6 काम ज्यादा देर तक करना मतलब मृत्यु को बुलाना!!! Ye 6 Kaam Jyada Der Tak Na Kare

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6 काम ज्यादा देर तक करना मतलब मृत्यु को बुलाना!!! Ye 6 Kaam Jyada Der Tak Na Kare

6 काम ज्यादा देर तक करना मतलब मृत्यु को बुलाना!!! Ye 6 Kaam Jyada Der Tak Na Kare || ये 6 काम यदि ज्यादा देर तक किये, तो मृत्यु हो जायेगी।। विष्णु पुराण के अनुसार

Ye 6 Kaam Jyada Der Tak Na Kare
Ye 6 Kaam Jyada Der Tak Na Kare

दोस्तों हिंदू पुराणों में अच्छा ज्ञान छुपा है। जरूरत है तो बस इसे ठीक से समझ कर इसका अनुसरण करने की।

वैसे इसी क्रम में आज हम आपको विष्णु पुराण से ली गई 6 ऐसी आदतों के बारे में बताएंगे जो सुनने में तो अति साधारण सी लगती है, किंतु यदि आपने इन आदतों को समय रहते नहीं सुधारा तो यह आदत  आपकी जान तक ले सकती है।

तो चलिए एक बार विस्तार से प्रकाश डालते हैं कि आखिर वे 6 अति महत्वपूर्ण आदतें कौन-कौन सी हैं। 


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नियमित रूप से स्नान


दोस्तों स्वच्छता की दृष्टि से देखा जाए तो एक स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रूप से स्नान करना अनिवार्य है। स्नान करने के अनगिनत लाभ है।

लेकिन दोस्तों आपको बता दें कि स्नान के संदर्भ में विष्णु पुराण कहता है कि किसी भी मनुष्य को ज्यादा देर तक स्नान नहीं करना चाहिए अन्यथा यह आपकी आदत आपके शरीर को लाभ पहुंचाने के स्थान पर आपको हानि पहुंचाती है।

दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे शरीर की संरचना ही कुछ ऐसी है कि अत्यधिक ठंडे माहौल से क्षतिग्रस्त हो जाती है।

इस विषय पर आयुर्वेद कहता है कि ज्‍यादा देर तक स्‍नान करने से शरीर सुस्त पड़ जाता है और परिणाम स्वरुप मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।

हीं काफी लोग निर्वस्त्र होकर स्नान करते हैं। जबकि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि नहाते वक्त हमारे शरीर पर कम से कम एक वस्तु होना जरूरी है।

और तो और श्री कृष्ण ने जो वस्त्र लीला की थी उसमें उन्होंने स्नान कर रही गोपियों को यह बताया था कि ऐसे स्नान से जल देवता का अपमान होता है।

जब आप स्नान करते हैं तो उस समय आपके गीले वस्त्रों से जो जल धरती पर गिरता है वो जो पेड़ पौधे की योनि में चले गए हैं उसे ग्रहण कर लेते हैं।

जिससे कि उन्हें तृप्ति और आपको पुण्य फल की प्राप्ति होती है। किंतु जो मनुष्य नग्न होकर स्नान करते हैं उससे जल के देवता वरुण तथा पितर शक्तियां उसके पीछे हो जाते हैं और उनके होने से उसके जीवन के कष्ट बढ़ जाते हैं।

समझदारी इसी में है कि यदि आपकी कोई ऐसी आदत है तो आज ही आप अपनी इस आदत को बदल दीजिए।



आवश्यक नींद

अब बात करते हैं दूसरी आदत की। दोस्तों जिस प्रकार से भोजन जरूरी है ठीक उसी प्रकार से मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए नींद भी जरूरी है।

नींद के संदर्भ में विष्णु पुराण कहता है कि किसी भी मनुष्य को जरूरत से ज्यादा सोना भी नहीं चाहिए और जरूरत से ज्यादा जागना भी नहीं चाहिए।

किंतु जो मनुष्य इस नियम की अवहेलना करते हैं तो बहुत ही शीघ्र उनकी आयु का पतन होने लगता है और वह समय के पहले ही काल के गाल में समा जाता है।

