Rahasyamayi Murti – आखिर क्‍या है 26000 साल पुरानी इस मूर्ति का रहस्‍य जिसे आजतक नहीं सुलझा पाया? 

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Rahasyamayi Murti – आखिर क्‍या है 26000 साल पुरानी इस मूर्ति का रहस्‍य जिसे आजतक नहीं सुलझा पाया?

Rahasyamayi Murti – आखिर क्‍या है 26000 साल पुरानी इस मूर्ति का रहस्‍य जिसे आजतक नहीं सुलझा पाया? Rahasyamayi Murti

Rahasyamayi Murti
Rahasyamayi Murti

एक बौद्ध भिक्षु, लकड़ी के बक्से को लेकर सेना के जवानों के पास पहुंचता है। वह लकड़ी के बक्से को वहां मौजूद कमांड उसको दे देता है और कुछ ऐसी बातें बताता है जिसे सुनकर कमांड उसको उनकी बातों पर यकीन नहीं होता।

साधु के चले जाने के बाद वहां मौजूद कमांडोज बहुत ही टेंशन में उस लकड़ी के बक्से को खोलते हैं। बक्सा खुलते ही अंदर से एक छोटी सी मूर्ति निकलती है।

बाद में इस मूर्ति को कमांडोज वैज्ञानिकों के पास भेज देते हैं ताकि यह पता चल सके कि आखिर यह मूर्ति किसकी है और यह कितनी पुरानी है।

दोस्तों वैज्ञानिकों ने जब इस मूर्ति का परीक्षण किया तो वहां पर खड़े सभी वैज्ञानिकों के होश उड़ गए क्योंकि यह मूर्ति भगवान विष्णु की थी।



और यह आज की नहीं बल्कि 26000 साल पुरानी थी। और इस मूर्ति में ऐसे कई राज दफन थे जिनको जाने के बाद इस मूर्ति पर शोध करने वाले सभी वैज्ञानिकों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गयी।

दोस्तों आपको जानकारी और भी आश्चर्य होगा कि यह मूर्ति बहुत ही रहस्यमय तरीके से गायब हो गयी और आज तक किसी को नहीं मिली। आखिर कौन था वह भिक्षु और उसे यह मूर्ति कहां से मिली और उसने यह मूर्ति कमांडर को क्‍यों दी?  

उसके बारे में ऐसा क्या जान लिया था जिसके कारण उनकी मौत हो गई? तो जिस मूर्ति के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वो भगवान विष्णु की है। यह मूर्ति 1959 में नेपाल के क्षेत्र में मिली थी।

उस इलाके में एक बौद्ध भिक्षु को मिली 45 ग्राम वजनी यह मूर्ति एक लकड़ी के बॉक्स में थी। वह बौद्ध भिक्षु उस लकड़ी के बक्से को लेकर अमेरिका के कमांडोज के पास पहुंचा और यह कहा कि इस मूर्ति को संभाल कर रखना क्योंकि यह मूर्ति बहुत ही दुर्लभ है।

अमेरिकी कमांडोज ने उस लकड़ी के बक्से को अपने कब्जे में ले लिया और उसे खोला गया। बक्सा खुलते ही अंदर से एक बहुत ही रहस्यमयी तरीके से एक मूर्ति बाहर आ गयी। उस मूर्ति के साथ एक प्राचीन पांडुलिपि भी मौजूद थी।


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उस मूर्ति के मिलते ही उन कमांडोज ने उसे अमेरिका भेज दिया ताकि विज्ञानिक इस पर शोध कर सकें। इसके बाद पता चला कि हिंदुओं के देवता भगवान विष्णु की है यह मूर्ति।

यह 5.3 सेंटीमीटर लंबी 7 सेंटीमीटर चौड़ी है और वजन 40 ग्राम है। इस बॉक्स में मूर्ति रखी गई थी वह भी विशेष धातु और लकड़ी का बना था। मूर्ति के नीचे शिव पार्वती जी प्रतीत होते हैं।

इन सब की कार्बन डेटिंग करने पर यह पता चला कि यह मूर्ति लगभग 26450 ईसापूर्व की है। वैज्ञानिकों ने जब इसके पास मौजूद पांडुलिपि को समझने की कोशिश की तो पता चला कि यह काफी पुरानी है।

इसमें इस मूर्ति की उपयोगिता इसका इस्तेमाल और इसका नाम भी लिखा है। इस मूर्ति का नाम का अनुवाद किया गया तो कल्‍प विग्रह सामने आया।  वैज्ञानिकों ने इसका नाम कल्‍प विग्रह रखा।

जब वह मूर्ति थी तब कहा था कि अगर इस मूर्ति को किसी तांबे के लोटे में पानी भरकर 9 दिनों तक रखा जाए तो इस मूर्ति से यह पानी एकदम दवाई अमृत जैसा हो जाता है।

और इस पानी को जो भी पिएगा उसकी उम्र लंबी बहुत लंबी हो जाएगी। बौद्ध भिक्षु की कही गई बातों पर शोध किया गया और पानी को अलग प्रयोगशाला में भेजा गया और इस प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने भी यही सिद्ध भी कर दिया।



1960 के आसपास यह प्रयोग किया गया था। इसके बाद सीआईए ने एक टीम तैयार की और जिन सभी को यह पानी पीने को दिया गया, दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस पानी को पीने वाले लोगों की उम्र आज 100 से भी पार चली गई है।

कल्‍प विग्रह के प्रयोग से सब कम से कम 110 वर्ष की आयु के पास है। सभी के सभी स्वस्थ हैं और दीर्घायु है और जो मर गए हैं उन सब की रहस्‍यमयी तरीके से मौत हो गई। कोई कार एक्सीडेंट से मारा गया तो कोई अन्य कारण से मर गया।

फिर बाद में जब यह खबर दुनिया के सामने आई तो फिर यह मूर्ति और पांडुलिपि अचानक चोरी हो गई और वह भी अमरीका के बेस कैंप से। हजारों लोगों से पूछताछ की गई मगर यह मूर्ति नहीं मिली। लाखों डॉलर का इनाम भी रखा गया।

बहुत लोगों की हत्या भी हुई जिनमें माइक्रोबायोलॉजी वाले अधिक थे। चलिए बात करते हैं इस मूर्ति की रूपरेखा के बारे में। यह मूर्ति धातु की बनी है और वैज्ञानिक परेशान इसलिए भी है क्योंकि लोगों को 26000 साल पहले इस सब की उतनी समझ नहीं थी।

परंतु क्यों और कैसे बना लिया गया इस मूर्ति को यह थोड़ी अजीब लगती है। यह मूर्ति आपको थोड़ी भ्रमित करेगी क्योंकि यह मूर्ति आपको एक नजर में भगवान शिव की लगेगी और दूसरे ही पल आपको भगवान विष्णु की लगेगी।



इस मूर्ति के हाथ में सुदर्शन चक्र है जो ऐसा लग रहा है कि भगवान शिव, भगवान विष्णु की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें यह सुदर्शन चक्र दे रहे हैं।

और दूसरे ही पल आपको इस मूर्ति की दूसरे हाथ में कमल के फूल और उनकी विशेषताएं भगवान विष्णु से मेल खाते भी दिखाई देंगी।

तो दोस्तों आपका क्या कहना है इस मूर्ति के बारे में अपने सभी विचार हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से जरूर लिखें।

इस रोचक जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर कीजिएगा ताकि सभी लोगों को इस रहस्‍यमयी मूर्ति का पता चल सके।

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