रावण की 11 अच्छी बातें जो TV पर रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! || Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me 

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

रावण की 11 ऐसी बातें जो टी.वी. रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! रावण की 11 अच्छी बातें जो टी.वी. रामायण में छुपाई गई | Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me

रावण की 11 ऐसी बातें जो टी.वी. रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! रावण की 11 अच्छी बातें जो टी.वी. रामायण में छुपाई गई | Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me | Ravan ke bare mein bataiye

Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me

जिसको स्‍वयं ब्रह्मा जी ने वरदान दिया हो कि तुम्‍हें कोई नहीं मार सकता सिवाय एक मनुष्‍य के वो भी तब जब कि तुम्‍हारी नाभि पर वार किया जाये। एक ऐसा व्‍यक्ति जिसकी मौत स्‍वयं देवता भी न कर पाये। यहाँ तक कि भगवान राम भी बिना विभीषण के बताए उसका संहार नहीं कर सकते थे।

एक ऐसा राक्षस जिसने जब ठान ली तो भगवान शंकर को ले जाने के लिए पूरा कैलाश पर्वत सर पर उठा लिया। ऐसा शख्‍स था रावण जिसने तीनों लोकों पर विजय पताका फहरा रखी थी।

दोस्‍तों आज हम बात करेंगे दशानन रावण के बारे में। इस ब्लॉग लेख में आज हम आपको रावन के ऐसे विचित्र बातों के बारे में बताएँगे जिनसे आज भी लोग अनजान हैं। Ravan ki acchi baten और Good things about Ravana or Ravan आज आपके सामने हैं। 


Ravan Ki Achi Baatein || Ravan Ki Acchi Baten


(1). घोर तपस्‍वीRavan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me

वैसे तो आजकल रावण को उसके अहंकार और उसकी जिद के लिये ही स्‍मरण किया जाता है। परंतु क्‍या यह बात आपको पता है कि प्राचीन काल में उसको उसकी घोर तपस्‍या के लिये ही जाना जाता था।

ऐसी घोर तपस्‍या के बाद वरदान पाने के फलस्‍वरूप ही रावण तीनों लोकों का स्‍वामी बन पाने में कामयाब रहा। रावण की यह सबसे बड़ी खासियत थी कि वह एक से बढ़ कर एक राजा को हराकर उनका साम्राज्‍य अपनी लंका में मिला लेता था।

वह उनकी सेना के कमजोर सैनिकों को मार देता था और उनकी सेना के ताकतवर व वीर योद्धाओं को अपनी सेना में शामिल होने के लिये मजबूर कर देता था। ऐसी ही कई युद्धों को जीतकर रावण ने अपने साम्राज्‍य का विस्‍तार किया था।

पर रोचक बात तो यह है कि रावण केवल उसी राज्‍य के साम्राज्‍य को ही हथियाता था जिससे उसके साम्राज्‍य को कोई लाभ मिल सके। या फिर उस राज्‍य की धन दौलत अपार हो या फिर उस राज्‍य की रानियाँ और राजकुमारियाँ बहुत सुंदर हों।

इसके साथ ही उस साम्राज्य की जमीन बंजर भी न हों। और यदि रावण के वीर योद्धा इन बातों के खिलाफ जाकर किसी साम्राज्‍य को जीत लेते थे तो रावण कतई ऐसे साम्राज्य को नहीं अपनाता था।


(2). महाज्ञानी असुर और ब्राह्मण

इसके साथ ही रावण के रूप भी अनेक थे। वह एक असुर होने के साथ ही एक महाज्ञानी पंडित भी था। कई लोग आज भी रावण को एक राक्षस मानते हैं तो वहीं कई लोग उसे ब्राह्मण के रूप में भी मानते हैं।

लेकिन सच तो यह है कि न तो रावण कोई राक्षस था और न ही कोई ब्राह्मण। बात तो यह है कि रावण के पिता तो एक ब्राह्मण थे परंतु उसकी माता एक राक्षसी थी। तो रावण को एक ब्रह्मराक्षस कहना ही उचित होगा।

रावण की माता कैकसी ने अशुभ समय पर गर्भ धारण किया था। यही कारण था कि उसकी कोख से रावण और कुंभकर्ण जैसे असुर पैदा हुए।


(3). परम शिवभक्‍

Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me

आप को बता दें कि रावण शिवजी का बहुत ही बड़ा भक्‍त था। कहा तो यह भी जाता है कि उस समय रावण से बड़ा शिवभक्‍त तो कोई था ही नहीं। यही कारण था कि वह चाहता था कि वह शिव जी को लंका में रखेगा और उसने देखते ही देखते पूरे कैलाश पर्वत को ही उठा लिया।

यह देखकर शिव जी को बड़ा क्रोध आया। शिवजी ने अपना दाँया पैर कैलाश पर रख दिया जिससे कैलाश पर्वत अपने स्‍थान पर वापिस आ गया और रावण का एक हाथ कैलाश के नीचे ही दब गया।

परंतु रावण दर्द में कराहने के स्‍थान पर जोर जोर से शिव तांडव करने लगा। इस तांडव को जब शिवजी ने देखा तो वे सोचने लगे कि भला इस दर्द की अवस्‍था में भी कोई शिव तांडव कैसे कर सकता है।

रावण के इसी कृत्‍य को देखकर दशानन का नाम रावण पड़ गया जिसका अर्थ होता है “जोर जोर से दहाड़ना”



(4). कुशल शासक

यह भी कहा जाता है कि रावण ने लंका को अपने सौतेले भाई कुबेर से बलपूर्वक हथिया लिया था। और कमाल की बात तो यह है कि रावण ने जब लंका पर शासन किया तो लोगों ने कुबेर से ज्‍यादा रावण के शासन को पसंद किया।

श्रीलंका में तो आज भी रावण को भगवान की तरह पूजा जाता है। श्रीलंका के अलावा भारत में भी कई स्‍थानों पर रावण को जलाया नहीं जाता बल्कि भगवान श्रीराम की तरह पूजा जाता है। यदि आप वह मंदिर देखना चाहते हैं तो कानपुर में कैलाश मंदिर है जो सिर्फ दशहरे के दिन ही खुलता है।

कमाल की बात तो यह है कि जैसे ही रावण को जलाया जाता है उससे पहले ही इस मंदिर को बंद कर दिया जाता है। और फिर इसे अगले दशहरे पर ही खोला जाता है।


(5). अपार धन संपदा और दिव्‍य शक्तियों का स्‍वामी

Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me

दोस्‍तों, रावण इतना सारज्ञानी था कि उसके पास सभी प्रकार के वेदों और शास्‍त्रों का ज्ञान था। उसके दस मायावी सिर उसके अद्भुत शक्तियों को दर्शाते थे। उसकी उच्‍च दर्जे की नीतियाँ उसके साहस को दर्शाती थीं।

उस समय जितने भी राजा और योद्धा थे उन सबसे रावण हमेशा ही आगे रहता था। उस समय तो किसी भी राजा के पास कोई विमान नहीं था पर रावण के पास तो कई सारे पुष्‍पक विमान थे। ये सभी पुष्‍पक विमान रावण ने अपने सौतेले भाई कुबेर से हथियाये थे।

और ये सारे पुष्‍पक विमान स्वयं ब्रह्मा जी ने कुबेर को दिये थे। इन पुष्‍पक विमानों की एक खास बात यह थी कि इनको अपनी इच्‍छानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता था। और इन विमानो की गति को भी अपनी इच्‍छा के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता था।

आपको बता दें कि रावण ने इन विमानों के लिये चार हवाई अड्डे भी बनवाये थे। पहला हवाई अड्डा था तोतूपोला काण्‍डा, दूसरा गुरूलूपोथा, तीसरा वारियापोला और चौथा था उसानगोडा। दोस्‍तों चौथे हवाई अड्डे को तो हनुमान जी ने लंका दहन के समय जला कर नष्‍ट कर दिया था।

रावण की 11 ऐसी बातें जो टी.वी. रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! रावण की 11 अच्छी बातें जो टी.वी. रामायण में छुपाई गई | Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me


(6). दूरदर्शी राजा

जब हनुमान जी लंका दहन कर रहे थे तो रावण के बेटे मेघनाथ ने छोटे भाई अक्षय को हनुमान जी से लड़ने के लिये भेज दिया था। और उससे बोला कि तुम्‍हें अपने आप को साबित करने का इससे अच्‍छा अवसर नहीं मिलेगा।