वैसे दोस्तों एक स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। हालांकि नींद के संदर्भ में हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने अत्यंत ही अध्ययन किया था।

इसके आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि किसी भी मनुष्य को कभी भी उत्तर दिशा में सिर करके नहीं सोना चाहिए क्योंकि इस दिशा में धरती का चुंबक होता है जो आपके शरीर के रक्त में मौजूद लो तत्व को अपनी और आकर्षित करता है।

और जब आप ऐसा करते हैं तो आपके सिर में खिंचाव होना शुरू हो जाता है और यह स्वरूप से धीरे-धीरे करके आपकी मस्तिष्क की नसों को क्षतिग्रस्त करता है।

इससे मनुष्य को मानसिक अशांति तथा विभिन्न प्रकार की बीमारियों से जूझना पड़ता है। कई लोगों ने आदत डाली है हुई है नग्‍न होकर सोने की।

इनका मानना है कि इससे नींद अच्छी आती है। जबकि विष्णु पुराण में इस बात की सख्त मनाही है। इसमें बताया गया है कि रात को सोते समय आपके पितर आपसे संपर्क करते हैं।

ऐसे में यदि आपको इस नग्‍न अवस्था में देखते हैं तो वह आपसे बहुत नाराज होते हैं और आपको आशीर्वाद देने के बजाय कुपित होकर आपको श्राप दे देते हैं। इससे आपके जीवन की परेशानियां बढ़ जाती हैंं।

वैसे गरुड़ पुराण का इस संदर्भ में यह कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वायुमंडल में उपस्थित बहुत ही नकारात्मक शक्तियां विशेषकर जिन्होंने अधूरी इच्छा के साथ अपना शरीर त्यागा था।

वह मरने के बाद किसी साथी की तलाश में घूमती रहती है और जब वह किसी नग्‍न व्यक्ति को देखती है तो उसके साथ संबंध बनाती है।

व्‍यक्ति को तो यही लगता है कि उसने कोई सपना देखा है। विशेषकर यह घटना महिलाओं के साथ ज्यादा होती है।



नियमित रूप से व्यायाम

तीसरी आदत है दोस्तों, शरीर को चुस्त व फुर्तीला रखने के लिए व्यायाम करना जरूरी है। संसार के प्रत्येक मनुष्य को अपनी क्षमता के अनुसार चाहे वह स्त्री हो या पुरुष व्यायाम अवश्य ही करना चाहिए।

नियमित व्यायाम शरीर को बलशाली बनाता है बल्कि पुरुषार्थ में भी वृद्धि होती है। वर्तमान में लोग जरूरत से अधिक व्यायाम करते हैं।

लेकिन दोस्तों, व्‍यायाम के संदर्भ में विष्णु पुराण कहता है कि व्यायाम सिर्फ उतना ही करें जितना कि आपका शरीर बिना किसी कष्ट सहन कर सके।

यदि आप लगातार घंटों पसीना बहाते हैं तो यह अतिरिक्त श्रम आपके शरीर को कमजोर बना देता है। परिणाम स्वरूप समय से पूर्व ही आपकी मृत्यु हो जाती है।

अतः दोस्तों इसमें कोई शक नहीं है कि शरीर के लिए व्यायाम जरूरी है लेकिन यह व्यायाम कब और कितना करना चाहिए यह बात बहुत मायने रखती है। बेहतर होगा कि व्यायाम आप किसी योग गुरु की निगरानी में ही करें।



नौकरी अथवा व्यापार करना

अब बात करते हैं चौथी आदत की, दोस्तों संसार के प्रत्येक मनुष्य को गृहस्थी चलाने के लिए नौकरी अथवा व्यापार करना अनिवार्य है। अर्थात धन के कुछ भी संभव नहीं है।

लेकिन दोस्तों व्यापार के संदर्भ में विष्णु पुराण कहता है कि किसी भी मनुष्य को मान लाल रंग के कपड़े आदि प्रकार के पदार्थों को बेचने अत्यधिक मुनाफाखोरी नहीं करनी चाहिए।

