क्या आप मेघनाथ की इन शक्तियों के बारे में जानते है ? Meghanatha Hidden Powers

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क्या आप मेघनाथ की इन शक्तियों के बारे में जानते है ? Meghanatha Hidden Powers

क्या आप मेघनाथ की इन शक्तियों के बारे में जानते है ? Meghanatha Hidden Powers

मेघनाथ-Meghanatha

दोस्‍तों क्‍या आप जानते हैं कि मेघनाथ में कौन-कौन सी गुप्‍त शक्तियां थीं? आखिर ऐसी कौन सी गुप्‍त शक्तियां थीं कि वह इतना शक्तिशाली बन गया कि उसे इंद्रजीत कहा जाने लगा।

क्‍या कारण था कि वह लंकापति रावण से भी अत्‍यधिक शक्तिशाली था। क्‍या है इसकी असली वजह? रामायण के मेघनाथ कौन थे? तो आज हम रावण के बेटे मेघनाथ की इन्‍हीं गुप्‍त शक्तियों के बारे में आपको बताने वाले हैं।

मेघनाथ, रामायण के सबसे शक्तिशाली पात्रों में से एक है। मेघनाथ को इंद्रजीत भी कहा जाता है। तो मेघनाथ को मेघनाथ क्यों कहा जाता है? इसका उत्‍तर है कि मेघों की तरह गर्जना करने वाले को मेघनाथ कहते हैं।

जब रावण के पुत्र का जन्‍म हुआ तो उसके मुख से मेघों की तरह की गर्जना वाली ध्‍वनि उत्‍पन्‍न हुई और इसी कारण से इनका नाम मेघनाथ पड़ गया। रावण की तरह मेघनाथ ने भी स्‍वर्ग पर अपनी विजय पताका फहरा रखी थी।

अपनी सूझ-बूझ और शक्तिशाली दिव्‍यास्‍त्रों के बल पर उसने कई युद्ध जीते और इंद्र को भी परास्‍त किया और इसी कारण से मेघनाथ को इंद्रजीत भी कहा जाने लगा।

यह नाम भी उसे स्‍वयं इस सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने दिया था। असुर गुरू शुक्राचार्य ने ही मेघनाथ को इतना शक्तिशाली और शूरवीर योद्धा बनाया था।

शुक्राचार्य की देवताओं के साथ कभी भी नहीं बनी और सदैव उनके संबंध देवताओं से खराब ही रहते थे। इसी कारण से शुक्राचार्य ने देवताओं को हराने के लिये अपने शिष्‍य मेघनाथ को शक्तिशाली बनाया था।

मेघनाथ कौन सी विद्या जानता था? मात्र बारह वर्ष की आयु में शुक्राचार्य ने मेघनाथ को अनेकों सिद्धियां प्राप्‍त करने का मार्ग दिखाया था। मेघनाथ की शिक्षा रावण की कुलदेवी निकुम्‍बला देवी के मंदिर में हुई थी।
कहते हैं कि इंद्रजीत के पास कई ऐसे अस्‍त्र भी थे जिनका ज्ञान केवल उसे ही था। तो चलिये आपको यह बताते हैं कि इंद्रजीत के दिव्‍यास्‍त्र कौन कौन से थे।
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  • ब्रह्मदण्‍ड अस्‍त्र

ब्रह्म की शक्तियां वैसे तो कई सारे अस्‍त्रों में विद्यमान थीं परंतु इनमें से सबसे शक्तिशाली अस्‍त्र था ब्रह्मदण्‍ड अस्‍त्र था। इस अस्‍त्र में इतनी शक्तियां थीं कि सारी की सारी आकाशगंगा को नष्‍ट किया जा सके। इस अस्‍त्र का उपयोग ब्रह्मास्‍त्र और ब्रह्मशिरा अस्‍त्र की काट के लिये किया जा सकता था।

  • शक्तिबाण

इस शक्ति का उपयोग मेघनाथ ने (मेघनाथ शक्ति) अपने शत्रु लक्ष्‍मण पर किया। इस शक्ति के प्रभाव से महान शक्तिशाली लक्ष्‍मण जी भी मूर्छित हो जाते हैं। जब लक्ष्‍मण जी से युद्ध करते समय मेघनाथ अदृश्‍य होकर लड़ता है तो लक्ष्‍मण जी भी श्रीराम जी से ब्रह्मास्‍त्र का उपयोग करने की आज्ञा मांगते हैं।

परंतु श्रीराम ने इसकी आज्ञा नहीं दी क्‍योंकि उनके अनुसार इस तरह इस व्‍यापक अस्‍त्र का उपयोग करना अनुचित और अत्‍यंत ही विध्‍वंसकारी हो सकता था।

