Machander Nath Ki Kahani Bhag 20 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 20 || Machander Nath Ki Katha Bhag 20 || मछेन्‍द्रनाथ की कथा भाग 20

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Machander Nath Ki Kahani Bhag 20 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 20 || Machander Nath Ki Katha Bhag 20 || मछंदर नाथ की कथा भाग 20

Machander Nath Ki Kahani Bhag 20 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 20 || Machander Nath Ki Katha Bhag 20 || मछंदर नाथ की कथा भाग 20

Machander Nath Ki Kahani


भर्थरी अवंती नगरी के निकट एक गांव में ठहरे। वहा अपना माल ठीक से जमा हाथ सेंकने लगे लेकिन तभी वहां सियार जोर जोर से चिल्‍लाने लगा। भर्थरी समझ गये कि अब चोर आने वाला है।

सभी व्‍यापारियों ने अपने अपने हथियारो को निकालकर अपने पास रख लिया। वे चोरों से मुकाबला करने के लिये तैयार थे।

मुकाबला होने पर चोर जख्मी होकर चले गये। सुबह के समय सियार फिर बोले तो बंजारों ने भर्थरी ने पूछा कि बेटा अब ये सियार क्या कर रहे हैं?

तब भर्थरी ने उनको बताया कि शिवजी का वरदानी एक राक्षस उत्‍तर दिशा से दक्षिण दिशा में जाने के लिये आ रहा है। उसके पास चार अनमोल रत्‍न हैं। जो कोई राक्षस को मारेगा वही उन्‍हें प्राप्‍त करेगा।

उस राक्षस को मारने के बाद जो भी उसके खून का तिलक अपने माथे पर करेगा वह सार्वभौम राज करेगा। जब यह बात भर्थरी बंजारों को सुना रहे थे तो विक्रमादित्‍य भी यह बात सुन रहे थे और वे उस राक्षस को मारने जा पहुँचे।

अब यह जानते हैं कि ये राक्षस आखिर था कौन?

बहुत समय पहले एक राक्षस गंधर्व था। वह घूमता घूमता शिवजी के दर्शनों को कैलाश जा पहुँचा। वहां शिव और मां पार्वती जी चौसर खेल रहे थे। उसने शिवजी के चरणो मे अपना मस्‍तक टेक दिया।

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जब महादेव और पार्वती में खेलते खेलते विवाद होने लगा तो वहां उस गंधर्व को पंच बना कर पूछा कि किसकी जीत या हार हुई। तब शिवजी की कृपा के लालच से उसने शिवजी को विजेता घोषित किया।

पार्वती ने उसे क्रोध में आकर श्राप दे दिया। तो वह पार्वती के श्राप के कारण कांपने लगा और शिवजी से प्रार्थना करने लगा-

प्रभु अब क्‍या होगा?  यह सुन महादेव बोले कि पार्वती ने जो श्राप तुम्‍हें दिया है वह सही ही है। परंतु इंद्र ने पुरोचन गंधर्व को जो श्राप दिया था कि उसके जो पुत्र पैदा होगा वह मारेगा तब जाकर तुमहें इस राक्षस देह से मुक्ति मिलेगी।

परंतु मुझे कैसे पता चलेगा कि वह पुरूष कौन है? यह सुन महादेव बोले कि वह तुम्‍हें मारकर तुम्हारे खून का तिलक अपने माथे पर लगायेगा और सार्वभौम राजा होगा। यह सब जानकारी उसे घृमिन नारायण के अवतार भर्थरी से मिलेगी।

इतना सुन वह राक्षस शरीर धारण कर मृत्‍युलोक में उत्‍पन्‍न हुआ। एक समय गंधर्व नरेश इंद्र अपनी अप्‍सराओं के साथ बैठे थे। वहां तिलोतमा, उर्वशी , मेनका आदि अप्‍सराओं का जमघट था।

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पुरोचन ने सभा से उठ मोहित हो मेनका का मुख चूम स्‍तन मर्दन करने लगा। एक नारी की ऐसी बेइज्‍जती इंद्र से न देखी गयी।

इंद्र ने उसे श्राप दे दिया कि तू  मृत्‍युलोक में जाकर गधा बन कर रह। श्राप मिलते ही वह इंद्र से कहने लगा कि महाराज कृपा कर मुझे श्रापमुक्‍त कर दें। इस पर इंद्र को दया आ गयी।

इंद्र बोले कि बारह वर्ष पश्‍चात तू फिर अपने स्‍थान पर आ जावेगा परंतु जो कुछ मैं तुझे अभी समझा रहा हूँ उसे बहुत ही ध्‍यान से सुनना।

