10 Shocking Jagnnath Puri Temple Mysteries!!

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भगवान जगन्‍नाथ पुरी से जुड़े 10 अनोखे रहस्‍य!! 10 Shocking Jagnnath Puri Temple Mysteries!!

Jagnnath Puri Temple Mysteries || भगवान जगन्‍नाथ पुरी से जुड़े 10 अनोखे रहस्‍य || 10 Shocking Jagnnath Puri Temple Mysteries!!

Jagnnath Puri Temple Mysteries
Jagnnath Puri Temple Mysteries

दोस्‍तों आप को कैसा लगेगा यदि हम आपसे यह कहें कि एक ऐसा मंदिर अपने भारत देश में स्थित है जिसमें भगवान की मूर्ति के अंदर उनका असली हृदय स्थित है?

ऐसी परंपरा भी है कि जब भी इस मूर्ति की जगह पर दूसरी नयी मूर्ति की स्‍थापना की जाती है तो इस दिल को निकाल कर उस नयी वाली मूर्ति में स्‍थापित कर दिया जाता है।

सबसे मजे की बात तो यह भी है कि पूरे के पूरे शहर की बिजली भी गुल कर दी जाती है ताकि कोई भी इस दिल को न देख सके।

यदि फिर भी कोई इसे गलती से भी देख लेता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है ऐसा कहा जाता है।

तो मित्रों आज के इस ब्‍लॉग पोस्‍ट में हम बात करने जा रहे हैं पुरी में स्थित भगवान जगन्‍नाथ जी के बारे में और हम आपको इस मंदिर से जुड़े दस रहस्‍यों को उजागर करेंगे जिससे विज्ञान जगत भी खासा हैरान रहता है और उसे सुलझा पाने में भी असमर्थ है।



1. भगवान जगन्‍नाथ पुरी के मंदिर के ऊपर लगा ध्‍वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में ही लहराता है। ऐसा क्‍यों होता है यह बात तो कोई भी नहीं बता सकता।

हालांकि इस झण्‍डे से जुड़ा एक नियम तो  यह भी है कि इसे रोजाना बदला जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि यदि किसी दिन झण्‍डे को न बदला गया तो फिर मंदिर अगले 18 वर्षों तक बंद ही रहेगा।

2. यह मंदिर लगभग 4 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसकी ऊँचाई 200 फुट से ऊपर है। यह मंदिर इस प्रकार बना है कि आप इसके पास खड़े होकर इसका गुंबद नहीं देख पायेंगे।

इसकी छाया में भी एक गहन राज की बात छुपी हुई है। इस गुंबद की छाया अदृश्‍य ही रहती है।

3. मंदिर के ऊपरी हिस्‍से पर एक सुदर्शन चक्र बना हुआ है और यह भी कहा जाता है कि पूरे पुरी शहर के किसी भी स्‍थान से इस सुदर्शन चक्र को देखा जा सकता है।

इस चक्र की बनावट इस प्रकार की है कि आप किसी भी दिशा से इसे देख लें, यह आपको आपके सामने ही प्रतीत होगा। यह चक्र अष्‍टधातु से बना है और इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है।



4. सामान्‍य दिनों में हवा जमीन की ओर समुद्र से होती हुई आती है और शाम ढलने के समय इसका उल्‍टा होता है। पर इस स्‍थान पर यह नियम बिल्‍कुल उल्‍टा होता है और यहां पर हवा जमीन से समुद्र की ओर जाती है।

5. आमतौर पर यदि ध्‍यान से देखा जाये तो पक्षी अक्‍सर किसी भी धार्मिक स्‍थल जैसे कि मंदिर, मस्जिद और चर्च इत्‍यादि पर आकर बैठ जाते हैं या आस पास मँडराते हैं परंतु पुरी मंदिर में ऐसा देखने को नहीं मिलता है।

यहां पर कोई पक्षी मंदिर पर आकर नहीं बैठता है। इसी कारण से मंदिर के ऊपर से कोई भी हैलीकॉप्‍टर या हवाई जहाज को उड़ाने की मनाही है।

6. संध्‍याकाल के दौरान प्रतिदिन एक मानव को ध्‍वज को उतारना होता है वह भी उल्‍टे पांव चढ़कर। इस मंदिर का ध्‍वज भी इतना भव्‍य है कि जब यह लहराता है तो हर कोई इसे देखता ही रह जाता है। ध्‍वज पर चंद्रमा की आकृति बनी हुई है।


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7. कहा जाता है कि जगन्‍नाथ पुरी मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है और यहां 500 रसोईये और 300 सहकर्मी काम करते हैं। इस रसोई की खास बात यह है कि चाहे कितने भी भक्‍तगणों की भीड़ आ जाये, यहां पर बना प्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता है।

और इससे भी अचरज की बात तो यह है कि मंदिर के बंद होने के समय पर प्रसाद स्‍वत: ही खत्‍म होने लगता है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यहां पर न तो प्रसाद कभी कम पड़ता है और न ही कभी ज्‍यादा।

इससे भी ज्‍यादा अचरज की बात तो यह है कि मंदिर में खाना लकड़ी के चूल्‍हे पर बनाया जाता है। यह प्रसाद सात बर्तनों में बनाये जाते हैं और सातों बर्तनों को एक के ऊपर एक रखकर बनाया जाता है।

यह सभी सातो बर्तन एक सीध में चूल्‍हे पर रखे जाते हैं। इससे भी बढ़कर बात तो यह है कि सबसे ऊपरी पात्र का भोजन सबसे पहले तैयार होता है और सबसे निचले पात्र का बर्तन का भोजन सबसे आखिरी में तैयार होता है।



8. इस मंदिर में एक सिंहद्वार है और ऐसा कहा जाता है कि जब तक इस द्वार में प्रवेश न किया जाये तब तक लहरों की आवाजें आती रहती हैं। जैसे ही सिंहद्वार के अंदर कदम जाते हैं तो तुरंत ही लहरों की आवाजें कहीं गुम हो जाती हैं।

9. जगन्‍नाथपुरी की तीन मूर्तियों को हर बारह साल में बदला जाता है। पुरानी मूर्तियों के स्‍थान पर नयी मूर्तियों को रख दिया जाता है। मूर्तियां बदलने से जुड़ा भी एक रोचक तथ्‍य है।

जिस वक्‍त मूर्तियां बदली जाती हैं उस समय मंदिर के आस-पास पूर्ण रूप से अंधेरा कर दिया जाता है। मंदिर के बाहर सीआरपीएफ तैनात कर दी जाती है और इस समय किसी भी व्‍यक्ति की मंदिर के अंदर प्रवेश की मनाही होती है।

सिर्फ वही पुजारी उस मंदिर में जाता है जिसे मूर्तियां बदलने की प्रक्रिया को पूर्ण करना होता है।



10. क्‍या आप यह जानते हैं कि जब श्रीकृष्‍ण ने देह का त्‍याग किया था तब उनके शरीर का एक ऐसा हिस्‍सा था जिसे पंचतत्‍व में विलीन न किया जा सका।

ऐसी मान्‍यता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण का हृदय आज भी उसी प्रकार से धड़क रहा है। कहते हैं कि वह हृदय आज भी इन्हीं मूर्तियों के अंदर स्थित है।

यदि आज की जानकारी आपको पसंद आयी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ शेयर अवश्‍य करें। यदि आपको कोई और रोचक तथ्‍य और पता हो तो नीचे दिये गये कॉमेण्‍ट सेक्शन में अवश्‍य लिखें। धन्‍यवाद!

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