फिर लक्ष्‍मण जी के पास कोई और विकल्‍प भी नहीं था और अंत में वे अपनी ही शक्तियों के साथ मेघनाथ की मायावी शक्तियों से मुकाबला करते हैं और उस पर भारी पड़ने लगते हैं। तब जाकर मेघनाथ को शक्तिबाण का उपयोग करना पड़ता है जिससे लक्ष्‍मण जी बेहोश हो जाते हैं।

  • अंतर्ध्‍यान अस्‍त्र

यह अस्‍त्र विचित्र अस्‍त्रों में से एक था। यह एक सम्‍मोहिनी अस्‍त्र की तरह ही मायावी अस्‍त्र है जिसका प्रयोग करने से सीधा प्रभाव सामने वाले के दिमाग पर होता है। इस अस्‍त्र के प्रभाव से शत्रु या तो अपने अस्‍त्रों का प्रयोग करना भूल जाता था या फिर आत्‍मसमर्पण करने के लिये मजबूर हो जाता था।

  • नागपाशास्‍त्र

इंद्रजीत की पत्नि, सुलोचना, नागलोक के राजा दक्ष की पुत्री थीं। इंद्रजीत ने कई भयानक सापों की ताकतो को एक ही अस्‍त्र में संजो कर रख लिया था।

वैसे तो नागपाश अस्‍त्र कई योद्धाओं के पास था पर इंद्रजीत के पास जो नागपाश अस्‍त्र था वह किसी भी योद्धा के पास नहीं था क्‍योंकि वह सबसे शक्तिशाली था। इस अस्‍त्र का उपयोग श्रीराम और लक्ष्‍मण जी पर किया गया था परंतु गरुण देव की कृपा से उन्‍हें उस बंधन से मुक्ति भी मिल गयी।

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  • यम अस्‍त्र

निकुम्‍बला देवी के मंदिर में इंद्रजीत एक विशेष यज्ञ कर रहे थे परंतु विभीषण और वानर सेना द्वारा यह यज्ञ समय से पहले ही भंग कर दिया जाता है। क्रोध में आकर मेघनाथ इस अस्‍त्र का प्रयोग विभीषण पर कर देते हैं। परंतु इस अस्‍त्र की काट के बारे में तो लक्ष्‍मण जी को पहले से ही ज्ञात था।

  • ब्रह्माण्‍ड अस्‍त्र

जब लक्ष्‍मण जी यम अस्‍त्र को काट देते हैं तो इंद्रजीत ने गुस्‍से में आकर ब्रह्माण्‍ड अस्‍त्र का उपयोग करते हैं। इसके बाद ब्रह्मा जी इंद्रजीत को इस अस्‍त्र के उपयोग के बारे में सावधान भी करते हैं।

ब्रह्मा जी ने कहा कि इस तरह से ब्रह्माण्‍ड अस्‍त्र का उपयोग नीति के विरुद्ध है परंतु मेघनाथ ने एक न सुनी और सीधा लक्ष्‍मण जी पर इस अस्‍त्र का उपयोग कर लिया। परंतु अचंभे की बात तो यह है कि यह अस्‍त्र लक्ष्‍मण जी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है और अपितु उनकी परिक्रमा कर विलुप्‍त हो जाता है।

  • पाशुपतास्‍त्र

जब ब्रह्माण्‍ड अस्‍त्र, लक्ष्‍मण जी की परिक्रमा कर विलुप्‍त हो जाता है तो मेघनाथ क्रोध में आकर लक्ष्‍मण जी पर पाशुपतास्‍त्र का उपयोग करता है। परंतु यह अस्‍त्र भी लक्ष्‍मण जी की परिक्रमा कर ओझल हो जाता है। ऐसा बार-बार होने पर इंद्रजीत और भी क्रोधित हो जाता है।

  • वैष्‍णव अस्‍त्र

जब ब्रह्माण्‍ड अस्‍त्र और वैष्‍णव अस्‍त्र दोनों ही विफल हो जाते हैं तो इंद्रजीत क्रोध में आकर वैष्‍णव अस्‍त्र का प्रयोग करता है। परंतु इस बार भी कुछ नया नहीं होता और यह अस्‍त्र भी लक्ष्‍मण जी की परिक्रमा कर वापिस इंद्रजीत के पास ही चला जाता है।

जब लक्ष्‍मण जी पर कोई भी अस्‍त्र कार्य नहीं कर पाया तो जाकर मेघनाथ को लक्ष्‍मण जी के असली स्‍वरूप का पता चला और वह समझ गया कि यह कोई साधारण मानव नहीं अपितु स्‍वयं ईश्‍वर का ही कोई अवतार हैं।

रामायण काल में कई दिव्‍यास्‍त्रों का प्रयोग किया गया है। आपके अनुसार इन सब में से कौन सा अस्‍त्र सबसे अधिक शक्तिशाली था यह हमें नीचे दिये गये कमेण्‍ट बॉक्स में अवश्‍य बतायें। अपने मित्रों के साथ यह जानकारी अवश्‍य शेयर करें। धन्‍यवाद!

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