दहलीज पर बैठने वाली औरतें किन दुखों का कारण बनती हैं? Kyo Ghar ki Dahleej Par Nahi Baithna Chahiye

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दहलीज पर बैठने वाली औरतें किन दुखों का कारण बनती हैं? Kyo Ghar ki Dahleej Par Nahi Baithna Chahiye

दहलीज पर बैठने वाली औरतें किन दुखों का कारण बनती हैं? वास्तु शास्त्र क्या कहता है? Kyo Ghar ki Dahleej Par Nahi Baithna Chahiye

 

Kyo Ghar ki Dahleej Par Nahi Baithna Chahiye
Kyo Ghar ki Dahleej Par Nahi Baithna Chahiye

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नमस्‍कार दोस्‍तों, जैसा कि आप जानते ही हैं कि भाग्‍य और कर्म दोनों ही हमारे जीवन की दशा और दिशा निर्धारित करते हैं। ये दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। कौन अमीर होना नहीं चाहता? ऐसा भला कौन नहीं है जो अपने जीवन में सभी प्रकार के सुख नहीं चाहता है।

हर इंसान की यही ख्‍वाहिश होती है। कहा जाता है कि जो इंसान मेहनत करता है वही सफल होता है। तरक्‍की के लिये मेहनत तो करनी ही होती है। वैसे मेहनत के साथ साथ एक और चीज भी है जिसकी आवश्‍यकता मनुष्‍य को होती है और वह है किस्‍मत।

जब मेहनत और भाग्‍य दोनों का समागम होता है तभी सफलता कदम चूमती है। यह बात शत प्रतिशत सत्‍य ही है क्‍योंकि एक मजदूर जो सारा दिन परिश्रम करता है, वह करोड़पति बन जाता इस तरह से।

इसी प्रकार से वास्‍तु का भी अपना एक महत्‍व होता है। दोस्‍तों जिस जगह पर हम अपना अधिक से अधिक समय व्‍यतीत करते हैं उस जगह का भी हमारी आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है।

हमारी कुछ सामान्‍य सी दिखने वाली गतिविधियों से भी हमारे जीवन में अप्रत्‍यक्ष बदलाव होते रहते हैं। तो आज हम ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में बतायेंगे जिनके कारण घर में दरिद्रता बनी ही रहती है।


अक्‍सर महिलायें ऐसी ही गलतियों कर बैठती हैं जिसके कारण घर की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसी वे कौन सी गलतियां हैं जिनसे घर में दरिद्रता का वास होता है।

(1). तन और मन की पवित्रता का ध्‍यान

दोस्‍तों घर में अधिकांश लोग ईश्‍वर की आराधना व पूजा-पाठ करते ही हैं परंतु इसमें होने वाली कुछ गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं। इन गलतियों के कारण उनकी पूजा का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है।

पूजा करते समय तन और मन की पवित्रता का विशेष ध्‍यान रखना होता है। मांसाहार या मद्यपान या फिर पान-गुटका आदि खाने के बाद पूजा करने से ईश्‍वर नाराज हो जाते हैं। यह एक पाप होता है।

ठीक इसी प्रकार यदि आप कोई धर्म ग्रंथ आदि पढ़ रहे हैं तो भी पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्‍यान रखना चाहिये। भगवान के सामने रखे दिये को फूँक मार कर बुझाना और भगवान के लिये प्रसाद को सूँघकर या चखकर रखना, ऐसे कार्य करने से दरिद्रता का श्राप लगता है


(2). नाखून को बेवजह इधर-उधर फेंकना

नाखून जैसी सामान्‍य सी लगने वाली बाते भी हमारे जीवन में दुख और दरिद्रता का कारण बन सकती हैं। रात को नाखून काटना, नाखून कुतरना और नाखून काटकर घर मे इधर-उधर फेंकना आदि वास्‍तुशास्‍त्र के दृष्टिकोण से गलत है। ऐसा करने से राहू और केतु गृह हमारी ओर आकर्षित होते हैं। ये हमारे जीवन पर अपना दुष्‍प्रभाव डालते हैं। इसी कारण से हमारी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है।

(3). घर के बाहर कचरा इकट्ठा होने देना

हमेशा याद रखें कि अपने घर के मुख्‍य द्वार के बाहर या आस-पास कचरा इकट्ठा न होने दें। अपने घर का मुख्‍य द्वार सदैव माता लक्ष्‍मी के आगमन के लिये तैयार रहना चाहिये। कचरा और गंदगी देखकर माता लक्ष्‍मी आपके द्वार से ही वापस लौट जाती हैं। ऐसा करने से दरिद्रता का आपके घर में प्रवेश हो जाता है।

