क्‍या पृथ्‍वी को समुद्र में छिपाया जा सकता है जबकि समुद्र तो पृथ्‍वी पर ही है? || Kya Prithvi Ko Samudra Me Chipaya ja sakta h

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

क्‍या पृथ्‍वी को समुद्र में छिपाया जा सकता है जबकि समुद्र तो पृथ्‍वी पर ही है?

Kya Prithvi Ko Samudra Me Chipaya ja sakta h ? || Kya Prithvi Ko Samudra Me Chipaya ja sakta h ?

Kya Prithvi Ko Samudra Me Chipaya ja sakta h


यह प्रश्‍न अपने आप में ही असमंजस वाला है। क्‍या पृथ्‍वी को समुद्र में छिपाया जा सकता है जबकि समुद्र तो पृथ्‍वी पर ही है? उतना ही तार्किक यहां पर आपको उत्‍तर मिलेगा।

यह कहानी तो हम सब बचपन से ही सुनते आ रहे हैं और यह हमारे मन मे सवाल उठना भी लाजमी ही है कि आखिर कैसे पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया जबकि समुद पृथ्वी पर ही है। चलिये अब इस प्रश्‍न को वैज्ञानिक आधार पर उत्‍तर देने का प्रयास करते है और इसकी सत्‍यता को सिद्ध करते हैं।

असुरराज हिरणाकश्यप के भाई हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया था। अब ऐसे में बहुत परेशानियां उत्‍पन्‍न हुईं। इसके फलस्वरूप भगवान बिष्णु ने सूकर का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को पुनः उसके कक्ष में स्थापित कर दिया।

उपरोक्‍त कथन तो वह कहानी है जो हम सब सुनते हैं और यह सोचते हैं कि यह तो असंभव है क्‍योंकि समुद्र तो पृथ्वी पर ही है। हम सोचते हैं कि यह तो बस एक किंव‍दतियां ही हैं।



अब देखते हैं कि इसका वैज्ञानिक आधार क्‍या हो सकता है?

कुछ समय पहले ही खगोल विज्ञानियों की दो टीमों ने ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए पानी के सबसे बड़े और सबसे दूर स्थित जलाशय की खोज की है। उस जलाशय के पानी की खास बात यह है कि वहां पानी की इतनी अधिक मात्रा है कि हमारी पृथ्वी के समुद्र के 140 खरब गुना पानी के बराबर वहां पर पानी उपस्थित है।

यह गृह पृथ्‍वी से लगभग 12 बिलियन से अधिक प्रकाश-वर्ष दूर है।

तो अब आप यह समझ ही सकते हैं कि राक्षस हिरण्‍याक्ष ने पृथ्वी को हो न हो इसी जलाशय में छुपाया होगा। या यह कहना भी गलत नहीं होगा कि यह भवसागर हो। ऐसा कहना इसलिये तार्किक लगता है क्‍योंकि पानी की मात्रा बहुत ही ज्‍यादा है।

अत: यह कहना उचित ही है कि पृथ्‍वी को समुद्र में छिपाया जा सकता है।


Also Read –

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Add a Comment

Your email address will not be published.