Dropadi Mahabharat से जुड़े 34 अनोखे तथ्‍य || Mahabharat Ki Draupadi

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Dropadi Mahabharat से जुड़े 34 अनोखे तथ्‍य || Draupadi in Mahabharat के अनसुने तथ्‍य || Mahabharat Ki Draupadi

 

महाभारत का जब कभी भी हमारे सामने जिक्र होता है तो एक नाम हम कभी नहीं भूलते हैं और वह नाम है द्रौपदी Dropadi Mahabharat का। आइये जानते है उन अनोखे तथ्‍यों के  बारे में जो शायद आपको न पता हों।

 

Dropadi Mahabharat
Draupadi In Mahabharat Star Plus

महाभारत का जब कभी भी हमारे सामने जिक्र होता है तो एक नाम हम कभी नहीं भूलते हैं और वह नाम है द्रौपदी का। आइये जानते है उन अनोखे तथ्‍यों के  बारे में जो शायद आपको न पता हों।

(1). द्रौपदी एक बहुत ही बुद्धिमान स्‍त्री थी। ऐसा इसिलिए क्‍योंकि वह पांडवों के खजाने और खर्च की मुख्‍य प्रभारी थी। यदि संक्षेप में द्रोपदी के बारे में कहा जाये तो वह पांडवों की वास्‍तविक वित्त मंत्री थी ।

(2). द्रौपदी के अंदर सेवाभाव तो कूट-कूट कर भरा हुआ था। वह रोजाना सुबह से शाम तक हजारों गरीबों और विकलांगों की सेवा करती थी। इस संबंध मे तो उनका चिर विरोधी दुर्योधन भी उसकी प्रशंसा किया करता था ।

(3). द्रौपदी, देवी सत्यभामा की सबसे अच्छी मित्र थीं। सत्‍यभामा, भगवान कृष्ण की पत्नी थीं। द्रौपदी, कृष्ण, अर्जुन और सत्यभामा एक अलग ही स्‍थान पर स्थित कमरे में हंसी मजाक करके आनंद लिया करते थे। और तो और उस कक्ष मे बहुत कम लोगों को ही प्रवेश करने की अनुमति मिलती थी।



(4). ऐसा भी वर्णन है कि द्रोपदी Mahabharata Draupadi ने दुशासन के खून से अपने बाल धोने की शपथ ली थी। ऐसा इसलिये क्‍योकि दुशासन ने दुर्योधन के कहने पर ही पांचाली द्रोपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया किंतु भगवान श्रीकृष्‍ण के प्रभाव से यह न हो सका।

(5). इससे जुड़ा हुआ ही एक और तथ्‍य यह है कि द्रोपदी ने अपने बालों को 13 वर्षों तक बिल्‍कुल भी नहीं बांधा।

(6). जब बाणों की शर शय्या पर भीम लेटे हुए थे तो उनके उपदेश सुनकर द्रोपदी को हंसी आ गयी लेकिन जब भीष्‍म ने उनसे हंसने का कारण पूछा तो उन्‍होंने कहा कि पितामह यह ज्ञान तब कहां चला गया था जब भरी सभा में मेरा चीर हरण हो रहा था।  तब भीष्म ने कहा कि उस समय पाप के अन्‍न के कारण अशुद्ध रक्‍त बह रहा था शरीर मे लकिन अब अर्जुन के बाणो द्वारा वह निकल गया और ज्ञान होने लगा।

(7). द्रौपदी ने कुत्तों को श्राप दे दिया था क्‍योकि अपने पति से संबंध बनाते समय एक कुतिया ने उन्‍हें देख लिया था।



(8). अर्जुन ने एक बार द्रौपदी Mahabharat Panchali के कक्ष में प्रवेश किसी अपने हथियार लेने के लिए किया था क्योंकि एक ब्राह्मण ने उसे अपनी गायों को लूटने से बचाने का आग्रह किया था।

(9). द्रौपदी अपनी सास कुंती को अत्‍यधिक प्रिय थी। देवी कुंती ने भी स्वयं श्रीकृष्ण को यह बताया था कि वह द्रौपदी को अपने पुत्रों से बहुत अधिक प्यार करती हैं।

