Nahate Samay Ye Galti Na Kare || नहाते समय भूल कर भी न करे ये गलतियाँ ।। शास्त्रों के अनुसार

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Nahate Samay Ye Galti Na Kare || नहाते समय भूल कर भी न करे ये गलतियाँ ।। शास्त्रों के अनुसार

Nahate Samay Ye Galti Na Kare || नहाते समय भूल कर भी न करे ये गलतियाँ ।। शास्त्रों के अनुसार

Nahate Samay Ye Galti Na Kare
Nahate Samay Ye Galti Na Kare

दोस्तों हमारे शास्त्रों में स्नान को लेकर विभिन्न प्रकार के नियम बताऐं गये है, जिनमें मनुष्यों के चार प्रकार के समय निर्धारीत किये गये है, साथ ही ये भी बताया गया है कि, स्नान के समय मनुष्यों को क्या-क्या गलतियां नहीं करना चाहिये, अन्याथा वो ग्रह दोषों से लेकन विभिन्न प्रकार पापों का भागी बन जाता है,

वैसे इसी क्रम में आज हम आपको स्नान की कथा सुनाऐंगे साथ ही आपको ये भी बताऐंगे कि आपको रोजाना कौन सा स्नान करना चाहिये, तो आइये एक बार विस्तार से प्रकाश डालते है कि, स्नान की कथा एवं उनसे जुड़े नियमों पर।

मित्रों, हमारे हिन्‍दू धर्म में स्‍नान का बहुत ही महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। भले ही आज के आधुनिक समाज में लोग नदी या तालाबों के किनारों पर स्‍नान करने नहीं जाते हों परंतु विशेष त्‍योहारों और कुंभ आदि के समय तो लोगों का उत्‍साह देखते ही बनता है।

क्‍या आप जानते हैं कि स्‍नान को लेकर हमारे शास्‍त्रों में विभिन्‍न प्रकार के नियम संयम बताये गये हैं। शास्‍त्रों के अनुसार मनुष्‍य के लिये स्‍नान के लिये तीन प्रकार के समय का प्रबंध किया गया है।

इन नियमों के अलावा यह भी शास्‍त्रों में बताया गया है कि आपको किन गलतियों को स्‍नान करते समय बचना चाहिये। अगर आप शास्‍त्रों में लिखी स्‍नान संबंधी बातों को नजरअंदाज करते हैं तो आप गृहदोषों के साथ साथ अन्य भी कई सारे पापों का भागी बन जाते हैं।


आज की इस ब्‍लॉग पोस्‍ट में हम आपको यह बतायेंगे कि आपको स्‍नान की कथा क्‍या है और आपके लिये कौनसा स्‍नान सर्वथा उचित है। गृहदोषों से मुक्‍त रहने के लिये आपको कौनसी चीजों से बचना है, यह भी आज आपको पता चल जायेगा।

तो चलिये स्‍नान के नियमों पर एक नजर दौड़ाते हैं-


स्‍नान के प्रकार || Snan ke Prakar


(1). Muni Snan || मुनि स्‍नान 

जब बात स्‍नान की हो रही है तो सबसे पहले बात आती है मुनि स्‍नान की। यह स्‍नान ब्रह्म मूहूर्त यानि कि सुबह चार से पांच बजे के बीच किया जाता है। शास्‍त्रों में इस स्‍नान सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण स्‍नान बताया गया है।

जो कोई भी व्‍यक्ति मुनि स्‍नान करता है उसे बल, विद्या और आरोग्‍य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही उस घर में सुख समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है।

(2). Dev Snan || देव स्‍नान

इसके बाद बारी आती है देव स्‍नान की जो कि सुबह पाँच से छह बजे के बीच किया जाता है। हमारे शास्‍त्रों में देव स्‍नान को उत्‍तम स्‍नान की संज्ञा दी गयी है। जो कोई भी व्‍यक्ति देव स्‍नान करता है उसे यश, कीर्ति, धन, वैभव और संतोष आदि अनेक फलों की प्राप्ति होती है।

(3). Manav Snan || मानव स्‍नान

इसके बाद बारी आती है मानव स्‍नान की जो कि सुबह छह बजे से आठ बजे के बीच किया जाता है। शास्‍त्रों में इसे साधारण स्‍नान की संज्ञा दी गयी है। जो कोई भी व्‍यक्ति मानव स्‍नान करता है उसे कार्यों में सफलता, परिवार में एकता, और सूझबूझ जैसी कई चीजों की प्राप्ति होती है।

इसके बाद हमारे सनातन धर्म में स्‍नान करने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसा इसीलिये क्‍योंकि सुबह आठ बजे के बाद होने वाला स्‍नान राक्षसी स्‍नान कहलाता है। जो कोई भी मनुष्‍य राक्षसी स्‍नान करता है, उसके जीवन में दरिद्रता छा जाती है। ऐसा व्‍यक्ति हमेशा हानि, क्‍लेश, दु:ख और परेशानियों से घिरा रहता है।

तो दोस्‍तों अब आप ही खुद निर्धारित कीजिये कि आपको कौनसा स्‍नान करना चाहिये। तो चलिये अब यह भी जान लेते हैं कि स्‍नान करते वक्‍त हमे किन गलतियों से बचना चाहिये।


स्‍नान संबंधी पौराणिक कथा || Snan Sambandhi Katha


पद्मपुराण में स्‍नान से संबंधित एक कथा का विवरण मिलता है, दरअसल हेमंत ऋतु में वृंदावन की गोपियां सुबह सवेरे गंगा किनारे स्‍नान करने जाती थीं। तथा स्‍नान करते वक्‍त वे मन ही मन भगवान की लीलाओं का ध्‍यान भी करतीं थीं।

