The Cursed Temple of Kiradu – किराडू का श्रापित मंदिर – What is the Curse

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The Cursed Temple of Kiradu – किराडू का श्रापित मंदिर – What is the Curse?

The CURSED Temple of Kiradu – किराडू का श्रापित मंदिर – What is the CURSE – kiradu temple story in hindi

CURSED Temple of Kiradu


दोस्‍तों हमारा देश भारत विभिन्‍न संस्‍कृतियों और परंपराओं की भूमि है। यही कारण है कि हमारे देश के कोने कोने में आपको इनसे जुड़े स्‍थल और कहानियां मिल जायेंगी जो कि बहुत ही इंट्रेस्टिंग होती हैं।

तो आज हम आपको राजस्‍थान जिले के बारमेढ़ जिले से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से शहर किराड़ू के बारे में बतायेंगे।

यहां के मंदिर को लोगों द्वारा श्रापित माना जाता है। दरअसल यह शहर क्षेत्रफल की दृष्टि से इतना छोटा है कि लोग यहां के बारे में न के बराबर ही जानते हैं।

परमार वंश के राजा दूषण ने किराडू में लगभग 108 मंदिरों का निर्माण करवाया। परंतु इतने आक्रमण हुए कि केवल 5 मंदिर ही अब तक बच पाये हैं। इन्‍हीं मंदिरो में से एक है किराडू का श्रापित मंदिर इसे ही The Cursed Temple of Kiradu  बोला जाता है।

अब यह तो बोलने में कोई दो राय नहीं हैं कि कोई भी पुराना स्‍मारक होगा तो उससे कोई ना कोई पौराणिक कहानी अवश्‍य जुड़ी होगी। तो किराडू मंदिर की भी अपनी एक कहानी है जिसके अनुसार यह मंदिर श्रापित माना जाता है। The CURSED Temple of Kiradu

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इससे पहले कि हम आपको इसकी पूरी कहानी बतायें, उससे पहले वहां के स्‍थानीय लोगों के द्वारा कही जाने वाली बातों के बारे में भी आपको बताते हैं।

स्‍थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के आस-पास रात के समय विचित्र सी आकृतियां दिखाई देती हैं। इसके साथ ही लोगों को वहां पर तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। लोगों के अनुसार रात को मंदिर के पास वाले रास्‍ते से गुजरना भी सुरक्षित नहीं है।

अगर ऐसा किया तो दुर्भाग्‍य आपके पीछे पड़ जायेगा। बुजुर्ग लोगों के अनुसार तो कई लोग जो रात को उस मंदिर के पास से गुजर वो या तो बीमार पड़ गये, उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी या फिर वे किसी ना किसी दुर्घटना का शिकार हो गये।

पर इन सभी किंव‍दंतियों में एक ही चीज है जो कॉमन है और वह है रात का समय। यह समय इस मंदिर के श्रापित होने की कहानी से जुड़ा हुआ है।


कहानी नंबर 1.

ऐसा माना जाता है कि बारहवीं शताब्‍दी में परमार वंश के राजा सोमेश्‍वर ने एक महर्षि को अपने दरबार में आमंत्रित किया था। उनका आशय राज्‍य की सुख और समृद्धि को बढ़ाने वाली पूजा-अर्चना करने से था। क्‍योंकि राज्य में उस समय युद्ध के बाद काफी अशांति छायी हुई थी।

इसके बाद ऋषि और मुनियों ने अपने चेलों समेत कई पूजा पाठ और हवन आदि किये। कई दिनों तक उनकी तपस्‍या चली। जब पूजा समाप्‍त हो गयी तो सभी ऋषि और मुनि अपने अपने स्‍थान को चले गये परंतु उस राज्‍य मे एक चेले को छोड़ दिया ताकि वह वहां पर पूजा जारी रख सके और राज्‍य मे शांति बनी रहे।

