पृथ्वीराज चौहान की बेटी कौन थी || बेला और कल्याणी कौन थी || Prithviaj Chauhan Ki Beti Kon Thi?

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पृथ्वीराज चौहान की बेटी कौन थी || बेला और कल्याणी कौन थी || Prithviaj Chauhan Ki Beti Kon Thi?

Prithviaj Chauhan Ki Beti Kon Thi? पृथ्वीराज चौहान की बेटी कौन थी || पृथ्वीराज चौहान की कितनी बेटियां थी || बेला और कल्‍याणी की कहानी


यह तो हम सभी जानते हैं कि भारतीय महान राजपूत राजा पृथ्‍वीराज चौहान और मुहम्‍मद गौरी के बीच कुल 18 युद्ध हुए। प्रथम 17 युद्धों का परिणाम तो पृथ्‍वीराज चौहान के पक्ष मे गया परंतु अंत में 18 वे युद्ध में राजा जयचंद के कारण गौरी अपने मकसद मे कामयाब हुआ और पृथ्‍वीराज चौहान पराजित हो गये।

और फिर उस वक्‍त शुरू हुआ नरसंहार का दौर। पर पृथ्‍वीराज चौहान और संयोगिता की बेटी बेला का क्‍या हुआ यह बहुत कम लोग ही जानते हैं। पृथ्वीराज चौहान की कितनी बेटियां थी? यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं।

पृथ्वीराज चौहान की बेटी  कौन थी? बेला, Prithviraj chauhan ki beti थीं। कल्‍याणी, राजा जयचंद की पौत्री एवं बेला की सखी थीं। Prithviraj Chauhan ki beti ka naam Bela Tha.

पृथ्वीराज चौहान की बेटी बेला का विवाह कैसे हुआ ? पृथ्‍वीराज चौहान की बेटी की शादी कैसे हुई? हुआ भी था या नहीं भी था। आखिर कैसे बेला ने अपने देश की लाज रखी यह कहानी भी सभी को ज्ञात नहीं है। आइये जानते हैं आगे क्‍या हुआ।

नरसंहार करने के बाद मोहम्मद गोरी यहीं नहीं रूका। वह हमारे देश को लूटकर अपने देश काेे जब गया तो गजनी के सर्वोच्च काजी गुरु निजामुल्क ने असका अपने महल में बहुत ही भव्य स्वागत किया। और करता भी क्‍यों नहीं क्‍योकि उसने भारत के अजेय सपूत को हराया था।

निजामुल्‍क ने उससे कहा कि “आओ गोरी आओ, तुमने भारत पर फतेह कर इस्लाम का नाम रोशन किया है। तो अब बताओ मुझे कि “सोने कि चिड़िया हिंदुस्तान” के कितने पर कतर के लाये हो।”

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यह सुन गोरी बोला कि “काजी साहब” मैं हिंदुस्तान से अकूत संपत्ति को लूट कर लाया हूँ। अगर आंकड़ों की बात करूँ तो मैं सत्तर करोड़ दिरहम मूल्य के सोने के सिक्के,पच्चास लाख चार सौ मन सोना, चांदी और भी बहुत से मूल्यवान वस्तु हिंदुस्तान से लूट खसोट कर के लाया हूँ। यह सब मै महमूद गजनी की सेवा में प्रस्‍तुत करने के लिये लाया हूं।

यह सुन निजामुल्‍क की खुशी का ठिकाना ही नही रहा। वह बोला – बहुत अच्छा

निजामुल्‍क यह जानता था कि भारत में मंदिरों में अकूत संपत्ति है सो उसने यही बात गोरी से पूछी। वह आगे बोला – “हिंदुस्तान के काफिरो के मंदिरों का क्या किया?”

यह सुन गोरी ने मंदिरों से लूटी गई संपत्ति का ब्‍यौरा देना शुरू कर दिया। वह बोला – ” मैंने हिंदुस्तान के कई मंदिरों में लूटपाट की है। मंदिरो को लूटकर 17000 सोने चाँदी कि मूर्ति तथा 2000 किस्म की बेशकीमती पत्थर लेकर आया हूँ।

इसके साथ ही वहां के शिवलिंग भी उठा लाया। और भारतीयों के मानसिक मजबूत दृष्टिकोण को नस्‍तेनाबूद करने के वास्‍ते बहुत से मंदिरों को नष्ट भृष्ट कर मिट्टी मे मिला दिया”



यह सुन काजी बोला – बहुत अच्छा, सुभान अल्लाह।

थोड़ा देर रुककर, वह काजी बोला यह सब तो ठीक है पर हमारे लिए कोई खास तोहफा नही लाये?