किंतु फिर भी यदि कोई ऐसा करता है तो उसे तथा उसके परिवार को दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इन चीजों के व्यापार से क्या हानि हो सकती है।

तो सुनिए जो कि मांस जानवरों से प्राप्त होता है, आज के दौर में कई लोग मांस प्राप्त करने के लिए प्राणियों को मारकर उनका जीवन छीन लेते हैं।

जबकि देखा जाए तो इस संसार में यह अधिकार किसी के भी पास नहीं है कि वह किसी को मारकर उसे जीवन के सुख से वंचित कर दे। अब बात करते हैं लाल कपड़े की।

लाल कपड़े पर व्यापारी को अधिक मुनाफाखोरी नहीं करनी चाहिए जिसका प्रयोग पूजा पाठ में किया जाता है।

हमारे वैदिक ऋषि मुनियों ने ऊर्जा पर बहुत ही गहन अध्ययन किया था जिसके आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग होती है। 



निर्जन या एकांत स्थान पर ज्यादा देर तक रुकना

इसी प्रकार हमारे वैदिक ऋषि मुनियों ने ऊर्जा पर बहुत ही गहन अध्ययन किया था जिसके आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग ऊर्जा होती है।

कुछ स्थानों पर नकारात्मक उर्जा रहती है जबकि दूसरी ओर नकारात्‍मक ऊर्जा रहती है। तो आपके लिए अलग स्थानों पर अलग-अलग ऊर्जाएँ होती हैंं।

जैसा शमशान जैसी सुनसान स्थानों पर नकारात्मक उर्जा रहती है जबकि वहीं दूसरी ओर देवालय या मंदिरों में अत्यंत ही सकारात्मक ऊर्जा वास करती है।

हालांकि सकारात्मक उर्जा तो आपके लिए शुभ फलदाई है किंतु नकारात्मक उर्जा आपकी जिंदगी को तबाह कर सकती है।

संभवत: इसी कारणवश विष्णु पुराण में बताया गया है कि किसी भी मनुष्य को बिल्कुल सुनसान निर्जन एकांत स्थान पर ज्यादा देर तक नहीं रुकना चाहिए।

विशेषकर रात्रि के समय और यह बात दोस्तों काफी हद तक सही भी है। क्योंकि देखा जाए तो भूत-प्रेत जैसे जितनी भी नकारात्मक शक्तियां है वह ज्यादातर अंधकार भरी अथवा निर्जन स्थानों की तलाश में रहती है।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इनकी चपेट में आ जाए तो उसे आसानी से अपना शिकार बना सकती है। वैसे दोस्तों विष्णु पुराण यह भी कहता है कि रात्रि के समय आपको किसी पेड़ के पास भी नहीं जाना चाहिए।

यह पेड़ दिन के समय तो ऑक्‍सीजन देकर मदद करते हैं, वहीं पर रात में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं जो सांस लेने में समस्या हो सकती है।



ज्यादा लंबे समय तक संभोग करना

अब बात करते हैं संभोग के बारे में। जिस प्रकार से धरती के सभी प्राणी खाते-पीते सोते हैं, ठीक उसी प्रकार से संभोग भी करते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

यह मनुष्य के लिये मनोरंजन का भी एक साधन है। लेकिन दोस्तों समागम के संबंध में विष्णु पुराण कहता है कि किसी भी मनुष्य को ज्यादा लंबे समय तक अथवा कई घंटों तक संबंध नहीं बनाना चाहिए।

इसकी मुख्य वजह यह है कि संबंध बनाने से एक ओर शरीर में दुर्बलता आती है जबकि वहीं दूसरी ओर से मनुष्यों की मनोवृत्ति भी खराब होने लगती है।

मनुष्य को सिवाय कामवासना के कुछ और नहीं सूझता है। कभी कभी अधिक उत्तेजना के कारण दिल का दौरा भी पड़ जाता है और संबंध बनाते समय ही मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।



दोस्‍तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी यह जानकारी पसंद आयी हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!

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