सुग्रीव की रहस्यमय गुफा – वैज्ञानिकों के होश उड़ गए – Sugriv cave mystery

Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

सुग्रीव की रहस्यमय गुफा – वैज्ञानिकों के होश उड़ गए – Sugriv cave mystery

सुग्रीव की रहस्यमय गुफा – अंदर का नजारा देख कर वैज्ञानिकों के होश उड़ गए – Sugriv cave mystery

Sugriv cave mystery
Sugriv cave mystery

दोस्‍तों क्‍या आप एक रहस्‍यमयी गुफा के बारे में जानते हैं? जी हां, हमारे भारत में एक ऐसी जगह है जहां आज भी रामायण काल की सुग्रीव की गुफा मौजूद है।

रामायण काल के अवशेषों को खोजते खोजते हमारे भारत के शोधकर्ताओं को एक ऐसी गुफा मिली जो सामान्य लग रही थी।

परंतु जब इसके अंदर गए तब ही कुछ ऐसा दिखा जिसे देखते ही वह समझ गए कि यह कोई सामान्य ज्ञान नहीं है बल्कि रामायण काल की समय की गुफा है।

यह वही गुफा है जहां सुग्रीव आपने बड़े भाई बाली से छुप कर रहा करते थे। दोस्तों वैसे तो विज्ञान जगत रामायण के होने पर संदेह करता है।

परंतु इस गुफा के अंदर एक साइन बोर्ड लगा है जहां साफ तौर पर लिखा है कि यह सुग्रीव की गुफा है। दोस्तों आपको जानकार और भी आश्चर्य होगा कि इस गुफा की खोज कोशिशों को सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है।


Cheston 10mm Powerful Drill Machine for Wall, Metal, Wood Drilling with 5 pcs Wall bits for Brick Wall Drilling 

परंतु क्यों इसका जवाब किसी के पास नहीं है। आखिर शोधकर्ताओं को इस गुफा के अंदर ऐसा क्या दिखा जिसे देखते ही वह समझ गए की गुफा सुग्रीव की गुफा है।

आखिर क्‍यों इस गुफा को आम लोगों के लिए बंद कर दिया। आखिर इस गुफा में ऐसा क्या था जहां बाली प्रवेश नहीं कर सकता था।

अंत में आखिर क्या है इन सब के पीछे का रहस्य। इस रहस्‍य को जानने के लिए इस पोस्‍ट को ध्यान से पढि़येगा।

रामायण में जितने भी चरित्रों का उल्लेख है उन सभी की भूमिका अपने आप में महत्वपूर्ण है।

राजा दशरथ सहित तीनों माता हैं, गुरु वशिष्ठ, निषादराज, राजा जनक, विभीषण, अंगद इत्यादि जितने व्यक्तित्व रामकथा से जुड़े हैं सभी अपनी अपनी भूमिका में महत्वपूर्ण लगते हैं।

इन्हीं में से एक है सुग्रीव, किष्किंधा के राजा और प्रभु राम के मित्र। रावण द्वारा सीता हरण के बाद उनकी तलाश के दौरान ऋषिमुख पर्वत पर प्रभु राम की सुग्रीव से भेंट होती है। 

यहीं पर भगवान राम को सुग्रीव पर उसके भाई बाली द्वारा किए गए अत्याचारों का पता चलता है।



भगवान राम सुग्रीव को अपना मित्र मानकर उन्हें बाली के तरफ से मुक्त करवाने का वचन देते हैं और उन्हें किष्किंधा का राजा घोषित करते हैं माना जाता है कि रामायण में जिसका उल्लेख है वह कर्नाटक प्रदेश के हम्पी शहर में है।

हम्पी प्रसिद्ध विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था यहीं पर वानर सुग्रीव और बाली की राजधानी किष्किंधा थी। गुफा और उसके आसपास के क्षेत्र में आज भी रामायण की कथा राम जी के आगमन की खोज की गई थी।

हालांकि किसी को तब पता नहीं था कि यह जगह रामायण काल के विशेष चरित्र से जुड़ी है जिसमें से एक हैं सुग्रीव। यहां मौजूद की गुफा विभिन्न प्रसंगों से जुड़े कई राज अपने अंदर रखी हुई है।

बरसों पहले इस जगह की खोज की गई थी तब यहां पर हम्‍पी नगरी बसी थी। हम्‍पी और उसके आसपास के क्षेत्र में आज भी रामायण की विभिन्न प्रसंगों से जुड़े कई स्थल और यह राम जी के आगमन के साक्षी है।

वर्षों पहले इस जगह की खोज की गई थी तभी पता नहीं था कि यह जगह रामायण काल से जुड़ी है। ऋषि मुख पर्वत पर रामायण काल के अवशेष भारी पड़े हैं जिसमें से एक है यहां मौजूद सुग्रीव की गुफा।



शोधकर्ताओं ने जब इस गुफा के अंदर प्रवेश किया तब उन्होंने देखा कि इस गुफा की बनावट और यहां मौजूद चिन्ह और ऐसे कई प्रमाण मौजूद है जो रामायण काल की गुफा से मिलते जुलते हैं।

उन्होंने और शोध करने का निर्णय लिया और रामायण से मिलाकर देखा तो यह सिद्ध हो गया कि यह वही जगह है जहां भगवान राम आए थे और उन्होंने सुग्रीव से इसी गुफा में भेंट की थी।

रामायण में वर्णित प्रश्न के अनुसार बाली से विवाद के कारण जब सुग्रीव को छोड़कर भागना पड़ा अपने सहयोगियों के साथ इसी स्थान पर आए। कथा यह है कि इसी ऋषि मुख पर्वत पर ऋषि का आश्रम था।

एक समय अपने आश्रम को पवित्र करने के कारण बाली को श्राप दे दिया था। उसी श्राप के अनुसार जैसे ही इस क्षेत्र में प्रवेश करेगा उसकी मृत्यु हो जाएगी।

यही कारण था कि सुग्रीव के लिए छिपने की दृष्टि से यह स्थान सबसे उपयुक्त था। इस गुफा में श्रीराम रहे और आज भी जिनकी पूजा की जाती है। ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो रामायण से जुड़ी है।


Also Read – पढ़ें और भी रोच‍क कहानियां


यहां कुछ ऐसे भी गुफाएं हैं जो सरकार द्वारा बंद कर दी गई है परंतु क्यों इसका सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। तुंगभद्रा नदी के तट पर बसा यह क्षेत्र बहुत ही मनोरम है।

यहां आज भी ऐसा प्रतीत होता है जैसे रामायण के कालखंड में आ गए हों। यहां की भौगोलिक दृश्य में आज भी अधिक परिवर्तन नहीं आया है।

दोस्‍तों अगर यह जानकारी आपको पसंद आए तो इसको अपने सभी दोस्‍तों के साथ शेयर अवश्‍य करें। धन्‍यवाद!


Please follow and like us:
0
20
Pin Share20

Add a Comment

Your email address will not be published.