Amritsar Cave Mystery || अमृतसर गुफा का रहस्‍य || Amritsar Gufa Ka Rahasya

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Amritsar Cave Mystery || अमृतसर गुफा का रहस्‍य || Amritsar Gufa Ka Rahasya

Amritsar Cave Mystery || आखिर क्‍या है अमृतसर गुफा का अनजाना और अनसुलझा रहस्‍य जो कि वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पा रहे!! || Amritsar Gufa Ka Rahasya

Amritsar Cave Mystery
Amritsar Gufa Ka Rahasya Amritsar Cave Mystery

तो दोस्‍तों बात है यह बात तब की है जब अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर परिसर में खुदाई का काम चल रहा था। अचानक खुदाई कर रहे लोगों को मंदिर के नीचे कुछ अजीब सी चीज दिखाई दिए।

उन्हें ऐसा लगा कि नीचे कुछ तो अजीब सा है। बाद में और खुदाई करने के बाद उन्हें एक सुरंग दिखाई दिए। इस सुरंग को देखते ही वहां खड़े सभी लोगों के होश उड़ गए क्योंकि यह सुरंग काफी पुरानी थी और बहुत गहरी दिखाई दे रही थी।



वहां उपस्थित सभी लोगों ने कभी यह नहीं सोचा था कि अमृतसर मंदिर के नीचे एक सुरंग भी निकलेगी। बाद में जब इसके बारे में और पता लगाया गया और जो बात सामने निकल कर आई उसे सुनकर आप सभी दांतो तले उंगली दबा लेंगे।

दोस्‍तों, रोज भक्तों का लाखों की संख्या में यहां पर जामवड़ा होता है। दुनिया भर के लोग यहां पर दर्शन करने आते हैं। तो अब बात कर लेते हैं इस राज के बारे में।

दोस्‍तों, अमृतसर का स्वर्ण मंदिर भारत की सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जहां रोज भक्तों का लाखों की संख्या में हुजूम उमड़ता है। दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक इस महान निर्माण के दर्शन कर तृप्त होने आते हैं।

सिख धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल होने की वजह से इस मंदिर में अमृतसर को उसके उत्कृष्ट भव्‍यता के साथ और प्रसिद्ध बना दिया। स्वर्ण मंदिर को श्री दरबार साहिब और श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है।



स्वर्ण मंदिर को धार्मिक एकता का स्वरूप माना जाता है। एकत्रित होने के बावजूद हरमंदिर साहिब जी यानी स्वर्ण मंदिर की नींव सूफी संत मियां मीर जी द्वारा रखी गई थी।

लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ यह गुरुद्वारा भक्तों के साथ साथ पाठकों को भी अपने असीम कृपा से बार-बार अपनी और आकर्षित करता है। स्वर्ण मंदिर के बाहर के महाराजा रंजीत सिंह द्वारा गया था।

इससे पहले मंदिर को दरबार साहिब कहा जाता था। और इस मंदिर का नाम मंदिर के बाहरी परत पर चढ़े हुए सोने की चादर की वजह से पड़ा जो इस मंदिर के बनने के 200 सालों बाद महाराजा रंजीत सिंह द्वारा इसमें जोड़ा गया था।

इससे पहले मंदिर को दरबार साहिब हरमंदिर साहिब के नाम से जाना जाता था। अमृत सरोवर जो कि मंदिर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है ऐसा माना जाता है कि इस सरोवर में औषधीय गुण है। Amritsar Cave Mystery


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जो भी इस मंदिर के दर्शन करने आता है पहले इसी सरोवर में अपने हाथ पैर धोकर मंदिर के अंदर प्रवेश करता है। कई भक्तगण अपनी श्रद्धा के अनुसार डुबकी लगाते हैं।

मंदिर के चार प्रवेश द्वार है जो चारों दिशाओं पूर्व पश्चिम उत्तर और दक्षिण की तरफ है। यह प्रवेश द्वार यह सूचित करते हैं कि यह मंदिर दुनिया के हर भाग से भक्तों का बिना किसी रूकावट के पूरे दिल से स्वागत करता है।

यहां किसी भी धर्म के किसी भी जाति के और किसी भी संप्रदाय के लोगों को और भक्तों को आने की अनुमति है।

स्वर्ण मंदिर हर रोज दुनिया की सबसे बड़ी लंगर सेवा का आयोजन करता है जहां रोज लगभग लाखों की संख्या में भक्तों को खाना खिलाया जाता है।

प्रवेश करने के लिए सीढि़यां नीचे की ओर जाती है जबकि अन्य मंदिरों में शिव मंदिर के प्रमुख परिसर में ऊपर की ओर ले जाती है। इस मंदिर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जो इसकी भव्‍यता को अच्‍छे तरीके से दर्शाता है।



अमृतसर का स्वर्ण मंदिर अपनी खूबियों के साथ साथ ऐसे कई रहस्य को अपने अंदर समेटे हुए है जिसे सुनकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे। यह बात है 2021 की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की।

जोड़ा घर यानी मंदिर में भक्तों के लिए जूता रखने की जगह और गठरी सर यानी कि क्लॉकहाउस को एंट्री गेट पर विकसित करने का काम शुरू किया था।

इस क्रम में लोगों ने इस मंदिर परिसर में खुदाई का काम शुरू किया। खुदाई करते करते अचानक लोगों को नीचे एक चीज दिखाई थी।

पहले तो उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन फिर बाद में और खुदाई करने के बाद पता चला कि यह तो एक सुरंग है जो नीचे की तरफ जा रही है। यह नजारा देखकर लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ।

इस बात की सूचना तुरंत ही मंदिर कमेटी को दी गई। अधिकारी आए और उनका अच्छी तरीके से निरीक्षण किया। बाद में काम को आगे बढ़ाने और खुदाई करने के आदेश दिए गए।



परंतु कुछ लोग ऐसे भी थे जो यह चाहते थे कि इन सुरंगों की पुरातत्विक जांच की जाए ताकि इन सुरंगों के बारे में अच्छे से पता चल सके कि आखिर ये किस जमाने की है और यहां इसे क्यों बनाया गया था?

लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस बात पर राजी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि इसका कोई भी महत्व नहीं है इसीलिए इन सुरंगों को से भर दिया जाए।

लेकिन बहुत बात करने के बाद यह मामला उच्च अधिकारी के पास पहुंचा और यह तय किया गया कि इसकी जांच होनी चाहिए क्योंकि इसका एक महत्व बाहर निकल कर आया तो इस पर और भी शूट किया जाएगा।

दोस्तों ऐसा तो हो नहीं सकता कि कोई भी प्राचीन धरोहर हो और उसके नीचे कोई भी गहरा या प्राचीन अवशेषों का महत्व है।

इन मंदिरों के नीचे बहुत ही मजबूती से जुड़े कई रहस्‍य दफन हैं और यही कारण है कि चाहे वह काशी विश्वनाथ हो राम जन्मभूमि कृष्ण जन्मभूमि महाकालेश्वर मंदिर, इन सभी के नीचे आज भी कई राज दफन हैं जो कि समय आने पर ही खुल सकेंगे।



 

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