(10). द्रोपदी के बारे में कुंती को जब भी द्रौपदी के “द्युत सभा ” (पासा-खेल प्रकरण) में अपमान की याद आती थी, तो वह अपने पुत्रों के लिए अपना सारा स्नेह खो देती हैं। द्रौपदी भी अपनी सास कुंती की हरसंभव मदद और निस्‍वार्थ भाव से सेवा करती थी।

(11). वैसे तो द्रौपदी सबसे अधिक अर्जुन से प्रेम करती थीं पर वास्‍तविकता में देखा जाये तो वह धर्मराज युधिष्ठिर ही थे, जिसे द्रोपदी ने अपनी सबसे अधिक सेवा दी थी।


Dropadi Mahabharat
Draupadi in Mahabharat Serial || Pooja Sharma Mahabharat

(12). द्रोपदी Mahabharat Draupadi Name पांडवों की “पटरानी” (मुख्य रानी) थीं। अत: इसी नाते, उन्हें राजा को अपने राज्य को प्रभावी ढंग से चलाने में मदद करने के लिए कर्तव्य सौंपा गया था।

(13). यह भी सत्‍य है कि द्रौपदी एक बहुत दयालु और रहमदिल महिला थी। जयद्रथ को उसके प्रति गलत इरादे के बाद भी उसने माफ कर दिया।

(14). जब अश्‍वत्‍थामा ने पांडवों के सभी पुत्रों का वध कर दिया था तो यह द्रोपदी ही थीं जिसने पांडवों को अश्वथामा को क्षमा करने का आग्रह किय। उनके पांच बेटे और भाई उसके द्वारा गलत तरीके से मारे गए थे।

(15). जब महाभारत का युद्ध समाप्‍त हुआ तो युद्ध के पश्‍चात, उन्होंने सावधानीपूर्वक और धार्मिक रूप से धृतराष्ट्र और देवी गांधारी की सेवा की।

(16). द्रौपदी Dropadi Mahabharat को अहिल्या, तारा, कुंती और मंदोदरी के साथ ही एक श्रेणी मे रखा जाता है। वे “सनातन धर्म” में पांच “पंचकन्याओं” (पांच कुंवारी) में से एक मानी जाती है। ऐसा इसलिये क्योंकि उनके एक से अधिक लोगों के साथ संबंध होने के बावजूद, वे अपने हृदय से शुद्ध और पवित्र थी।


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(17). द्रौपदी को स्वर्ग-लक्ष्मी (स्वर्ग में निवास करने वाली देवी लक्ष्मी) का अवतार माना जाता है। कुछ पुराणों के अनुसार, उनका जन्म देवी पार्वती / काली के अंश के रूप में हुआ था।

(18). कभी-कभी, उन्हें नल और दमयंती की बेटी नलयानी का अवतार माना जाता है। कुछ मतों में, वह चार देवी देवताओं का मिश्रण थीं: देवी श्यामला (धर्म की पत्नी), देवी भारती (वायु की पत्नी), देवी साची (इंद्र की पत्नी) और देवी उषा (जुड़वां-आश्विनियों की पत्नी) और इसलिए, उन्होंने उनके सांसारिक समकक्ष पाँच पांडवों से विवाह किया ।

(19). द्रौपदी Draupadi In Mahabharata को अभिमन्यु से सबसे अधिक प्रेम और खास लगाव था। जब पांडव युद्ध के कारण बाहर थे तो उसने कृष्ण से कहा कि अगर पांडव कौरवों के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उनके पांच बेटे अभिमन्यु के नेतृत्व में युद्ध में लड़ेंगे।



(20). द्रौपदी की हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच भी सेवा करते थे। वे दोनों एक-दूसरे के प्रति बहुत स्‍नेह रखते थे। कहते हैं कि एक बार घटोत्कच ने द्रौपदी की तब सहायता की थी जब वह पहाड़ों पर जाने के लिए पूरी तरह से थक गई थी। वह अपनी माँ (द्रौपदी) के अपमान के लिए कौरव सेना को ख़त्म करने के लिए तैयार था।

(21). निर्वासन के दौरान, जब द्रौपदी Dropadi Mahabharat को सुंदर और सुगंधित “सुगंधिका” फूल चाहिए था, तो भीम ने “यक्ष” के एक बगीचे को नष्ट कर दिया और कई राक्षसों को मार डाला।

