(Kaikayi)कैकयी ने भगवान राम के लिए 14 वर्षों का वनवास ही क्यों माँगा 13 या 15 वर्ष क्यों नहीं?

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

 कैकयी ने भगवान राम के लिए 14 वर्षों का वनवास ही क्यों माँगा 13 या 15 वर्ष क्यों नहीं?

Kaikayi ne Bhagwan Ram k liye 14 varsho ka vanvas hi kyon maanga? 13 ya 15 varsh kyo nhi?

Kaikayi


श्रीरामचरितमानस या रामायण में कैकैयी का पात्र अपने आप में अनूठा है। बिना इनके न तो राम को वनवास होता और न ही भगवान श्रीराम अत्‍याचारी रावण का अंत कर पाते।

यह तो हम सभी जानते हैं कि भगवान राम को उनके पिता राजा दशरथ (Dashrath) ने 14 वर्ष का वनवास दिया था पर क्‍या कभी आपने इस बात पर भी गौर किया कि यह वनवास 13 या फिर 15 वर्षों का क्‍यों नहीं मांगा गया।

आपको बता दें कि कैकेयी (kaikayi), कैकेय देश के राजा अश्वपति की पुत्री थीं। यह कैकेयी (kaikayi) का ही किरदार था जो हनुमान से भगवान की पुन: मुलाकात करवा सका। यह कैकेयी (kaikayi) के ही 2 वर थे जिन्‍होंने रामायण की कहानी को महत्वपूर्ण दिशा दी।

कैकेयी (kaikayi) ने जब राजा दशरथ (Dashrath) से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा तो इसके पीछे 3 मुख्य हैं, जो कि हिंदू धर्म में प्रचलित हैं।


1) प्रशासनिक कारण-


सबसे पहला कारण एक प्रशासनिक कारण था। रामायण Ramayana की कहानी त्रेतायुग के समय की है।

उस समय के नियमानुसार यदि किसी राज्‍य का कोई राजा 14 वर्ष के लिए अपना सिंहासन छोड़ देता है तो वह राजा बनने का अधिकार खो देता है। यह नियम एक छुपा हुआ नियम है जो कि टी०वी० पर नही दिखाया गया। यह नियम वाल्मीकि रामायण के अयोध्याखंड में विस्‍तार से बताया गया है।

राजा दशरथ (Dashrath) की रानी कैकेयी (kaikayi) भी यह बात भलीभांति जानती थी। अतः उन्‍होंने ठीक 14 वर्ष का वनवास ही माँगा। ऐसा इसलिये ताकि श्रीराम भविष्‍य में यदि वनवास समाप्‍त करके लौट भी आयें तो वह अपने राजा बनने का अधिकार खो दें।

परंतु यह भी एक अलग बात है कि बाद में भरत ने सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया और वनवास समाप्त करने के बाद राम को ही सिंहासन पर बैठाया और अयोध्‍या का राजा घोषित किया।

परंतु यह नियम केवल त्रेतायुग तक ही सीमित नहीं था अपितु द्वापरयुग युग में भी यह नियम था कि अगर कोई राजा 13 साल के लिए अपना राजकाज छोड़ देता है तो उसका शासन करने का अधिकार खत्म हो जाता है।

तो अब आप यह भी समझ गये होंगे कि क्‍यों दुर्योधन ने पांडवों के लिए 12 वर्ष वनवास और 1 वर्ष अज्ञातवास की अवस्‍था उत्‍पन्‍न की।

पर क्‍या यह नियम सिर्फ द्वापरयुग तक ही सीमित था? जी नहीं। अब बात करते हैं कलियुग के समय की।

कलियुग में भी अगर आप अपनी किसी Property के लिए 12 साल की अवधि तक अधिकार का कोई क्लेम नहीं करते हैं तो वह प्रॉपर्टी आपके अधिकार से चली जाती है।



2) व्यवहार परिवर्तन होने के कारण :

यह भी मान्‍यता थी कि यदि कोई व्‍यक्ति 14 वर्षों तक एक जैसा ही जीवन जीता रहेगा तो वह उसका आदी हो जायेगा और फिर उसका व्‍यवहार भी परिवर्तित हो जायेगा। आदमी का चरित्र और स्वाभाव परवर्तित हो जाना भी व्‍यवहार परिवर्तन के कारण ही आता है।

कैकेयी (kaikayi) ने सोचा कि राम तो वन में 14 वर्ष तक पेड़ की छाल, जानवरों की खाल पहनने और बालों को जटा-जूट बनाकर अपना पूरा जीवन तपस्वियों जैसा जीने लगेंगे।

मंथरा की सलाह पर कैकेयी (kaikayi) ने यही सोच-विचारकर राम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा। राम के वनवास के समय बस वह यही सुनिश्चित करना चा‍हती थी अपने पुत्र भरत का सिंहासन सदा के लिए सुरक्षित हो जाय।


3) प्रतिकार की भावना:


राम को अयोध्या का राजा बनाने का निर्णय राजा दशरथ (Dashrath) और मुनि वशिष्ठ ने विचार-विमर्श से लिया था। इस कार्य में रानी कैकेयी (kaikayi) से कोई भी बात नहीं कही गयी थी और ऐसा कहा जाता है कि यह बात कैकेयी (kaikayi) को 14 दिन बाद पता चली।

अब चूँकि कैकेयी (kaikayi), राजा दशरथ (Dashrath) की प्रिय पत्नी थी वह यह बात पहले ही जानना चाहती थीं। परंतु उन्हें ये बात मंथरा से पता चली। इसी बात का प्रतिकार लेने के लिए कैकेयी (kaikayi) ने उन 14 दिन को हर दिन एक वर्ष मानकर 14 साल का वनवास राम के लिए माँगा।

Also Read-

 

 

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Add a Comment

Your email address will not be published.