आखिर क्‍या है जामवंत गुफा का अनसुलझा रहस्‍य? || Jamvant Gufa Ka Rahasya || Jamvant Cave Myster

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आखिर क्‍या है जामवंत गुफा का अनसुलझा रहस्‍य? || Jamvant Gufa Ka Rahasya || Jamvant Cave Mystery

आखिर क्‍या है जामवंत गुफा का अनसुलझा रहस्‍य? || Jamvant Gufa Ka Rahasya || Jamvant Cave Mystery

Jamvant Gufa Ka Rahasya
Jamvant Gufa Ka Rahasya

दोस्‍तों मीडिया वालों के पास एक खबर पहुंची कि भारत में एक ऐसी गुफा है जहां रामायण काल की एक बहुत ही रहस्य में पात्र जामवंत जी रहते हैं। पहले तो उन्हें इस बात पर यकीन नहीं हुआ।

परंतु कई लोगों से सुनने के बाद उन्होंने इस गुफा के अंदर जाने का प्लान बनाया। दोस्तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस गुफा तक जाने का कोई सही रास्ता नहीं है और ना ही यह गुफा संरक्षित है।

इसका मतलब यह कि जी गुफा आज भी अच्छी है वैज्ञानिकों और मीडिया के दल अपने कैमरे के साथ पहुंच गए।

इस गुफा के पास पर जैसे ही उन्होंने इस गुफा के अंदर प्रवेश किया और कुछ दूर अंदर गए तब उन्हें कुछ ऐसा दिखा जिसे देखते ही वह अपने कैमरे के साथ इस गुफा से तुरंत भाग निकले।

आखिर कहां है यह गुफा? गुफा के अंदर ऐसा क्या दिखा वहां से तुरंत भाग निकले? तो चलिये इस अजीब रहस्‍य की शुरुआत कर लेते हैं



पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बली, हनुमान जी, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मारकंडे, वेदव्यास, और जामवंत आदि कई ऋषि मुनि और देवता आज भी जीवित है। कहते हैं कि जामवंत जी बहुत ही विद्वान थे।

जामवंत ही परशुराम और हनुमान जी के बाद एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके तीनों युग में होने का वर्णन मिलता है और कहा जाता है कि आज भी जिंदा है। दोस्तों भारत के मध्य प्रदेश के रामगढ़ में एक ऐसी गुफा है जहां पर आज भी महाबली जामवंत जी निवास करते हैं।

महाबली जामवंत रामायण काल में भी थे और द्वापर युग के महाभारत काल में भी रामायण काल में विष्णु के अवतार श्री राम के प्रमुख में से एक थे। तो वही महाभारत काल में विष्णु अवतार श्री कृष्ण से युद्ध लड़ा।

यहां के लोगों के अनुसार शिव प्रतिमा और तपस्वी तपस्या करते देखे जाते रहे हैं। गुफा की पत्थरों में शिवलिंग त्रिशूल समेत भगवान की कई प्रतिमा अलग अलग एंगल से देखने पर नजर आती है।

वहीं गुफा से कुछ दूरी पर एक मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर खुद अपने हाथों से जामवंत ने बनाया थाा। यहां मौजूद गुफाओं के बाहर आपको पत्थरों पर जामवंत जी के पैर के निशान देखने को मिल जाएंगे।



दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस गुफा में लाखों टन सोना छुपा है और उसके पीछे का कारण है सरवनतक मणि। जी हां वही मणि है जो हर रोज 10 किलो सोना बोलती थी। और यह जामवंत के पास इस गुफा में मौजूद थी।

इस मणि के लिए भगवान श्री कृष्ण को जामवंत से युद्ध करना पड़ा था क्योंकि उन पर मणि चोरी करने का आरोप था और जिसे वह सिद्ध करना चाहते थे।

जिसे हासिल करने के लिए युद्ध करना पड़ा और उसके प्रकार जामवंत जी ने जब युद्ध में हारता देखा तो उन्होंने प्रभु श्री राम को पुकारा और उसके प्रकार सुनकर श्री कृष्ण को अपनी रामस्वरूप में आना पड़ा।

दोस्तों यह गुफा कई वर्षों तक लोगों की नजरों से ओझल थी लेकिन इस जगह की मान्यताओं को हमारे भारत के कुछ ऋषि मुनि जानते थे और इसीलिए वे यहां पर आकर तपस्या किया करते थे।

धीरे-धीरे लोगों को इस जगह के बारे में पता चला। लेकिन सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि आज भी लोग इस गुफा के अंदर जाने से बहुत डरते हैं।


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इस गुफा को देखकर आपको लगेगा कि इतनी प्राचीन और रामायण कालीन इस गुफा तक पहुंचना आज भी लोगों के लिए इतना मुश्किल क्यों है?