इस बड़ी पूजा का प्रभाव भी कुछ ऐसा रहा कि लोगो में शांति बनी रही और राज्य की तरक्‍की भी होने लगी। किंतु राजा यह बात तो भूल ही गये कि यह सब तो बस एक पुजारी की निरंतर पूजा और पाठ करने से ही संभव हो सका है।

महर्षि द्वारा छोड़े गये पुजारी तो रात दिन अपनी पूजा में लीन थे परंतु उनकी खैर-खबर लेने वाला तो कोई भी नहीं था। समय गुजरता गया और मौसम ने भी अपना रूप बदल लिया और बरसात की मौसम में वह पुजारी बीमार हो गये।

उन्‍होंने कई बार मदद की गुहार लगायी परंतु उनकी किसी ने एक न सुनी और बीमारी के कारण उनकी मृत्‍यु हो गयी। जब यह बात महर्षि को पता लगी तो वे अपने शिष्‍यों समेत वापस उस राज्‍य के मंदिर में आये और वहां उन्‍हें अपने शिष्‍य का शव मिला।

क्रोध में आकर उन महर्षि ने उस स्‍थान को एक श्राप दे दिया और कहा कि जो कोई भी व्‍यक्ति इस मंदिर से गुजरेगा वह पत्‍थर का हो जायेगा। ऐसा इसलिये क्‍योंकि इस राज्‍य के सभी लोग पत्‍थर दिल हैं।

अब चूँकि महर्षि ने यह श्राप रात के समय दिया था तो इसीलिये जो कोई भी व्‍यक्ति रात के समय इस मंदिर से गुजरता था वह पत्‍थर का हो जाता था। The CURSED Temple of Kiradu


कहानी नंबर 2.

परंतु एक और भी कहानी है जिसमें इस पुजारी की मृत्‍यु नहीं होती है बल्कि एक घर बनाने वाले की पत्नि उस पुजारी की सहायता करती है। पर जब महर्षि अपने शिष्यों समेत अपने पुजारी से मिलने आते हैं तो वे पूरे राज्‍य को ही श्राप दे देते हैं केवल उस महिला के परिवार के जिन्‍होंने पुजारी की सहायता की और उन्‍हें जीवित रखा।

महर्षि ने अपने श्राप में कहा कि शाम तक पूरा राज्‍य पत्‍थर मे तब्दील हो जायेगा। और शाम होने से पहले घर बनाने वाले का परिवार यह राज्‍य छोड़ दे।

किंतु शाम को वह स्‍त्री अपने घर को शहर के बाहर से ही आखिरी बार अपने घर को देखने आती है परंतु ऋषि के श्राप के कारण वह भी पत्‍थर की बन जाती है। यह मूर्ति आज भी शहर के बाहरी हिस्‍से में दिखायी देती है।


कहानी नंबर 3.

परंतु इस कहानी का एक और तीसरा छोर भी है। इस कहानी के अनुसार जब महर्षि अपने शिष्‍यों समेत उस राज्‍य में आये थे तो कुछ लोगों ने उन्‍हें पंचमुखी भिक्षा दी परंतु कुछ लोगों ने उन्‍हें तीन मुखी ही भिक्षा दी।

और इसी कारण से महर्षि क्रोधित हो गये और उन्‍होंने श्राप दे दिया कि शाम तक पूरा राज्‍य पत्‍थर का हो जाये। अब शिष्‍यों ने यह बात उन लोगों को तो बता दी जिन्‍होंने पंचमुखी भिक्षा दी थी परंतु बाकी लोगों को यह बात नहीं बतायी। तो जो लोग बच गये वे पत्‍थर मे तब्‍दील हो गये।

हनुमान जी सिल्‍वर लॉकेट

अब यह कहानी तो बहुत पुरानी है परंतु इसका डर का माहौल तो आज भी है। आज भी लोग इतने भयभीत हैं कि इस मंदिर के आस-पास या मंदिर में रात मे जाने से डरते हैं। आधुनिक काल की बात करें तो किराडू मंदिर अपनी गजब की स्‍थापत्‍य कला के लिये प्रसिद्ध है।