परंतु उनकी इस साधना में एक त्रुटि भी थी। वह त्रुटि यह थी कि वे शास्‍त्रों का उल्‍लंघन करते हुए नग्न अवस्‍था में स्‍नान किया करती थीं। हालांकि यह क्रिया जानबूझकर तो नहीं बल्कि अज्ञानतावश ही होती थी परंतु फिर भी भगवान द्वारा यह भूल सुधरवाना भी आवश्‍यक था।

एक दिन की बात है, भगवान श्रीकृष्‍ण वहां पर प्रकट हुए और गोपियों के वस्‍त्र चुराकर पास ही के एक पेड़ पर बैठ गये। जब गोपियों को पता चला कि वस्‍त्र तो कान्‍हा के पास हैं तो उन्‍होंने कन्‍हैय्या जी से आग्रह किया कि वे उनके वस्‍त्र वापिस दे दें।

यह सुनकर भगवान बोले कि आप बाहर आकर स्‍वयं ही अपने वस्‍त्र ले लें। गोपियां जान गयीं कि भगवान उनके साथ हास परिहास कर रहे हैं। अत: गोपियां बाहर नहीं आयीं।

परंतु कुछ देर के बाद गोपियों को ठण्‍ड लगने लगी और वे कहने लगीं कि हे कान्‍हा हमारे वस्‍त्र हमें लौटा दो वर्ना हम तुम्‍हारी शिकायत नन्‍दबाबा जी से कर देंगे।


यह सुनकर कन्‍हैय्या जी बोले कि ठीक है आप हमारी शिकायत नन्‍दबाबा जी से कर देना परंतु हम आपके वस्‍त्र नहीं लौटायेंगे। इसके बाद गोपियां स्‍वयं बाहर आयीं और अपने वस्‍त्र पहनने लगीं।

इसके बाद भगवान ने उन गोपियों को उनकी भूल का अहसास करवाते हुए कहा कि जिस प्रकार से आप नग्‍न होकर जल में प्रवेश करती हैं तो इससे वरुण देव का अपमान होता है। इससे आप पुण्‍य की अपेक्षा पाप की भागी बन जाती हैं।

तब जाकर गोपियों को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्‍होंने वरुण देवता से अपने पापों की क्षमा मांगी। यही कारण है कि हम सांसारिक मनुष्‍यों को एकदम से नग्‍न होकर स्‍नान करने की मनाही है। आपको बता दें कि यह लीला भगवान कृष्‍ण ने तब रची थी जब वे महज छह वर्ष के थे।


क्‍या कहता है गरुड़ पुराण स्‍नान के विषय में?


इसके अलावा गरूड़ पुराण में भी इस बात का उल्‍लेख मिलता है कि जब आप स्‍नान कर रहे होते हैं तो रक्षक के रूप में आपके पितृ आपके आस-पास मौजूद होते हैं। आपके स्‍नान करते समय वस्‍त्रों से गिरने वाले जल से वे अभिभूत होते हैं। इससे उन्‍हें तृप्ति मिलती है।

इसके अलावा जब आप निर्वस्‍त्र होकर स्‍नान करते हैं तो आपके पितृ नाराज होते हैं और फलस्‍वरूप आपको पितृदोष लग जाता है। इसी कारण से आपके तेज, बल, धन और विभिन्‍न प्रकार के सुखों का नाश होता है। तो चलिये अब यह भी जान लेते हैं कि स्‍नान करने के दौरान हमें किन गलतियों को नहीं करना चाहिये।


तुरंत बंद कीजिये स्‍नान संबंधी ये गलतियाँ 


(1). ऐसे लोग जो अनायास ही पानी की बर्बादी करते हैं उनसे वरुण देव नाराज रहते हैं और ऐसे जातक को अनेकों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

(2). ऐसे लोग जो स्‍नान करने के बाद गंदा पानी छोड़ देते हैं वे चंद्रपीड़ा और राहु-केतु की पीड़ा से परेशान रहते हैं। राहु और केतु को छाया गृह माना जाता है और ये एक राशि में 18 माह तक रहते हैं। यही जातक को कालसर्प दोष की पीड़ा से गृसित कर देते हैं। अगर ये चाहें तो रातों रात राजा को रंक बना देते हैं।

(3). इसके अतिरिक्‍त मल-मूत्र विसर्जन, देर तक स्‍नान, शाम के वक्‍त स्‍नानस्‍नान या किसी नहाती हुई स्‍त्री को वासना भरी दृष्टि से देखना भी कुछ ऐसे कृत्‍य हैं जिनकी हमारे शास्‍त्रों में सख्‍त मनाही है। किंतु फिर भी यदि कोई मनुष्‍य इन नियमों का उल्‍लंघन करता है तो वह दैवीय बाधाओं से ग्रसित हो जाता है।


तो दोस्‍तों ये थे स्‍नान से संबंधित वे नियम जिनका पालन सभी मनुष्‍यों को पूरी निष्‍ठा से करना चाहिये। इसी के साथ हमारी यह जानकारी भी यहीं समाप्‍त होती है। आशा करते हैं कि आपको यह जानकारी जरूर पसंद आयी होगी। इस जानकारी को आप अपने मित्रों के साथ शेयर अवश्‍य करें। यदि आपके पास कोई सुझाव है तो नीचे कॉमेण्‍ट सेक्शन में अवश्‍य लिखें। धन्‍यवाद!

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *