विषय भोग करने वाले सावधान || Sex Ke Niyam || समागम के आठ प्राचीन नियम || Sex Rules

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विषय भोग करने वाले सावधान || Sex Ke Niyam || समागम के आठ प्राचीन निमय || Sex Rules।। शास्त्र के अनुसार

विषय भोग करने वाले सावधान || Sex Ke Niyam || समागम / सहवास के आठ प्राचीन नियम || Sex Rules।। शास्त्र के अनुसार

Sex Ke Niyam || समागम / सहवास के आठ प्राचीन नियम
Sex Ke Niyam || समागम / सहवास के आठ प्राचीन नियम

दोस्तों आज से हजारों वर्ष पूर्व नंदी ने भगवान शिव तथा माता पार्वती के पवित्र प्रेम पूर्ण संवादों को सुनकर शारीरिक भोग के लिए एक ऐसे शास्त्र की रचना की थी जिसके आधार पर संसार के समस्त दंपत्ति प्रेम के सागर में डूब कर चरम सुख को प्राप्त कर सकते हैं।

वैसे इसी क्रम में आज हम आपको काम शास्त्र में दी गई जानकारियों के आधार पर समागम के 8 ऐसे नियम बताएंगे जिन्हें जानकर आपको यह पता चलेगा कि आपको कब कहां और किस दिन भोग करना चाहिए अथवा नहीं। तो चलिए शुरू करते हैं



समागम / सहवास के आठ प्राचीन नियम || Sex Ke 8 Prachin Niyam


(1). अपान वायु संतुलन

दोस्तों आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में पांच प्रकार की वायु रहती है जिन्हें व्यान, सामान, अपान, उडान और प्राण कहा जाता है।

इसमें अपान वायु का कार्य शरीर से मल मूत्र शुक्र को बाहर निकालने का होता है और यही वायु पुरुषों में वीर्य तथा महिलाओं में रज की उत्पत्ति तथा निकासी के लिए जिम्मेदार होती है।

यदि आसान शब्दों में कहें तो इसी के बल पर मनुष्य आनंद पूर्ण समागम तथा तेजस्वी संतान को प्राप्त कर सकता है। किंतु जब इस वायु की गति में फर्क आता है अथवा यह किसी प्रकार से दूषित हो जाती है तो इससे मूत्राशय संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं।

इतना ही नहीं इसके प्रभावित होने से एक ओर इससे पुरुषों में नपुंसकता आती है जबकि वहीं दूसरी ओर महिलाओं में कमजोर जनन क्षमता तथा अनियमित महावारी का कारण बनती है।

अतः दोस्तों यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपने उदर को संतुलित रखें अर्थात स्वास्थ्यवर्धक भोजन, योग, प्राणायाम, ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करें ताकि आपकी अपान वायु समुचित ढंग से कार्य करें और आपको आरामदायक जीवन की प्राप्ति हो सके।



(2). स्त्रियों को काम की शिक्षा देना

दोस्तों हमारे देश में प्राचीन काल से ही महिलाओं को घुंघट में रखा गया जिसके कारण उनमें लज्जा का भाव घर कर गया। और इसी लज्जा के कारण आज भी कई महिलाओं को शारीरिक संबंधों को लेकर कुछ कड़वे अनुभव से होकर गुजरना पड़ता है।

संभवत इसी बात को ध्यान में रखते हुए आचार्य वात्स्यायन का कहना है कि स्त्रियों को काम शास्त्र का ज्ञान होना बेहद जरूरी है।

वे कहते हैं कि कन्या को विवाह के पहले पिता के घर में और विवाह के पश्चात पति की अनुमति से यह शिक्षा किसी दाई विवाहिता, सखी, हम उम्र, मौसी, बड़ी बहन है या दासी या भाभी जी आदि से लेनी चाहिए।

महर्षि का मत है कि स्त्रियों को बिस्तर पर अच्‍छी तरह व्यवहार करना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता बनी रहती है और पति किसी और की तरफ आकर्षित नहीं हो पाता है।

कहते हैं कि कोई भी स्त्री जो काम कला में निपुण है वह अपने पति को प्रेम पास में बांधकर रख सकती है। Sex Ke 8 Prachin Niyam


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(3). विशेष त्‍योहारों पर परहेज

दोस्तों हमारे हिंदू धर्म में मुहूर्त का बड़ा ही महत्व है। जिस प्रकार से किसी भी कार्य को करने के लिए उचित समय निर्धारित किया जाता है ठीक उसी प्रकार से माह में कुछ दिन ऐसे होते हैं जिस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।

इनमें अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्थी, अष्टमी, रविवार, संक्रांति, संधि काल, श्राद्ध पक्ष, नवरात्रि, श्रावण मास और इत्यादि सम्मिलित है। इनका पालन करने से घर में सुख शांति समृद्धि और आपसी प्रेम बना रहता है।

अन्यथा जो लोग इन दिनों की महत्ता को नहीं समझते हैं उन्हें धन की हानि तथा विभिन्न प्रकार की आकस्मिक घटनाओं से जूझना पड़ता है।



(4). दिन अथवा रात्रि कब करें?