धीरे-धीरे यह एक दर्शनीय स्‍थल में बदल गया है। यहां पर एक भी गाइड ऐसा नहीं है जिसने पर्यटकों को यह कहानियां न सुनाई हों। इस मंदिर का डर इतना ज्‍यादा है कि कोई भी गाइड यहां आपको शाम होने के बाद मंदिर घुमाने के लिये ले जाये।

दिन में तो यहां काफी पर्यटकों की भीड़ रहती है परंतु शाम होने के बाद यह इलाका एक सुनसान वीराना बन जाता है।


क्‍या कहते हैं पैरानॉर्मल एक्‍सपर्ट किराडू के श्रापित मंदिर के बारे में?

बात करें पैरानॉर्मल एक्टिविस्‍ट की तो कई एक्‍सपर्ट यहां पर अपनी रिसर्च करने के लिये आ चुके हैं। इनमें से एक पैरानॉर्मल इन्‍वेस्टिगेशन की थी जय अलानी ने। जय ने कई ऐसी बातें बताईं जो कि उनसे पहले कोई भी नहीं बता पाया।

जय और उनकी टीम को भी वह सारी चीजें अनुभव हुई थीं जो कि उनसे पहले के पैरानॉर्मल एक्‍सपर्ट को भी हुई थीं। जय और उनकी टीम ने कैमरा को कई जगहों पर लगाया और रात के समय अपनी इन्‍वेस्टिगेशन करने का प्रबंध किया। The CURSED Temple of Kiradu

जय ने रात में इस मंदिर में प्रवेश किया और काफी देर हो जाने के बाद भी उन्‍हें कोई भी एनर्जी फील नहीं हुई। इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक वेव डिटेक्‍टर ने तो कुछ वेव्‍स को डिटेक्‍ट किया परंतु जय ने बाद में एक्‍सप्‍लेन किया कि ऐसा वीक रेडियो वेव के कारण भी हो सकता है।

जय के अनुसार ऐसी जगहो पर इन वीक वेव्‍स को डिटेक्‍ट करना नॉर्मल ही है। जय ने कहा कि पैरानॉर्मल एक्टिविटी होने का सबसे बड़ा सुबूत होता है तापमान में गिरावट का आना। मंदिर के खम्‍भे एक विशेष पत्‍थर के बने हुए हैं।

जो कि दिन भर धूप में रहने के कारण गर्म हो जाते हैं। और मंदिर के भीतर धूप नहीं जा पाती है इसीलिये वहां का तापमान कम रहता है। इसीलिये आपको वहां तापमान में अंतर दिखाई पड़ता है।

जय के अनुसार लोग पहले ही अपने दिमाग के भीतर यह सोचकर आते हैं कि यहां उन्‍हें कुछ विचित्र और डरावना अनुभव होने वाला है। इसके अलावा लोग पहले ही इतना डरे हुए होते हैं कि उनका दिमाग हर एक छोटी चीज को बढ़ा-चढ़ाकर पैरानॉर्मल चीजों से जोड़ने लगता है।

वैसे किराड़ू के लोग तो आज भी उन्‍हीं पुरानी किंवदंतियों को ही मानकर चल रहे हैं। मुगलों और अंग्रजों के आक्रमणों से भी इस मंदिर को काफी क्षति पहुँची है परंतु इसकी डरावनी कहानियों ने इस मंदिर को नष्‍ट होने से भी बचाया है और इस मंदिर की रक्ष भी की है।

इस मंदिर के बाहर इसके निर्माण से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं दी गयी है। हालांकि लोग अब सूरज ढलने के बाद भी वहां जाने लगे हैं और समय के साथ लोग अब पुरानी कहानियों को त्‍यागने लगे हैं।


तो दोस्‍तों अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो तो कृपया इसे अपने तक ही सीमित न रखें और इसे अपने मित्रों को भी शेयर अवश्‍य करें। यदि आपका कोई सुझाव या सलाह हो तो कमेण्‍ट बॉक्‍स में अवश्‍य बतायें। धन्यवाद!

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