Machander Nath Ki Kahani Bhag 5 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 5 || Machander Nath Ki Katha Bhag 5 || मछेन्‍द्रनाथ की कथा भाग 5

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Machander Nath Ki Kahani Bhag 5 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 5 || Machander Nath Ki Katha Bhag 5 || मछंदर नाथ की कथा भाग 5

Machander Nath Ki Kahani Bhag 5 || मछंदर नाथ की कहानी भाग 5 || Machander Nath Ki Katha Bhag 5 || मछंदर नाथ की कथा भाग 5

 

Machander Nath Ki Kahani


नागश्‍वत्‍य वृक्ष के नीचे देवताओं ने जो वरदान दिये उनमें कितनी शक्ति है? अभी आपको काफी संकटों का सामना करना है। मैं देखना चाहता हूँ कि आप में कितनी शक्ति है? फिर हनुमान जी कहने लगे कि तुम त्रिया राज्‍य में चले जाओ और वहां आराम से रहना। आपके कारण मेरा सारा भार कम हो गया है।

मछेन्द्रनाथ (Machander nath) बोले कि वह किस प्रकार?

तो हनुमान जी ने कहा कि जब हम रावण को मार लंका को जीतकर भगवान राम-सीता के साथ आ रहे थे तो सीता माता ने कहा था हनुमान रामजी के परम भक्‍त हैं। उन्‍होंने मुझे गृहस्थी बनाने के वास्‍ते अपने पास बुलाया और प्रथम वचनबद्ध करने के वास्‍ते बड़े प्रेम से बोलीं- बेटा हनुमान तुम तीनों लोकों में धन्‍य हो। मैं तुमसे एक वचन मांगना चाहती हूँ। बोलो वचन दोगे?

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तो हनुमान जी कुछ सोच विचार कर बोले-

हां मां, मैं तुम्‍हारी आज्ञा मानने को तैयार हूँ। तब उन्‍होंने शादी रचाने के लिये मेरे को बाध्‍य किया। हनुमान जी ने कहा कि स्त्री सुख भोगने के संकट में पड़ूंगा ऐसा सोच मैं उदास हो गया। तब जानकी क्रोध से मेरी तरफ देखकर बोलीं कि तुम घबराओ नहीं। त्रिया राज्‍य की सारी नारियां तुम्‍हारी होंगी।

मुझे और तुझे चारों युगों के बाद जन्‍म लेना पड़ता है। मेरे और राम जी के 99 जनम हो चुके हैं। रावण भी निन्‍यानवा था। तुम भी हो । रावण के मर जाने के बाद अब तुम्‍हें त्रिया राज्‍य जाना होगा। समय के अनुसार चलना हर एक इंसान का परम कर्तव्‍य है।


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जब भगवान राम ने मेरी ओर देखा तो मैंने हाथ जोड़कर कहा कि हे प्रभु ब्रह्मचर्य का पालन करना मेरा कर्तव्‍य है और दृढ़ निश्‍चय भी। इतना सुन राम बोले कि तुम उर्ध्‍वरेस हो इसलिये भू भूकार करने से वहां की नारियां गर्भवती हो जायेंगी। इसलिये तुम त्रिया राज्‍य जाया करो इस तरह ब्रह्मचर्य भी बना रहेगा। अत: भगवान श्रीराम के कहने से मैं त्रिया राज्‍य गया। वहां की महारानी का नाम मैनाकिनी है।

वहां पृथ्‍वी भर के पशु-पक्षी व नर-नारी एक साथ रहते हैं। यह सब पता लगने पर रानी का शरीर गुस्‍से में चूर हो गया। मेरे साथ सम्‍भोग करने के लिये उसने अनुष्‍ठान करना शुरू कर दिया। अपने शरीर का मांस काट-काटकर अग्नि कुण्‍डों में मंत्रों द्वारा आहुतियों को डालना शुरू किया। उसका यह अनुष्‍ठान बारह सौ वर्षों तक चला। जब उसका मांस समाप्‍त हो गया और दृढ़ निश्‍चय में फर्क न पड़ा तब मुझे खुश होकर दर्शन देने पड़े।

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वह मेरे पैरों में गिर पड़ी और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करने लगी। तो मैंने कहा रानी, तुम्‍हारी जो भी मनोकामना हो वह मुझसे कहो। मैनाकिनी बोली कि आपके भू भूकार से यहां की सभी नारियां गर्भवती हो जाती हैं और आप उन सभी के प्राणनाथ कहलाते हो। सो आप मेरी इच्‍छा की पूर्ति करो।

मैथुन की पद्धति का प्रचलन त्रिभुवन में प्रचलित है। वह हमें सपने में भी नसीब नहीं है। इसीलिये आप मुझे प्रेम किया करें। तब मैंने उनको समझाया कि मैं एक अखण्‍ड ब्रह्मचारी हूँ। और तुम कहती हो कि ऐसा प्रचलन तीनों लोकों में है। लेकिन मैं आपकी इच्‍छापूर्ति करने में असमर्थ हूँ।

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मेरी सांस द्वारा तुम लोगों की जितनी तृप्ति होती है काम शांत करने को उतनी ही पर्याप्‍त भी है। इससे अधिक की इच्‍छा के लिये यहां मछंदर नाथ आयेंगे। वे साक्षात कवि नारायण के अवतार हैं।

इस तरह से उसे धीरज बंधा। और अब आप वहां पहुँच रानी की इच्‍छा को पूरा करें और राज्‍य का सुख भोगें। हनुमान जी की वार्ता सुन मछेन्द्रनाथ बोले कि मैं भी उर्ध्‍वरत हूँ सो मुझे ये सब बताने से क्‍या फायदा? मेरा ब्रह्मचर्य खण्डित हो जाएगा। और तो और दुनिया भर में भी मेरी भारी बदनामी होगी। यह पाप कर्म आप मुझसे क्‍यों करवाते हो? वैसे भी नारी का संग नरक में ले जाता है। मछंदर नाथ (Baba Machindra Nath) की बात सुन हनुमान जी बोले की जो रीति अनादिकाल से चली आ रहीं है उसमें कैसा पाप?

इसीलिये आप घबराये नहीं क्‍योंकि आपकी कीर्ति सूर्य के समान ही चमकेंगी। हनुमान जी मछंदर नाथ को राजी कर त्रिया राज्य में भिजवा दिया और मछेन्द्रनाथ भी हनुमान जी की आज्ञा का उल्‍लघन न कर सकें इसलिये दोनों एक दूसरे को राम राम कह अपने अपने रास्‍ते पर चल दिये।

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