इसका सीधा सा कारण है इस गुफा का रहस्यमयी और खतरनाक होना। कुछ वैज्ञानिकों और मीडिया की टीम ने यह सोचा कि इस गुफा के अंदर जाकर इसके पीछे के रहस्य का पता लगाएंगे।

जैसे तैसे तंग रास्ते और खतरनाक रास्‍ते से होकर इस गुफा के सामने पहुंचे। उन्होंने बहुत अच्छे से इस गुफा का मुआयना किया लेकिन जैसे ही इस गुफा के अंदर कैमरे को लेकर गए तो उनका सामना भयानक अंधेरों से हुआ।

उन्होंने देखा कि यह रहस्‍य तो और भी गहरा है। उनको ऐसा लग रहा था मानो कोई ऐसा हो जो एहसास करवा रहा हो कि यहां से तुरंत लौट जाओ वरना अच्छा नहीं होगा।

उनके मन में इस गुफा को लेकर एक अनजाना सा डर सताने लगा। यहां से अपने सामान को लेकर भागने लगे। ऐसा भी कहा जाता है कि गुफा के अंदर उन्होंने हजारों वर्षों तक तपस्या की थी और उस जगह के नाम से जाना जाता है।



यदि  आप एडवेंचर की शौकीन भी है तो जामवंत गुफा के दर्शन जरूर कीजिएगा। अगर यह जानकारी आप को अच्‍छी लगे तो बिल्कुल लाइक और शेयर करके हमें सपोर्ट कीजिएगा। 

कहां है जामवंत गुफा?

जामवंत की ये प्रसिद्ध गुफा नेशनल हाइवे 12 और खरगोन से 6 किलोमीटर दूर स्थित गांव जामगढ़ के पास 1500 सौ फीट ऊपर पहाड़ी पर स्थित है।

दंतकथाओं के मुताबिक महाबली जामवंत त्रेता युग के रामायण काल मे भी थे और द्वापर युग के महाभारत काल मे भी।

रामायणकाल में वे विष्णु अवतार श्रीराम के प्रमुख सहायकों में से एक थे तो वही महाभारत काल मे उन्होंने विष्णु अवतार श्रीकृष्ण से युद्ध लड़ा।

गुफा से कुछ दूर एक मंदिर है जिस को रीछराज जामवंत ने केवल एक रात की अवधि में ही बना दिया था।

मंदिर का निर्माण जामवंत नग्न होकर कर रहे थे,मंदिर का कलश बनना बाकी था। तभी जामवंत की बहन ने बेवजह रात में आट पीसने की चक्की चला दी।



जामवंत चूंकि नग्न थे अत: वो चक्की की आवाज़ को किसी के आने की आहट समझ बैठे और खुद को छिपाने की गरज से वो अपनी गुफा की ओर दौड़ पड़े। आज भी इस दौड़ की निशानी के रूप में जामवंत के पदचिन्ह पत्थरों पर अंकित है। Jamvant Gufa Ka Rahasya

क्‍या कहते हैं पुरातत्‍वविद?

पुरातत्वविदों ने की है यहां खोजगुफा के इतिहास को कुरेदने और किंवदंतियों की सचाई को जानने कई पुरातत्वविदों ने यहां और अध्ययन किया।

फिलहाल देखरेख के अभाव में जामवंत की गुफा संकरी हो चुकी है। इस गुफा के आगे कई और छोटी गुफाएं हैं। इन गुफाओं की श्रृंखला प्राकृतिक शिव गुफा पर समाप्त होती है।

यहां के स्थानीय दावा करते हैं कि ये जामवंत की ही गुफ़ा है। स्थानीय मान्यताओं और यहां आने वाले पर्यटकों के मुताबिक ये गुफा सिद्ध मानी जाती है।

कई साधु-महात्मा यहां तपस्या करते देखे जा चुके हैं। गुफा के पत्थरों में शिवलिंग त्रिशूल समेत भगवान की कई प्रतिमा अगल-अगल एंगल से देखने पर नज़र आती है।


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यहां पहुँचने के लिए कटीले पेड़, पत्थर और चट्टानों से होकर गुजरना पड़ता है। दावा किया जाता है कि, ये गुफा 50 किलोमीटर दूर जाकर निकली हुई है। सरकार के ध्यान नहीं देने के कारण ये प्राचीन गुफा गुमनाम है।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि, ‘यहां पहुंचने का मार्ग जोखिम भरा है पर भगवान की कृपा से लोग पहुंच ही जाते हैं। वो खुद बपचन से आ रहे हैं। बहुत लोग आते है। आस पास से जो आता है निराश होकर नही जाता’। तो ये था Jamvant Gufa Ka Rahasya.


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