(4). मनहूसियत को फैलाना

माँ लक्ष्‍मी स्‍वभाव से ही चंचल होती हैं। उन्‍हें अपने घर में ही बनाये रखना इतना आसान नहीं होता है। घर में सब सुख सुविधाओ के होने पर भी पैसे का लालच करना और उसका सदुपयोग न करना, फटे-पुराने कपड़े पहनना और लगातार किसमत को कोसना, घर में हमेशा बेकार की बातो पर वाद-विवाद और लड़ाई-झगड़े, या मनहूसियत फैलाने से उस घर मे सुख और समृद्धि ज्‍यादा देर तक नहीं टिक सकती।


ये सभी चीजें घर में नकारात्‍मकता को बढ़ावा देती हैं और दरिद्रता को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मां लक्ष्‍मी जी ऐसी जगह से बहुत जल्‍दी चली जाती हैं और ऐसा घर ज्‍यादा दिनों तक सुख और समृद्ध नहीं रह पाता है।

(5). बद्दुआ लेना

दोस्‍तों हमेशा यह बात याद रखें कि पैसे के घमण्‍ड में आकर किसी को भी अकारण ही अपमानित नहीं करना चाहिये। चाहे वो कोई बड़ा बुजुर्ग हो, कोई महिला या फिर कोई छोटा बच्‍चा ही क्‍यों न हो, यह बात सदैव याद रखें कि अपमानित व्‍यक्ति के मुख से निकली हुई बद्दुआएँ आपके विनाश का कारण बन सकती हैं।

(6). भूूखे को भोजन न करवाना

आपकी समृद्धि को दरिद्रता में बदलते ज्‍यादा देर नहीं लगेगी। इसी के साथ ही यदि घर के द्वार पर कोई भूखा व्‍यक्ति या जानवर खड़ा हो तो उसे भूखा न जाने दें। आपमें सामर्थ्‍य है इसीलिये तो वे आपके द्वार पर आये हैं। और तो और साधू संतों का तो भूल से भी अपमान न करें।

(7). चौखट का अपमान करना

दोस्‍तों घर के मुख्‍य द्वार के साथ-साथ घर की दहलीज या मुख्‍य चौखट का भी अपना एक विशेष महत्‍व होता है। घर के मुख्‍य द्वार की चौखट पर बैठना, उस पर पैर रखकर निकलना या उस पर बैठकर भोजन करना तो निश्चित रूप से दरिद्रता को आमंत्रित करता है।


पुरानी मान्‍यताओं के अनुसार ऐसे भवन जिनमें चौखट या दहलीज न हो, उसे बड़ा ही अशुभ माना जाता था। ऐसे घरों में मां लक्ष्‍मी कभी प्रवेश नहीं करती हैं।

इसी के साथ ही चौखट के कारण ही आपके घर में गंदगी प्रवेश नहीं कर पाती है। आपके शत्रु द्वारा किया गया कोई भी नीच कृत्‍य का परिणाम आपके घर पर नहीं पड़ता है। इसीलिये कहते हैं कि अपने घर की दहलीज को हमेशा स्‍वच्‍छ और सुशोभित रखना चाहिये। यहां पर कभी भी बैठना नहीं चाहिये क्‍योंकि यह मां लक्ष्‍मी के आगमन में बाधा उत्‍पन्‍न करता है।

(8). टूटी हुई वस्‍तु या कांच को घर में रखना

घर में किसी भी प्रकार की टूटी हुई चीज, बंद पड़ी घड़ी, टूटा हुआ शीशा या कांच, खराब या सड़ी हुई चीजें, नलों से टपकता हुआ पानी, और टूटी हुई पुरानी कोई झाड़ू नहीं रखनी चाहिये। इससे घर में वास्‍तु दोष लगता है और दरिद्रता आती है।


तो मित्रों, ये वे कारण हैं जिनसे घर में दरिद्रता आती है। यदि आपको हमारे द्वारा दी हुई यह जानकारी पसंद आयी हो तो इसे अपने तक ही सीमित न रखें और अपने मित्रों के साथ भी शेयर अवश्‍य करें। यदि आपके पास हमारे लिये कोई सुझाव या सलाह हो तो नीचे दिये गये कमेण्‍ट बॉक्‍स में अवश्‍य लिखें। धन्यवाद!

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