Sikandar Ne Marte Waqt Kya Kaha || सिकंदर ने मरते वक्‍त क्‍या कहा ?

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Sikandar Ne Marte Waqt Kya Kaha || सिकंदर ने मरते वक्‍त क्‍या कहा ?

Sikandar Ne Marte Waqt Kya Kaha || सिकंदर ने मरते वक्‍त क्‍या कहा ? || Last Three Wishes Of Alexander The Great

हम सभी स‍िकंदर महान के बारे में परिचित हैं। दुनिया के एक छोटे से मुल्‍क मेसेडोनिया का सम्राट दुनिया फतेह करने के अपने उद्देश्‍य से कत्‍ले आम मचा देता है।

वह तो बस एक ही सपना देखता था और वह सपना था कि सूर्य उदय होने के स्‍थान से लेकर सूर्य अस्‍त होने तक बस सिकंदर का शासन हो। इसी कारण उसका सामना भारतीय महान राजा पोरस से होता है।

अंत में सिकंंदर को भारत छोड़ना पड़ता है। परंतु क्‍या आप जानते हैं कि महान एलेक्‍जेंंडर ने अपनी मृत्‍यु समीप आने पर क्‍या अनूठी ख्‍वाहिशें रखीं? Sikandar Ne Marte Waqt Kya Kaha ? क्‍या थीं Alexander’s last three wishes

Sikandar Ne Marte Waqt Kya Kaha



Sikandar Ki 3 Antim Ichha || सिकंदर की तीन बातें

अपनी मृत्यु का समय नजदीक होने पर सिकंदर  महान Alexander the great ने अपने सभी घनिष्‍ठ सेनापतियों को बुलाया और कहा, कि तुम सब मेरी मृत्यु के पश्‍चात मेरी अंतिम तीन इच्छाओं को अवश्‍य पूरा करोगे।

(1). मेरी पहली ख्‍वाहिश है कि  केवल मेरे चिकित्‍सक और हकीम ही मेरे ताबूत को ले जाएंगे।

(2). दूसरी इच्‍छा है कि मेरे खजाने में रखे सोने, चाँदी और अन्य कीमती पत्थरों को उस रास्‍ते पर बिखेरा जाये, जिस पर मेरा ताबूत कब्रिस्तान तक ले जाया जाये।

(3). मेरी तीसरी और अंतिम इच्‍छा है कि मुझे अपना हाथ ताबूत से बाहर ले जाते हुए अपने हाथों को ताबूत से बाहर की ओर लटकाना होगा।” ऐसा इसलिये ताकि लोगो का लगे कि मृत्‍युु के बाद आप कुछ भी अपने साथ नहीं ले जा सकते।

उसकी मृत्यु पर उपस्थित लोग सिकंदर महान के इस अजीब इरादे पर चकित थे। लेकिन किसी ने भी उससे इसके बारे में कुछ पूछने की हिम्मत नहीं की।

तब उसके पसंदीदा सेना अध्‍यक्षों में से एक बोला, ‘हे महामहिम, निश्चित रूप से अपने सभी इरादों को पूरा किया जाएगा। उसने ऐलेक्‍सेंडर द ग्रेट Alexander the great का हाथ उठाया और उसे चूमा। लेकिन आपने अपने अंतिम समय पर यह अजीब इरादा क्यों व्यक्त किया?



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एक गहरी सांस लेते हुए, सिकंदर ने कहा, मैं, Alexander  दुनिया के सामने तीन सबक छोड़ना चाहता हूं। मैंने अपने हकीमों को ताबूत ले जाने के लिए कहा है ताकि लोगों को एहसास हो सके कि हकीम वास्तव में किसी व्यक्ति का इलाज नहीं कर सकते हैं। वे शक्तिहीन हैं और किसी को भी मौत के चंगुल से किसी काेे बचाने में असमर्थ हैं।

कब्रिस्तान के रास्ते में, मैंने लोगों को सोने और अनाज को तितर बितर करने के लिए कहा, यह दिखाने के लिए कि सोने का एक भी कण मेरे साथ नहीं जाएगा। मैंने अपना पूरा जीवन इन्हीं को पाने में बिताया है, लेकिन मैं अपने साथ कुछ नहीं ले जा सकता। लोगों को यह समझने दें कि धन के बाद दौड़ना सिर्फ समय की बर्बादी है।

मैंने ताबूत के बाहर अपने हाथ फैलाने के लिए कहा है ताकि लोगों को पता चल सके कि मैं इस दुनिया को खाली हाथ इस दुनिया को छोड़कर आया हूं।
कई लोग इस कहानी को एक बच्चे के रूप में कहानी की किताबों मेें पढ़ते हैं। लेकिन हमें इस कहानी का सही अर्थ आज समझ में आया।


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