अक्षय भी हनुमान जी से लड़ने के लिये मैदान में उतर गया। पर यह बात रावण को भली-भाँति पता थी कि अक्षय, हनुमान जी को नहीं हरा पायेगा। इसीलिये रावण ने अक्षय को कई बार रोका पर वह नहीं रुका।

वह हनुमान जी के साथ बहुत ही बहादुरी से लड़ा और लड़ने से पहले हनुमान जी ने भी उसे कई बार चेतावनी भी दी। पर उसने हनुमान जी की एक न सुनी और अंत में हनुमान जी ने उसका संहार कर दिया। इससे रावण को बहुत क्रोध आया पर उसने यह सब पहले ही भांप लिया था।



(7). अद्भुत स्‍मरण शक्ति का स्‍वामी

अब अगर बात करें रावण की स्‍मृति की तो आप सोच कर हैरान रह जाएँगे कि रावण जो कोई ग्रन्‍थ या पुस्‍तक एक बार पढ़ लेता था तो वह उसे कभी भी भूलता नहीं था। इसीलिये रावण ने अपने जीवन काल में कई पौराणिक ग्रन्‍थ और किताबें लिखीं।

“लाल किताब” भी रावण के द्वारा ही लिखी गयी है जिसमें लिखी गयी बातें आज भी सच ही हैं। इस किताब में सामुद्रिक शास्‍त्र, हस्‍त रेखा, और जन्‍म कुण्‍डली के बारे में विस्‍तार से लिखा गया है। आजकल के बाबा लोग आम जनों को लूटने के लिये इस किताब का काफी इस्‍तेमाल करते हैं।

रावण की 11 ऐसी बातें जो टी.वी. रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! रावण की 11 अच्छी बातें जो टी.वी. रामायण में छुपाई गई | Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me


(8). शक्तिशाली और बुद्धिमान राजा

मित्रों रावण जितना बुद्धिमान था उतना ही अधिक शक्तिशाली भी था। इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब रावण के बेटे मेघनाथ या इंद्रजीत का जन्‍म हो रहा था तो रावण ने सभी ग्रहों के ग्‍यारहवें स्‍थान पर जाने का आदेश दे दिया। ऐसा करने से रावण का पुत्र मेघनाथ अमर हो जाता।

परंतु ऐसा संभव नहीं हो पाया क्‍योंकि शनिदेव ने अंतिम समय में अपनी चाल बदल ली थी। इसी के चलते क्रोध में आकर शनिदेव को रावण ने बंदी बना लिया था।

रावण इतना शक्तिशाली था कि न केवल शनिदेव अपितु लगभग सभी देवों को रावण ने अपने शक्ति व पराक्रम के दम पर अपना बंदी बना लिया था। इंद्रदेव भी इससे अछूते नहीं रहे थे। एक बार की बात तो यह है कि रावण ने स्‍वयं यमराज को भी युद्ध के लिये ललकार दिया था।



(9). अमरता की कहानी

दोस्‍तों यह तो आप समझ ही गये होंगे कि रावण कितना शक्तिशाली था। परंतु इसके बावजूद भी वह अमर होना चाहता था। और अमर होने के साथ ही वह पूरी दुनिया को जीतकर सिर्फ राक्षसराज को ही फैलाना चाहता था।

अमर होने के लिये रावण ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्‍या की थी। रावण कई वर्षों तक इस तपस्‍या में लीन रहा था। इसके बाद रावण की इस तपस्‍या को देखते हुए ब्रह्मा जी भी प्रसन्‍न हो गये। तब रावण ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान माँगा।

तब ब्रह्मा जी ने कहा कि वरदान तो तुम्‍हें अमरता का मिलेगा परंतु तुम्‍हारे प्राण तुम्‍हारी नाभि में उपस्थित होंगे। तुम्‍हारी नाभि में अमृत होगा और कोई देवता तुम्‍हारा अंत नहीं कर सकेगा। इसी कारण से जब राम और रावण का युद्ध हो रहा था तो शुरू में रावण, श्रीराम की सेना पर भारी पड़ रहा था।