(22). एक बार जब द्रौपदी और चार पांडव अर्जुन से मिलने के लिए पहाड़ों की तरफ जा रहे थे, तो वह पूरी तरह थक गई और थकावट से बेहोश हो गई, नकुल और सहदेव ने उसके पैरों की मालिश की और उसे सांत्वना दी। यह भी एक अनोखी कहानी है।

(23). द्रौपदी का उसके जीवनकाल मे तीन बार अपहरण किया गया था। ये तीन व्‍यक्ति थे – जयद्रथ, जटासुर और उप-किष्कस। लेकिन, यह तो उनका सौभाग्य ही था कि  हर बार उसे अपने पतियों द्वारा बचाया लिया जाता था।



(24). द्रौपदी Dropadi Mahabharat का वासुकी से कोई संबंध नहीं था। वह पूरी कहानी जहां वासुकी ने अर्जुन को बांधा था, द्रौपदी पर हमला किया था और कर्ण ने उसे बचाया था वह तो मात्र एक लोककथा ही है इसके अलावा और कुछ नहीं है।

(25). विराट साम्राज्य में “अग्यत्सव” (गुप्त काल) के दौरान, जब द्रौपदी का कीचक द्वारा लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था, तो उसने भगवान सूर्य से सुरक्षा की प्रार्थना की। सूर्या ने उसकी रक्षा के लिए “रक्षा” (दानव) भेजकर उसकी प्रार्थना को स्‍वीकार किया।

(26). पांचों पांडवों से विवाह करने का फैसला द्रौपदी का नहीं था। यह सब तो कुंती के आदेश के अनुसार हुआ था। क्‍योंकि कुंती ने ही कहा था कि पांचो भाई आपस में बांट लो। हालांकि एक और कथा भी प्रचलित है जिसके अनुसार युधिष्ठिर ने वह निर्णय लिया था , जो ऋषि व्यास द्वारा स्वीकृत था जिसने द्रौपदी को उनकी आम पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

(27). पांडवों की अन्य पत्नियों के लिए इंद्रप्रस्थ में प्रवेश करने के लिए द्रौपदी ने कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।



(28). वह निश्चित रूप से एक स्‍वार्थी और ईर्ष्यालु महिला नहीं थी। पांडवों की अन्य सभी पत्नियाँ (हिडिम्बा, उलूपी और चित्रांगदा को छोड़कर) इंद्रप्रस्थ में उनके साथ ही रहती थीं।

(29). युद्ध के बाद, अर्जुन हस्तिनापुर में उलूपी और चित्रांगदा को लायेऔर द्रौपदी द्वारा उन्हें कीमती उपहार, रत्न और आभूषणों से नहलाया गया।

(30). जब पांचो पांडवों के साथ उनका विवाह हो गया तो इसके बाद द्रौपदी और श्री कृष्ण आपस मे सखा सखी बन गए थे। इसलिए, द्रौपदी के लिए केवल अर्जुन को चुनने के लिए कृष्ण द्वारा दिमाग लगाना संभव नहीं था।

(31). द्रौपदी Dropadi Mahabharat ने “मायासभा” में दुर्योधन को अपमानित किया था और उसने दुर्योधन से कहा भी था कि “अन्धे का पुत्र अँधा हीं है “। यह वाकया तब हुआ जब दुर्योधन एक सूखी भूमि समझकर गलती से कुंड में गिर गया था ।



(32). द्रौपदी का एक मूल नाम भी हुआ करता था और वह नाम “कृष्णा” था। ऐसा इसलिये क्‍योंकि वह अपने “सखा ” श्री कृष्ण की तरह ही सांवली थी।

(33). कृष्णा और द्रौपदी Dropadi Mahabharat के अलावा, उनके कई और नाम भी हुआ करते थे। जैसे

  • यज्ञसेनी (यज्ञसेन (द्रुपद की पुत्री),
  • पारशती (परसत्ता की पोती),
  • पांचाली (पांचाल साम्राज्य की राजकुमारी),
  • नित्ययुवानी (जो हमेशा के लिए युवा रहती है,
  • मालिनी (वह जो सुंदर माला बना सकती है),
  • योजनगंधा (एक खुशबू जो मीलों से महसूस की जा सकती थी) और
  • महाभारती (राजा भरत के पांच महान वंशजों की पत्नी)।

(34). द्रौपदी राजा द्रुपद की प्रिय पुत्री थी। अर्जुन और द्रौपदी “स्वयंवर” से पहले कभी एक दूसरे से नहीं मिले थे ।



 

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