तू किसी युक्ति से मिथिला के सत्‍यवर्मा राजा की पुत्री से विवाह करना। ऐसा करने से भगवान विष्‍णु के समान सुंदर पुत्र विक्रमादित्‍य पैदा होगा। उसके गर्भ में आने के कुछ समय बाद ही तू श्राप मुक्‍त हो जावेगा।

फिर एक रात को सभी के चले जाने के बाद वह अपने कुम्‍हार से बोला कि आप मेरा विवाह सत्‍यवर्मा की पुत्री से करवा दो। फिर गधे ने उसका भ्रम दूर करने के लिये अपने पास बुलाया और कहा कि मैं तुम्‍हें रोज कहता हूँ कि सत्‍यवर्मा की पुत्री से शादी करूँगा।

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यह सुन कुम्‍हार सोचने लगा कि शादी तो दूर रही अगर यह बात राजा ने सुन ली तो भारी सजा देगा। उसने सोचा कि यह कौन है जो मनुष्‍य की बोली बोलता है। और तो और राजा की कन्‍या से विवाह करना चाहता है।

यह जरूर कोई गंधर्व है। फिर वह गधे पर अपने घर का सामान लादकर चल दिया तो नगर के पहरेदारों ने उसे रोक लिया और कारण पूछा। तो उसने कोई कारण नहीं बताया।

राजा ने उसे अपने राजदरबार में पेश करवाया। कुम्‍हार दरबार में तो पेश हुआ मगर सबके सामने कुछ न बोला। उसने एकान्‍त में राजा को ले जाकर गधे की सारी बातें बता दीं।

राजा ने कहा कि ठीक है पर मेरी भी एक शर्त है। तो उस गधे ने उस शर्त को स्‍वीकारा और कहा कि क्‍या शर्त है?

तो राजा ने कहा कि संपूर्ण नगरी तांबे की बनवा दी जाये। तो उसने कहा कि स्‍वीकार है। फिर गधे ने विश्‍वकर्मा से विनती की तो विश्‍वकर्मा ने रातों-रात नगरी को तांबे का बनवा दिया।

सुबह-सुबह राज्‍य के नागरिकों को बड़ा आश्‍चर्य हुआ पर राजा का आश्‍चर्य कम और चिन्‍ता ज्‍यादा थी। वे सोच में पड़ गये कि राजकुमारी का विवाह अब इस गधे से कैसे करवाऊँ?

राजा ने कुम्‍हार से कहा कि तुम अव‍ंती नगरी चले जाओ और अपनी कन्‍या से कहा कि बेटी मैं तुम्‍हें एक सत्‍य बताना चाहता हूँ। यह सुन राजकुमारी बोली कि वह क्या पिताजी?

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मैं तुम्‍हें एक शर्त से हार गया हूँ। मैंने एक गधे से शर्त लगायी थी कि अगर वह मेरी नगरी को तांबे का बना देगा तो मैं उस गधे से अपनी कन्‍या का विवाह कर दूँगा।

सारी सच्‍चाई सुनकर राजकुमारी तैयार हो गई। फिर राजा और उसकी पुत्री कुम्‍हार के घर गये और फिर अपनी बेटी से उस गधे रूपी गंधर्व के गले मे माला डालने को कहा। तो उसने माला डाल दी।

राजा के चरणो में अपना मस्‍तक टेक दिया। फिर  उसने राजा से कहा कि तुम बड़े ही भाग्‍यशाली हो जो मुझे अपना दामाद बनाया। तुमने मेरे शरीर का ख्‍याल न करके आत्‍मा का ध्‍यान किया इसीलिये तुम बहुत ही भाग्‍यशाली हो।

किस कारण से इंद्र ने उसे श्राप दिया था यह सारी कहानी उसे बतायी। वह बोला कि मैं एक गंधर्व हूँ और पुरोचन मेरा नाम है।

राजा ने दोनों को माला पहनवाकर अपनी नगरी को लौट गया। इधर कुम्‍हार अवंती नगर में दोनों के साथ रहने लगा।

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आपको यह कहानी कैसी लगी यह बात कृपया कर कॉमेण्‍ट सेक्‍शन में अवश्‍य बतायें। बाबा मछेन्‍द्रनाथ ( Machander Nath) आप सभी की मनोकामना पूर्ण करेंं।

इस कहानी को ज्‍यादा से ज्‍यादा शेयर करें बाबा के सभी भक्‍तों के साथ।

कॉमेण्‍ट सेक्‍शन में लिखें जय बाबा मछेन्द्रनाथ जी की।

 

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