परंतु रावण के छोटे भाई विभीषण ने नाभि में अमृत होने की बात श्रीराम के समक्ष उजागर कर दी थी। इसके बाद ही राम के हाथों रावण की मृत्‍यु संभव हो पाई थी।


(10). जय और विजय से संबंध और भगवान विष्‍णु के पहरेदार

ऐसा कई पौराणिक कथाओं में यह भी बताया गया है कि रावण को पता था कि उसका वध भगवान विष्‍णु के अवतार के हाथों ही होगा। और तभी जाकर उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। ऐसा ही एक लोककथा में बताया गया है कि रावण और कुम्‍भकर्ण पहले के समय में भगवान विष्‍णु के पहरेदार हुआ करते थे।

इनके नाम जय और विजय हुआ करते थे। चूँकि ये दोनों भगवान विष्‍णु के काफी निकट थे तो इनमें अहंकार भी कूट कूट कर भरने लगा था। एक दिन की बात है कि कुछ ऋषि भगवान विष्‍णु से मिलने के लिये आये परंतु इन दोनों ने उन ऋषियों को डराकर भगा दिया।

यह देखकर उन ऋषियों ने इन दोनों को श्राप दे दिया और कहा कि अब तुम दोनों विष्‍णु जी से जुड़े नहीं रहोगे। इसके बाद वे दोनों उन ऋषियों से माफी माँगने लगे।

फिर अंत में उन ऋषियों ने कहा कि तुम दोनों अगले जन्म में भगवान विष्‍णु के अवतार के दुश्‍मन बनोगे। और जैसे उनका अगला जन्‍म हुआ तो वे रावण और कुम्‍भकर्ण बनकर पैदा हो गये। और तभी वे श्रीराम के दुश्‍मन भी बने।

रावण की 11 ऐसी बातें जो टी.वी. रामायण में भी नहीं दिखायी गयीं! रावण की 11 अच्छी बातें जो टी.वी. रामायण में छुपाई गई | Ravan Ke Bare Mein Jankari Hindi Me



(11). सर्वविजय यज्ञ

युद्ध मे जब श्रीराम की सेना रावण की मायावी सेना पर भारी पड़ने लगी थी तो रावण घबराने लगा था। उसे अपनी हार सामने दिखने लगी थी। तभी रावण ने सोचा और विचारा कि वह युद्ध में कभी न हारने वाला यज्ञ करेगा।

परंतु इस यज्ञ की खासियत यह थी कि उसे करने वाला एक ही स्‍थान पर बैठकर यज्ञ पूरा करेगा। और तब तक उस स्‍थान से नहीं हटना होगा जब तक कि यज्ञ पूरा न हो जाऐ। रावण ने यह यज्ञ शुरू कर दिया।

परंतु जैसे ही श्रीराम को इस यज्ञ के बारे में पता चला तो श्रीराम ने उस यज्ञ को भंग करने के लिये अपनी वानर सेना को भेज दिया लेकिन राम जी की वानर सेना भी रावण को उस यज्ञ से नहीं हटा पायी। ऐसा होते देखकर बाली पुत्र अंगद ने मंदोदरी को बंदी बना लिया।

लेकिन इसके बावजूद भी रावण उस यज्ञ से टस से मस न हुआ। तब मंदोदरी ने कहा कि श्रीराम अपनी पत्‍नी को बचाने के लिये इतना बड़ा युद्ध लड़ रहे हैं और आप अपनी पत्‍नी को बचाने के लिये यज्ञ से हिल भी नहीं सकते।

यह सुनकर रावण उस यज्ञ से हट गया जिस यज्ञ के पूर्ण होने पर वह न केवल राम, हनुमान और सम्‍पूर्ण वानर सेना को परास्‍त कर सकता था। परंतु ऐसा संभव नहीं हो पाया और अंत में रावण का पूरा साम्राज्‍य तहस नहस हो गया। अंत में श्रीराम ने इस युद्ध में विजय पायी।


तो दोस्‍तों ये रावण से जुड़ी वे बातें हैं जिनमें आज भी लोग दिलचस्‍पी लेते हैं। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्‍तों के साथ शेयर अवश्‍य करें। लाइक करना ना भूलें। कोई राय आप देना चाहें तो नीचे कॉमेण्‍ट सेक्‍शन में दे सकते हैं।

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *