया लेकिन उसकी यही खूबसूरती उसका यही आकर्षण उसके लिए श्राप बन गया।



यह आम्रपाली की खूबसूरती का ही कमाल था कि वैशाली का हर पुरुष उसे अपनी दुल्हन बनाने के लिए बेताब रहने लगा। वैशाली एक लोकतांत्रिक राज्य था जिसकी अपनी एक संसद भी थी।

लोगों में आम्रपाली के लिए दीवानगी इस हद तक थी कि वह उसको पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे। राजा से लेकर व्यापारी हर कोई आम्रपाली को पाना चाहता था।

आम्रपाली के लिए शादी के प्रस्तावों के ढेर लग गए। इतने सारे लोगों की इस दीवानगी को देखकर उसके माता-पिता घबरा गए क्योंकि वह जानते थे कि आम्रपाली की शादी किसी एक से कराई गई तो बाकी के लोग उनके दुश्मन बन जाएंगे।

और आम्रपाली को पाने के लिए वैशाली में खून खराबा हो जाएगा। इसी समस्या का हल खोजने के लिए एक दिन वैशाली में सभा आयोजित की गई।

इस सभा में मौजूद सभी पुरुष आम्रपाली से विवाह करना चाहते थे जिससे कोई फैसला करना बेहद मुश्किल हो रहा था। अंत में जो फैसला लिया गया उसकी कल्पना आम्रपाली ने सपने में भी नहीं की होगी।



वैशाली के राज प्रशासन ने नगर में एकता और शांति स्थापित करने के लिए आम्रपाली को नगरवधू यानी वेश्या घोषित कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि सभी जन वैशाली के गणतंत्र को बचा कर रखना चाहते थे।

नगरवधू बनने के बाद हर कोई आम्रपाली को पाने के लिए आजाद था। इस फैसले ने उसे नगर के सभी लोगों के लिए एक वेश्या बना कर रख दिया। आम्रपाली को जनपद कल्याणी की उपाधि 7 साल के लिए दी गई।

इसे साम्राज्य की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली महिला को दिया जाता था। आम्रपाली को अपना महल मिला सेविका मिली और लोगों से शारीरिक संबंध बनाने के लिए चयन का अधिकार भी मिला।

बाद में वैशाली लोकतंत्र के नियमों के अनुसार आम्रपाली दरबारी बन गई। आम्रपाली ने सभी के इस फैसले को अपनी तकदीर का लिखा मान कर स्वीकार कर लिया। उसने सालों तक वैशाली के धनवान लोगों का मनोरंजन किया।

एक आम लड़की की तरह वह भी खुशी-खुशी अपना जीवन जीना चाहती थी लेकिन ऐसा हो नहीं सका। वह अपने दर्द को कभी बयां नहीं कर पाए और अंत में वही हुआ जो उसकी नियति ने उससे करवाया।



कहानी यहीं खत्म नहीं होती, कहा जाता है कि मगध के राजा बिंबिसार आम्रपाली पर मोहित हो गए थे और मगध राज्य के वैशाली के साथ हमेशा ही शत्रुतापूर्ण रिश्ते रहे।

ऐसे में आम्रपाली से मिलने जाने के लिए उन्हें दूसरा भेष धारण करना पड़ा ताकि कोई उन्हें पहचान नहीं सके। मगध सम्राट बिंबिसार ने आम्रपाली को पाने के लिए वैशाली पर जब आक्रमण किया तब संयोगवश उस की पहली मुलाकात आम्रपाली से ही हुई।

आम्रपाली के सौंदर्य पर मुग्ध होकर बिंबिसार पहली ही नजर में अपना दिल दे बैठा। जब वह आम्रपाली से मिला तो दोनों एक दूसरे के प्रेम में गिर गए।

आम्रपाली ने नरसंहार रोकने के लिए कहा और बिंबिसार ने आम्रपाली की बात मान ली। बिंंबसार ने आम्रपाली को मगध की महारानी बनने का प्रस्ताव भी दिया लेकिन आम्रपाली ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वैशाली और मगध शत्रु थे।

कहते हैं कि बिंबिसार का पुत्र अजातशत्रु भी आम्रपाली पर मोहित हो गया था। मगध और आसपास के राज्यों के मालिक अजातशत्रु ने एक बार अपने भाइयों के साथ विवाद के कारण वैशाली में जा छिपा और वहां वैशाली में आम्रपाली को उस पर दया आ गई।



उसे अपनी ही भूमिका एक सैनिक समझ लिया और उसके ठीक होने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह अंततः करीब आ गए और धीरे-धीरे उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया।

वैशाली के लोगों को जब अजातशत्रु पर संदेह होने लगा तब उन्होंने उसकी वास्तविक पहचान की खोज की। जब वैशाली के लोगों को पता चला कि अजातशत्रु कौन है तो उन्होंने आम्रपाली को दुश्मन की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया।

अजातशत्रु वहां से भागने में तो सफल रहा लेकिन आम्रपाली की कैद की बात सुनकर अजातशत्रु इतना क्रोधित हो गया कि उसने वैशाली शहर पर हमला कर दिया।

कई लोगों की जानें चली गईंं। अजातशत्रु ने पूरे शहर को ध्वस्त कर दिया और उसमें आग लगा दी। यह सब देखकर आम्रपाली काफी घायल, भयभीत और दुखी महसूस करने लगी।

वह अपने राज्य से बहुत प्यार करती थी। उसकी कीमत पर वह अपने प्रेम को नहीं पाना चाहती थी। आखिरकार उन्होंने अजातशत्रु के प्यार को ठुकरा दिया।



जीवन के इस मोड़ पर उसने बौद्ध धर्म अपनाने की अपनी तीव्र इच्छा की पहचान की। आम्रपाली ने बौद्ध भिक्षु को ना केवल खाने पर आमंत्रित किया बल्कि 4 महीने के प्रवास के लिए भी अनुरोध किया।

4 महीने बाद आम्रपाली बौद्ध भिक्षु के साथ गौतम बुद्ध से मिलने गई और बुध के चरणों में गिर गई। आम्रपाली ने गौतमबुद्ध से कहा कि वह बौद्ध भिक्षु को मोहित नहीं कर पाई और 4 महीने बौद्ध भिक्षु के साथ बिताने पर उसे महसूस हुआ कि जीवन क्या है।

फिर एक वेश्या के रूप में उसने अपना जीवन छोड़ दिया और बहुत ही साधारण बौद्ध जीवन शैली को स्वीकार कर लिया।

तो दोस्तों आज के लिए बस इतना ही आपको यह Amrapali Ki Kahani कैसी लगी हमें कमेंट करके बताएं और भी ऐसे ही रहस्यमई कहानियां जानने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद!



 

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