दोस्तों बहुत से लोग काम के रस में डूबे रहते हैं और अवसर मिलने पर किसी भी समय कर लेते हैं लेकिन काम शास्त्र में रात्रि के समय समागम करना सबसे उपयुक्त होता है। फिर भले ही आप समागम आनंद के लिए कर रहे हो अथवा संतान प्राप्ति के लिए।

इतना ही नहीं अपितु इसमें यह भी बताया गया है कि जो दंपति रात्रि के प्रथम प्रहर में रतिक्रिया करते हैं उन्हें भगवान शिव के आशीर्वाद से संस्कारवान सात्विक गुणों से युक्त आज्ञाकारी तथा यशस्वी संतान की प्राप्ति होती है।

किंतु इसके ठीक विपरीत रात्रि के प्रथम प्रहर के बाद मैथुन क्रिया अशुभकारी मानी गई है। कई मामलों में इससे मनुष्य को सुनता मानसिक क्लेश, अनिद्रा आदि का सामना करना पड़ता है। और तो और इससे उत्पन्न संतान भी दुष्ट प्रवृत्ति की होती है।

शास्त्रों में इसकी मुख्य वजह यह बताई गई है कि रात्रि के प्रथम प्रहर के बाद पृथ्वी पर कई प्रकार की नकारात्मक शक्तियां भ्रमण पर निकलती है। जिससे कि गर्भकाल उनकी छाया स्त्री पर पड़ जाती है और संतान में राक्षसी गुण आने के प्रबल योग बनते हैं।



(5). मासिक धर्म के समय

दोस्तों हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने आज से हजारों वर्ष पूर्व संकरण के संबंध में कुछ बहुत ही उन्नत खोजे की थी। और इसी के आधार पर उन्होंने छुआछूत के कुछ अत्यंत ही सटीक नियम बनाए थे इन्हीं में से एक नियम था मासिक धर्म का।

चंद्रमा के 28 दिनों के चक्र में प्रत्येक महिला की योनि से कुछ ऐसे तत्वों का स्त्राव होता है जो पुरुषों के लिए अत्यंत घातक अर्थात विष समान मानी गई है।

ऐसे में यदि कोई पुरुष संबंध बनाता है तो उसके भी संक्रमित हो जाने का खतरा बढ़ जाता है। अतः दोस्तों यदि आप स्वयं तथा अपने साथी को किसी प्रकार के रोग से बचाना चाहते हैं तो समागम के लिए माह के इन मुख्‍य दिनों का त्याग करें।

इतना ही नहीं समागम के पूर्व तथा पश्चात अपनी इंद्रियों को अच्छे से साफ करें और यदि इंद्री में किसी प्रकार की गंदगी है तो समागम से परहेज करें।



(6). जबरदस्‍ती संबंध बनाना 

दोस्तों सेक्‍स का संबंध मनुष्य के तन से मन से अधिक होता है। यदि किसी दशा में आपका साथी आपसे मित्रवत व्यवहार ना करें अथवा वह किसी बात को लेकर उदास है या संभोग को लेकर सहमत है तो आप उसके साथ जबरदस्ती संबंध नहीं बनाने चाहिए।

ऐसी दशा में आपको उचित समय आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो समय आने पर स्‍वत: ही घटित होती है। अतः इसके लिए आपको किसी प्रकार का बल लगाने की आवश्यकता नहीं है।



(7). सार्वजनिक स्‍थानों पर संबंध बनाना

दोस्तों कुछ स्थानों की उर्जा आम स्थानों की वजह से थोड़ी भिन्न होती है जो हम मनुष्यों पर किसी विशेष अवस्था में बड़ा ही विचित्र प्रभाव डालती है।

संभवत: इसी बात को ध्यान में रखते हुए कुछ स्थानों पर समागम करने की सख्त मनाही है। इनमें पवित्र माने गए वृक्षों के नीचे, सार्वजनिक स्थान, चौराहे, उद्दान, श्मशान स्थल, चिकित्सालय, मंदिर तथा विद्यालय प्रमुख हैं।



(8). गर्भधारण के पश्‍चात संबंध बनाना

दोस्तों बहुत से दंपती कामवासना में रत रहते हैं और भरपूर ढंग से जीवन का आनंद उठाना चाहते हैं। और देखा जाए तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है।

जब प्रकृति ने आपको भूख की शक्ति प्रदान की है तो भोगने में कोई बुराई नहीं है। किंतु फिर भी हमारे शास्त्रों में गर्भ काल के समय संभोग करने की सख्त मनाही है।

विशेषकर गर्भधारण के 2 माह के बाद परंतु फिर भी यदि कोई दंपत्ति ऐसा करने से बाज नहीं आता है तो इसी दशा में संतान के रोगी पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।

इतना ही नहीं अपितु ऐसी संतान आगे चलकर स्वभाव से कामी हो जाती है जिसके लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना असंभव होता है। इसका सीधा प्रभाव उसके दांपत्य जीवन पर पड़ता है।



तो दोस्तों यह समागम के 8 नियम जिनका पालन संसार के प्रत्येक दंपत्ति को पूरी निष्ठा से करना चाहिए। इसी के साथ हमारी यह जानकारी भी यहीं समाप्त हुई आशा करते हैं आपको यह जरूर अच्छी लगी होगी।

इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें और आपसे आप हमें फेसबुक पर फॉलो करना ना भूलें। आप सभी दोस्तों का बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

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