नजर क्यों लगती है? नजर से कैसे बचे? Najar Kyo Lagti Hai || Najar Se Bachne Ke Upay

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नजर क्यों लगती है? नजर से कैसे बचे? Najar Kyo Lagti Hai || Najar Se Bachne Ke Upay

नजर क्यों लगती है? नजर से कैसे बचे? Najar Kyo Lagti Hai || Najar Se Bachne Ke Upay

Najar Se Bachne Ke Upay
Najar Se Bachne Ke Upay

नजर क्यों लगती है? किसकी लगती है? लगने पर क्या होता है? इससे कैसे बचे? दोस्‍तों इन सवालों से अक्‍सर ही हमारा मन परेशान हो ही जाता है। पर आज आपके इन सभी सवालों का जवाब मिलने वाला है। 

दोस्‍तों यह तो आपने जरूर देखा ही होगा कि कई माताएं अपने बच्चों को नजर के प्रकोप से बचाने के लिए काला टीका लगा देती है। इतना ही नहीं बल्कि कई दुकानदार अपनी दुकान पर नींबू मिर्ची लटका देते हैं ताकि किसी प्रकार की बुरी निष्ठा से उनकी दुकान की रक्षा हो सके।

वैसे हो सकता है कि आप में से बहुत से लोग इसे अंधविश्वास मानते हो और बहुत से लोग विशेषकर जिनको नजर लग चुकी है इस सब में विश्वास करते हो।

हरहाल इस संदर्भ में आप जो भी विचार रखते हों लेकिन आज हम आपको नजर से जुड़ी तीन ऐसी अति महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें जानकर आपको यह पता चलेगा कि नजर किसकी लगती है, किस-किस को नजर लगती है, और नजर से बचने का सबसे ठोस उपाय क्या है। तो देर किस बात की चलिए शुरू करते हैं।

दोस्तों बुरी नजर को समझने से पहले आपको उन लोगों की पहचान करनी होगी जिनकी नजर आपको लगती है या यूँ कहें कि जिनकी नजर बुरी होती है।


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नजर के प्रकार


दुनिया में तीन प्रकार की नजर काम करती है सकारात्मक, नकारात्मक और विरोधात्मक। नजर हमारी सोच, विचार, आदत और शब्दों से बनती है। जो मनुष्य जैसा आचरण करता है उसी के आधार पर उसकी नजर यह दृष्टि हो जाती है।

आपने स्वयं भी अनुभव किया होगा कि कुछ लोग बड़े ही सकारात्मक होते हैं। यह हमेशा अच्छी ऊर्जा से भरे रहते हैं। इनके पास जो है जितना है यह उसी में संतुष्ट रहते हैं।

यह कभी निराश नहीं होते और अपने इसी आचरण के कारण यह हर हाल में सुखी रहते हैं। जबकि वहीं कुछ लोग इनके विपरीत होते हैं जो कभी संतुष्ट नहीं होते।

यह हमेशा निराशा की बात करते हैं और खुद कर्म करके प्राप्त करने के बजाय यह कहते रहते हैं कि ऊपर वाले ने हमारे साथ न्याय नहीं किया। उसने हमें दिया ही क्या है जो हम उसका गुणगान करें, उसे धन्यवाद दें और भी पता नहीं क्या क्या।

वैसे दोस्तों मोटे तौर पर देखा जाए तो हमें भी कोई दिक्कत नहीं क्योंकि सबकी अपनी सोच होती है। जिसे जो ठीक लगे वैसा आचरण करें, उससे हमें क्या।

परंतु यहां पर हमें खतरा तीसरे प्रकार के लोगों से है जो किसी को भला नहीं देख सकते। यह दूसरों को अच्छा देखकर मन ही मन उसने उसे बद्दुआ देने लगते हैं और एक समय के बाद इनकी आदत इतनी अधिक बढ़ जाती है कि अपनी दृष्टि से ही उक्त को हानि पहुंचाना शुरू कर देते हैं।

जैसे ही किसी पर यह दृष्टि डालते हैं उसका बुरा समय शुरू हो जाता है। बस दोस्तों इसे ही बुरी नजर आए कहा जाता है। वैसे आपको बता दें कि नजर के संदर्भ में यह कहावत है कि अगर किसी को बुरी नजर लग जाए तो वह इंसान तो क्या पत्थर को भी फाड़ देती है।

हालांकि दोस्तों नजर का प्रभाव मनुष्यों के अलावा घर परिवार नौकरी व्यापार या वाहन इत्यादि पर हो सकता है।



नजर का प्रभाव


चलिए अब बात करते हैं कि नजर का प्रभाव किसी व्यक्ति या वस्तु पर किस प्रकार से पड़ता है।

नजर यदि बच्चे को लग जाए तो बिना बात के ही लगातार रोने लगेगा दूध नहीं पिएगा और यदि लेगा तो उल्टी करके निकाल देगा।

इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को लग जाए तो उसके सिर में दर्द होने लगेगा उसे आंखों में जलन घबराहट बेचैनी का अनुभव होगा, भूख नहीं लगेगी और भी बहुत कुछ।

यदि किसी घर को नजर लग जाए तो उस घर में सदैव क्लेश होने लगेगा, परिवार में अशांति का माहौल छा जाएगा, घर परिवार का कोई ना कोई सदस्य किसी ना किसी रोग से पीड़ित रहने लगेगा और आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाएगी, खर्च जरूरत से ज्यादा बढ़ जाएगा।

यदि काम धंधे को नजर लग जाए तो धीरे-धीरे से व्यापार ठप होने लगता है या ग्राहकी कम हो जाती है। जगह जगह पैसा फंस जाता है और तो और परिस्थितियां कुछ ऐसी निर्मित हो जाती है कि कोई चाहकर भी हमारी मदद नहीं कर पाता।

नजर के संदर्भ में यदि कहें तो यह विरोध करती है जिसके प्रभाव में आते ही भली प्रकार से काम करने वाले व्यक्ति या वस्तु अलग ढंग से आचरण करने लगते हैं।


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वैसे दोस्तों आपको बता दें कि नजर दोष दो प्रकार के होते हैं। एक होती है सामान्य जबकि दूसरी होती है गंभीर। अब दोस्तों यदि हम सामान्य नजर की बात करें तो इसका प्रभाव बहुत ही थोड़े समय के लिए होता है और यह किसी भी मनुष्य की दृष्टि से लग सकती है।

और इसे कुछ बहुत ही सामान्य लोगों के माध्यम से उतारा भी जा सकता है। लेकिन दोस्तों कई बार होता यूं है कि हमारे गुप्त शत्रुओं से हमारी खुशी देखी नहीं जाती।

ऐसे में वे तंत्र मंत्र या काले जादू का सहारा लेकर किसी प्रकार का टोना टोटका आपके ऊपर कर देते हैं। क्‍या आपके मन में यह प्रश्न उठता है कि जब हम किसी का अहित नहीं करते, जब हम किसी को कुछ बुरा नहीं करते तो फिर आखिर क्यों लोग हमें आकर नजर लगा देते हैं?

आखिर क्यों लोग हमारे शत्रु बन जाते हैं? और गुप्त रूप से हमारा हित करने में लगे रहते हैं। दरअसल आपके इस प्रश्न का उत्तर छुपा है आपके कर्मों में।

जी हां दोस्तों भले ही यह बात आपको सुनने में थोड़ी अप्रिय लगे लेकिन यह सच्चाई है। क्योंकि आप ही करता है और आप ही भोक्ता भी। आपके पास शक्ति है फिर चाहे शक्ति का प्रयोग कर आप अपने ढेर सारे मित्र बना सकते हैं या ढेर सारे शत्रु भी।



उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि यदि कोई याचक आपके घर कुछ मांगने आता है और आप देने में समर्थ है लेकिन इसके बावजूद भी आप उसे खाली हाथ लौटा देते हैं तो इसके क्या परिणाम होंगे?

निश्चित ही वह व्यक्ति या तो आपको बद्दुआ देगा या फिर मन ही मन आपको कोसेगा जिसके कारण आपको विरोध आत्मशक्ति का सामना करना पड़ेगा, जिससे सामान्य भाषा में नजर कहते हैं।

या फिर इसके ठीक विपरीत यदि आप उस याचक को अपनी श्रद्धा के अनुसार यथोचित दान इत्यादि दे देते हैं तो निश्चित ही आपके इस कृत्य से प्रसन्न होकर वह आपको आशीर्वाद देगा।

और यदि आशीर्वाद ना भी दे तो भी कम से कम वह आपको बद्दुआ तो नहीं देगा ना। आप किसी प्रकार की परेशानी से ऐसे ही बच सकते हैं।

इसी प्रकार से दोस्तों यदि हम गुप्त शत्रुओं की बात करें तो वह भी आपके इन्हीं शक्तियों से नाराज होकर आपके शत्रु बने थे। यदि आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि कहीं ना कहीं जाने अनजाने में आपने ही उनसे शत्रुता की थी।

इसी वजह से आज आपको इस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। या यह भी हो सकता है कि भले ही आप ने उनके साथ कुछ गलत ना किया हो लेकिन कभी किसी और के साथ तो किया होगा।



नजर से कैसे बचें || Najar Se Bachne Ke Upay


और आपके उसी कर्म के फल स्वरुप आज यह व्यक्ति आपके समक्ष शत्रु बनकर उपस्थित हो गया है। अतः दोस्तों यदि आपको लगता है कि आपसे कुछ गलत हुआ है और जाने अनजाने में आपने किसी को आर्थिक या भावनात्मक रूप से क्षति पहुंचाई हो या उस समय आप पीछे हट गए हो जब किसी को मदद की जरूरत हो तो आज ही आप अपनी भूल सुधार लीजिए।

और इसके लिए या तो आप संकट मोचन श्री हनुमान जी महाराज या बाबा भैरव के दरबार में जाकर क्षमा याचना कीजिए। यदि एक बार आपको उनसे माफी मिल गई तो फिर आपको ना तो किसी की नजर लगेगी और ना ही कोई गुप्त शत्रुओं आपका कुछ कर सकेगा।

बल्कि उसके द्वारा किए गए तंत्र-मंत्र के प्रयोगों का उल्टा असर उसी पर हो जाएगा। वैसे इस सबके अलावा भी आपको सदैव अहंकार भरी बातों से बचना चाहिए। कभी भूल कर भी अपनों से बड़ों को अपने वचनों और कर्मों द्वारा अपमानित नहीं करना चाहिए।

कभी पैसों का दिखावा  भी नहीं करना चाहिए। और यदि आपको स्वादिष्ट भोजन कर रहे हो तो या तो उसे मिल बांट कर खाएं या फिर एकांत में बैठकर। किसी की दृष्टि में न आयें।



आशा करते हैं यह जानकारी आपके लिए अत्यंत ही कल्याणकारी सिद्ध होगी और यहां तक पढ़ने के लिए आपका बहुत आभार। इस पोस्‍ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें और आप हमें फॉलो करना ना भूलें। आप सभी दोस्तों का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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