तब गोरी बोला – “लाया हूं ना काजी साहब, आपके लिये तो जन्नत कि हूरो से भी सुंदर जयचंद कि पौत्री कल्याणी तथा पृथ्वीराज चौहान कि बेटी “बेला” सिर्फ आपकी खिदमत करने के लिये।

अब तो काजी की खुशी दुगुनी हो गयी वह तपाक से बोला – तो फिर देर किस बात की है

गोरी बोला बस आपके इशारे भर कि जरूरत थी।

और इधर काजी ने इशारा कर दिया। उसके इशारा करते ही शाहबुद्दीन गोरी ने “बेला और कल्याणी” को उसके हरम में पहुँचा दिया।”

चूँकि कल्याणी और बेला अभूतपूर्व सुंदरी थीं तो काजी च‍कित रह गया और अदभुत सुंदरता को देख काजी कि आंखे चौंधिया गयीं। उसे तो बस यही लग रहा था कि मानो जन्‍नत से बस उसके लिये ही हूरें जमीन पर आ गयी हैं।


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उसने आव देखा न ताव और दोनों राजकुमारियों के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। यह सुन बेला बोली –

“काजी साहब आपकी बेगम बनना हमारे लिए खुशकिस्मती है। पर आपसे विवाह करने से पहले हमारी भी दो शर्ते हैं जो आपको पूरी करनी होंगी।”

यह सुन काजी बोला – क्‍यों नहीं? कहो-कहो क्या शर्ते हैं?  तुम जैसी हूरो से शादी करने के लिए मैं कोई भी शर्त मानने को तैयार हूं।

यह सुनकर पृथ्‍वीराज चौहान की बेटी बेला बोलीं –

पहली शर्त तो ये है की हमे शादी से पहले अपवित्र ना किया जाए। और इसके पश्‍चात दूसरी शर्त यह है कि हमारे यहाँ प्रथा है कि लड़के का कपड़ा लड़कियों के यहाँ से आता है,अतः दूल्हे के कपड़े का जोड़ा तथा हमारी रकम हमारे मातृभूमि से मंगाई जाए।



यह बात काजी को बहुत पसंद आयीं और वह बोला कि मुझे तुम्हारी दोनों शर्ते खुले दिल से मंजूर हैं।

इसके बाद तो फिर बेला और कल्याणी ने कविचंद के नाम एक रहस्यमई खत लिख कर भारत भूमि से शादी का जोड़ा मांगा लिया।

बेला और कल्‍याणी का काजी के साथ निकाह का दिन निश्चित हो गया। रहमत झील के किनारे नए महल में निकाह कि तैयारी शुरू हुई। कविचंद द्वारा भेजे गए कपड़े पहन काजी साहब शादी के मंडप में आये।

बेला और कल्याणी ने भी कविचंद द्वारा भेजे हुए कपड़े पहन रखे थे। शादी को देखने के लिए बाहर जनता कि भीड़ इक्कठी हो गयी थी।

इधर बेला ने अपनी योजना का दूसरा भाग शुरू कर दिया और काजी से कहा कि हम कलमा और निकाह पढ़ने से पहले गजनी की जनता को झरोखे से दर्शन देना चाहते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि विवाह के पहले जनता को दर्शन देने की हमारे यहाँ प्रथा चली आ रही है।

और वैसे भी शाह गजनी के नगर वालो को भी तो पता चले कि आप बुढ़ापे में जन्नत की सबसे खूबसूरत हूरो से शादी रचा रहे हैं। यह तो गजनी के सम्मान में चार चांद लगा देगी।



वह हवसी बूढ़ा काजी बहुत खुश हो गया और बोला – हां- हां क्यों नही।

बेला और कल्याणी की यह ख्‍वाहिश पूरी करने के लिये वह उनके साथ महल के चबूतरे पर गया। पर वहां ऐसी घटित हुई जिससे बेला और कल्‍याणी का नाम इतिहास में अमर हो गया।

वहाँ पहुचते ही काजी के दाहिने कंधे से आग कि लपटे उठने लगीं। अब ऐसा इसलिये हो रहा था क्योंकि कविचंद ने बेला और कल्याणी का रहस्मय पत्र समझकर बड़े तीक्ष्ण विष में सने हुए कपड़े भेजे थे।

वह विष अपने आप में ऐसा अनूठा था कि काजी विष कि ज्वाला से पागलो कि तरह इधर-उधर भागने लगा। वह छटपटाने लगा।

तभी भारत की महान बेटी बेला ने काजी से कहा कि तुम्ही ने गोरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए उकसाया था ना? अब हमने तुझे मारकर अपने देश को लूटने का बदला ले लिया।

गजनी की समस्‍त जनता को हम बता देना चाहते हैं कि हम हिन्दू कुमारिया हैं और किसी में इतनी ताक़त नहीं है कि जो हमारे जीवित रहते हुए हमारे शरीर को छू सके।

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इतना कहकर उन दोनों वीरांगनाओं ने उस काजी के महल की छत पर किनारे पर खड़ी होकर एक दुसरे के छाती में विष बुझी कटार भोक दी। इस तरह उन दोनों ने उन वहशियों से अपने आप को बचाया और काजी को उसके किये का दण्‍ड देकर मृत्‍यु को खुशी से गले लिया।

कुछ समय बाद उन दोनों की प्राणहीन देह उस ऊँची छत से नीचे लुढ़क गयी। और इधर पागलों की तरह इधर उधर भागता काजी विष की ज्‍वाला से जलकर भस्म हो गया।

भारत की इन दोनों बहादुर बेटियों ने विदेशी धरती पर पराधीन रहते हुए भी बलिदान के जिस गाथा का निर्माण किया वो गर्व करने योग्य है।

यह जानकारी हम सबको नहीं पता होती। अत्‍यंत हर्ष होता है कि ऐसी वीरांगनाए हमेशा से भारत का माथा गर्व से ऊँचा करती आयी हैं।



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